*जिला स्तरीय जनसुनवाई में ही नहीं हो पा रहा आवेदनों का शत-प्रतिशत निराकरण, अब ग्राम पंचायत स्तर की जनसुनवाई पर उठ रहे सवाल*
दैनिक रेवांचल टाईम्स - *भोपाल/सिवनी* -सिवनी जिले की कलेक्टर नेहा मीणा द्वारा प्रत्येक मंगलवार को ग्राम पंचायत स्तर पर जनसुनवाई आयोजित किए जाने का आदेश जारी किया गया है। इस पहल का उद्देश्य ग्रामीणों की समस्याओं और शिकायतों को उनके गांव के नजदीक ही सुनना तथा उनके निराकरण की दिशा में कार्रवाई करना बताया जा रहा है। इससे ग्रामीणों को अपनी समस्याएं लेकर जिला मुख्यालय अथवा तहसील कार्यालयों तक बार-बार जाने से राहत मिलने की उम्मीद है।
ग्राम पंचायत स्तर पर आयोजित होने वाली जनसुनवाई में राजस्व, पंचायत, पेयजल, सड़क, बिजली, आवास, सामाजिक सुरक्षा पेंशन सहित विभिन्न विभागों से संबंधित शिकायतें एवं आवेदन प्राप्त किए जाएंगे। प्रशासन की यह पहल ग्रामीणों तक शासन की पहुंच बढ़ाने और स्थानीय स्तर पर समस्याओं को सुनने की दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
*सवाल निराकरण की व्यवस्था पर*
हालांकि इस व्यवस्था के साथ सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा होता है कि ग्राम पंचायत स्तर पर आवेदन तो प्राप्त हो जाएंगे, लेकिन उनका निराकरण किस स्तर पर और कितनी समय सीमा में होगा?
मध्य प्रदेश सरकार द्वारा प्रदेश के सभी जिलों में जिला स्तर पर जनसुनवाई आयोजित की जाती है। जिला स्तरीय जनसुनवाई में विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहते हैं और नागरिकों की शिकायतों एवं आवेदनों को सुनकर संबंधित विभागों को कार्रवाई के लिए निर्देशित किया जाता है। इसके बावजूद जिला स्तरीय जनसुनवाई में प्राप्त प्रत्येक आवेदन का शत-प्रतिशत निराकरण हो पाना चुनौती बना हुआ है।
ऐसे में अब सिवनी जिले में ग्राम पंचायत स्तर पर प्रत्येक मंगलवार आयोजित होने वाली जनसुनवाई को लेकर लोगों के बीच यह चर्चा शुरू हो गई है कि जब जिला स्तर पर अधिकारियों और विभागीय तंत्र की मौजूदगी के बावजूद सभी समस्याओं का तत्काल अथवा शत-प्रतिशत निराकरण संभव नहीं हो पा रहा है, तो ग्राम पंचायत स्तर पर सीमित अधिकार वाले कर्मचारियों के माध्यम से प्राप्त आवेदनों का वास्तविक निराकरण किस प्रकार सुनिश्चित होगा?
