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नफरत एक दिन हारती है, इसलिए प्यार बाँटते रहना' : सुश्री सरोज


दैनिक रेवाँचल टाईम्स - प्यार और नफरत की स्थिति जीवन के प्रत्येक मोड़ पर आती रहती है। बात-बात पर लड़ते रहे तो मानसिकता कमजोर होती है। अपनी भावनाओं पर नियंत्रण करें और स्नेह बाँटते रहें तो वही ताकत बन जाती है। नफरत हमेशा से हारती आई है और स्नेह की जीत निश्चित ही होती है। नफरत से जीवन में अशांति व्याप्त होती है। हम नफरत करके अपना सब कुछ हार जाते हैं।...सुख-सुविधा, रिश्ते-नाते, सुकून। नफरत करने वाला जीवन में अकेला ही रह जाता है। अपनापन के साथ अपनों का एहसास होता है। नफरत विनाश की ओर ले जाती है और ममता से सृजन होता है। आत्मीयता मनुष्य की सबसे बड़ी हिम्मत है। दर्द को सिर्फ करुणा से दूर किया जा सकता है। स्नेह हमेशा बिखरे हुए मानव मन को जोड़ता है। स्नेह से मन मजबूत होता है। ममता से भटके-बहके मानव जीवन को एक नई दिशा मिलती है।


 नफरत से क्रोध, बैर, ईर्ष्या और बदले का भाव आता है। नफरत का परिणाम हमेशा दुखद ही होता है। नफरत करके हम अपने जीवन में गम का अंधेरा खुद कर लेते हैं। ममता की रोशनी चारों तरफ स्वयं ही फैल जाती है। स्नेह बाँटते रहिए — सभी को सहयोग देकर, अपनी मीठी मुस्कान से, मधुर वाणी से, किसी को प्रोत्साहित करके, उदासी दूर कर भावनाओं को आत्मीयता से स्पर्श करते रहिए, जीवन सरल और सुंदर होगा। हृदय में स्नेह, मन में सद्भाव रखकर ईमानदारी से कर्म करते रहिए। सद्भाव से भरे मन में ही सच्चा सुख होता है। अपनापन के बिना जीवन का हर लम्हा वीरान होता है। हर रिश्ते को आत्मीयता से सहेज कर रखिए। मन में जब नफरत की आग जलती है तो जीवन में शोक-संताप, भय, दहशत उत्पन्न होता है। नफरत से कभी मनुष्य डिप्रेशन में भी चला जाता है। नफरत करने वाला व्यक्ति खुद को ही बर्बाद नहीं करता, बल्कि नफरतपूर्ण व्यवहार परिवार, समाज और राष्ट्र के लिए भी घातक है। नफरत में ज्यादा दिन तक लिप्त रहने से व्यक्ति आक्रामक, उत्तेजित और चिड़चिड़े स्वभाव का हो जाता है। नफरत शारीरिक-मानसिक विकास में बाधक है।


   *काव्य:*

अपने हृदय के स्नेह से फूल खिलाते रहो,

नफ़रत हृदयों से मिटाते रहो।

जीवन मुस्कुराता ही जाएगा,

प्रेम और करुणा करते चलो।


 नफरत की अवस्था से जितनी जल्दी हो सके निकलिए, नहीं तो यह आपके हर पल को कड़वाहट से भर देगी। नफरत से नकारात्मक भावनाएँ सक्रिय होती हैं, जो मन को कुंठित कर देती हैं। अगर किसी कारणवश निराशा का भाव है, किसी ने हानि पहुँचाई, दुख दिया या आपकी मानसिक शांति नष्ट की, ऐसे इंसान के प्रति मन में गुस्सा होना स्वाभाविक है, लेकिन नफरत पालकर रखना बेहद नुकसानदायक है। हर हाल में खुद को सहज रखिए। मन की भड़ास को खुद को या किसी को नुकसान पहुँचाकर मत निकालिए। अपनी भावनाएँ खुलकर व्यक्त कीजिए अपनों से। सदमे से भरे मन को सहज करने में समय लगता है, बस प्रयास करते रहिए खुद को हर हाल में मजबूत बनाने का। किसी के व्यवहार से अगर आपको गहरा आघात पहुँचा है, तो उसे भूलने, माफ करने में बहुत कठिनाई होती है। नफरत करते रहने से हम कभी खुशियों को नहीं पा सकते। धीरे ही सही, लेकिन खुद को मुक्त करते रहिए हर उस वजह से जो दिल को दर्द से भर दे। सकारात्मक सोचिए। खुद को कष्ट मत दीजिए, चाहे कारण कोई भी हो। हर बात पर रोकर, अफसोस करके डिप्रेशन में मत आइए।


'प्रेम' हम सभी के जीवन का सार तत्व माना जाता रहा है, प्रेम से ही जीवन पूर्ण होता है। ममता के अभाव में गुजारा गया हर पल वीरान होता है। सृष्टि के हर कण को ममता भरी नजरों से देखिए, जिंदगी सुखद प्रतीत होगी। आत्मीयता में ठहराव है और नफरत में भटकाव होता है। करुणा आत्मा की सर्वोत्तम अनुभूति है। इसमें गहराई होती है, जिसकी कोई थाह नहीं। इसे पाना नहीं, जीना है। इसी से जीवन का हर पल आनंदित होता है। यही सदैव जीने की नई उम्मीद देता है। अपने साथ रहने वाले हर इंसान को प्यार दीजिए, भरोसा कीजिए! नफरत करने वाले एक दिन हारते हैं और उन्हें पछतावा होता है। स्नेह देने वाले कभी खाली नहीं होते। करुणा, क्षमा, दया, ममता, सम्मान, प्रोत्साहन, सांत्वना से भरे रहते हैं।

 *सुश्री सरोज कंसारी*

कवयित्री, लेखिका एवं अध्यापिका 

रिपोर्टर, उद्घोषिका, नवापारा/राजिम,

रायपुर, (छत्तीसगढ़)

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