*विश्वास की दरकार*
मंगलवार को जनसुनवाई का आयोजन तो चालू हो गया है। और अधिकारी कर्मचारी भी अपनी ड्यूटी बखूबी निभा रहे हैं। परन्तु जनता में दरकार है तो केवल विश्वास की क्यों कि ग्रामीण क्षेत्रों के परेशान ग्रामीण समस्याओं के समाधान के लिए ही जिला स्तरीय जनसुनवाई में पहुंचते थे। तब भी अधिकांश लोगों की समस्याओं पर निराकरण नहीं हो पाया है।अब ग्राम पंचायत की जनसुनवाई में स्थानीय कर्मचारीयो से समस्याएं हल होगी या नही विश्वास की दरकार है।और देखने में भी यही हुआ है कि
सिवनी के घंसौर अनुविभागीय राजस्व कार्यालय में जनसुनवाई में दिन भर में केवल एक आवेदक आवेदन लेकर पहुंचा । वह भी पहुंचा कि खाना पूर्ति के लिए आवेदक तैयार किया गया कहा नहीं जा सकता। लेकिन अनुविभागीय कार्यालय जैसी जनसुनवाई में जनता का ना पहुंचना विश्वास की कमी ही है। जिला स्तरीय जनसुनवाईयों में निराकरण सत प्रतिशत नहीं होने के बाद क्या ग्राम पंचायत स्तर पर आयोजित जनसुनवाई में निराकरण होना संभव है।
*सिर्फ आवेदन लेने तक सीमित न रह जाए जनसुनवाई*
जनसुनवाई के आदेश के बाद ग्रामीण क्षेत्र के ग्रामीणों का कहना है कि ग्राम पंचायत स्तर पर जनसुनवाई शुरू करना निश्चित रूप से स्वागत योग्य कदम है, लेकिन इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वहां प्राप्त शिकायतों पर आगे कितनी प्रभावी कार्रवाई होती है। यदि ग्राम पंचायत स्तर पर आवेदन लेकर उन्हें केवल संबंधित विभागों को भेज दिया गया और उसके बाद उनकी निगरानी नहीं हुई, तो जनसुनवाई भी महज आवेदन लेने की प्रक्रिया बनकर रह सकती है।
ग्राम पंचायत स्तर पर जनसुनवाई में मौजूद कर्मचारी यदि किसी समस्या के संबंध में स्वयं निर्णय लेने या संबंधित अधिकारी को तत्काल निर्देश देने की स्थिति में नहीं हैं, तो ऐसी स्थिति में आवेदन के निराकरण की जिम्मेदारी किस अधिकारी की होगी और उसकी जवाबदेही कैसे तय होगी, यह स्पष्ट होना आवश्यक है।
*जिला स्तरीय व्यवस्था के बाद पंचायत स्तर पर नई पहल क्यों?*
मध्य प्रदेश सरकार द्वारा जनसुनवाई की व्यवस्था जिला स्तर पर लागू किए जाने के पीछे निश्चित रूप से एक व्यापक प्रशासनिक व्यवस्था और विभागीय जवाबदेही की सोच रही होगी। जिला स्तर पर विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपलब्ध रहते हैं, जिससे शिकायतों को संबंधित विभाग तक पहुंचाने और आवश्यक कार्रवाई के निर्देश देने की व्यवस्था रहती है।
अब सिवनी जिले में ग्राम पंचायत स्तर पर प्रत्येक मंगलवार जनसुनवाई शुरू किए जाने से यह सवाल भी चर्चा में है कि क्या यह व्यवस्था जिला स्तरीय जनसुनवाई की कमियों को दूर करने में सहायक होगी या केवल ग्रामीणों की समस्याओं को एक और स्तर पर दर्ज करने तक सीमित रह जाएगी?
जनता की नजर अब परिणाम पर
ग्राम पंचायत स्तर पर जनसुनवाई का सबसे बड़ा लाभ तभी होगा जब ग्रामीणों को अपनी शिकायतों के लिए बार-बार तहसील और जिला कार्यालय के चक्कर न लगाने पड़ें। आवेदन प्राप्त होने के बाद उसकी ऑनलाइन अथवा रजिस्टर के माध्यम से निगरानी, संबंधित अधिकारी को भेजने की समय सीमा, निराकरण की समय सीमा और शिकायतकर्ता को कार्रवाई की जानकारी देने की व्यवस्था प्रभावी रूप से लागू करनी होगी।
*जनचर्चा में यह सवाल*
ग्राम पंचायत में जनसुनवाई आयोजित होने के आदेश के बाद सवाल उठ रहे हैं कि ग्राम पंचायत स्तर की जनसुनवाई प्रशासन की छवि सुधारने और ग्रामीणों को प्रशासन के करीब लाने का माध्यम बनेगी या वास्तव में लोगों की समस्याओं का समाधान भी करेगी?
फिलहाल सिवनी जिले में शुरू होने जा रही यह पहल प्रशासन के लिए एक अवसर भी है और चुनौती भी। जनसुनवाई में कितने आवेदन प्राप्त होते हैं, कितनों का मौके पर निराकरण होता है, कितने आवेदन संबंधित विभागों को भेजे जाते हैं और कितने मामलों का निर्धारित समय में वास्तविक निराकरण होता है—यही आंकड़े तय करेंगे कि ग्राम पंचायत स्तर की जनसुनवाई कितनी प्रभावी साबित होती है।
अब ग्रामीणों की नजर केवल जनसुनवाई आयोजित होने पर नहीं, बल्कि उसके बाद होने वाले वास्तविक और समयबद्ध निराकरण पर रहेगी।
