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बिलों में गिट्टी-सीमेंट, मौके पर मटेरियल कहां? लाटो पंचायत के निर्माण पर उठे सवाल

दैनिक रेवांचल टाइम्स | घुघरी विशेष

बिलों में गिट्टी-सीमेंट, मौके पर मटेरियल गायब! लाटो पंचायत में निर्माण के नाम पर भुगतान का खेल?

मद, लागत और कार्य की जानकारी भी नहीं—निर्माण स्थल पर सूचना बोर्ड न होने से पारदर्शिता पर सवाल; बिल-वाउचर और मौके की स्थिति के मिलान की मांग

दैनिक रेवांचल टाइम्स – घुघरी। ग्राम पंचायत लाटो में निर्माण कार्यों से जुड़े भुगतान और सामग्री खरीदी को लेकर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि जिस स्थान पर निर्माण कार्य कराया जाना बताया जा रहा है, वहां अपेक्षित मात्रा में निर्माण सामग्री दिखाई नहीं दे रही, जबकि पंचायत के दस्तावेजों में गिट्टी, सीमेंट सहित अन्य सामग्री की खरीदी के बिल होने की बात कही जा रही है।

इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। इसलिए यह स्पष्ट होना जरूरी है कि बिलों में दर्ज सामग्री वास्तव में कब और कितनी खरीदी गई, उसकी आपूर्ति कहां हुई, किस निर्माण में उसका इस्तेमाल हुआ और भुगतान से पहले किस स्तर पर सत्यापन किया गया।

सबसे बड़ा सवाल—बिल है तो मटेरियल कहां है?
यदि सामग्री की खरीदी और भुगतान दस्तावेजों में दर्ज है तो मौके की वास्तविक स्थिति का बिल-वाउचर, स्टॉक और माप पुस्तिका से मिलान कर स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए।

मद का पता नहीं, लागत की जानकारी नहीं, सूचना बोर्ड भी नदारद

संबंधित निर्माण स्थल पर कार्य की स्वीकृत लागत, योजना अथवा मद, कार्य एजेंसी और अन्य प्रमुख जानकारियों वाला सूचना बोर्ड दिखाई नहीं देने की बात ग्रामीणों ने कही है। इससे यह पता लगाना मुश्किल हो रहा है कि निर्माण किस योजना के तहत स्वीकृत हुआ और इस पर कितनी राशि खर्च की जानी है।

पारदर्शिता के लिए सामने आए ये रिकॉर्ड
  • निर्माण कार्य का नाम और योजना/मद
  • प्रशासकीय एवं तकनीकी स्वीकृति
  • स्वीकृत लागत और अब तक हुआ भुगतान
  • कार्यादेश और निर्माण की समयसीमा
  • सामग्री खरीदी के बिल-वाउचर
  • माप पुस्तिका यानी एमबी में दर्ज प्रगति

मटेरियल जमीन पर नहीं, बिलों में मौजूद होने का आरोप

मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू निर्माण सामग्री से जुड़ा है। ग्रामीणों का आरोप है कि संबंधित स्थान पर काम के अनुरूप गिट्टी, सीमेंट और अन्य सामग्री मौजूद नहीं है, जबकि बिल-वाउचर में सामग्री खरीदी दर्शाए जाने की बात सामने आई है।

ऐसे में जांच में यह पता लगाया जाना जरूरी होगा कि बिल में दर्ज सामग्री किस विक्रेता से खरीदी गई, किस तारीख को आपूर्ति हुई, किस वाहन से लाई गई, कहां उतारी गई और किस कार्य में उसका उपयोग किया गया।

कागजों पर सामग्री, मौके पर इंतजार—दस्तावेज बताएंगे असल कहानी

निर्माण सामग्री मौके पर दिखाई नहीं देने भर से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि भुगतान गलत हुआ है, क्योंकि सामग्री पहले इस्तेमाल या किसी अन्य अधिकृत स्थान पर रखी भी हो सकती है। लेकिन यदि बिलों में खरीदी दर्ज है तो पंचायत और संबंधित तकनीकी अधिकारियों के पास उसकी आपूर्ति और उपयोग का सत्यापन योग्य रिकॉर्ड होना चाहिए।

इसी कारण स्थल निरीक्षण और दस्तावेजों का मिलान इस मामले में बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है। यदि बिल, माप पुस्तिका और वास्तविक निर्माण एक-दूसरे से मेल खाते हैं तो स्थिति स्पष्ट हो जाएगी; अंतर मिलने पर उसकी जवाबदेही तय करनी होगी।

माप पुस्तिका से भुगतान तक हो पूरी जांच

सिर्फ बिल देखना पर्याप्त नहीं
स्वीकृति आदेश, तकनीकी स्वीकृति, कार्यादेश, माप पुस्तिका (एमबी), बिल-वाउचर, सामग्री खरीदी, भुगतान विवरण और मौके पर हुए वास्तविक निर्माण का आपस में मिलान होने से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि सरकारी राशि के अनुरूप काम हुआ है या नहीं।

जांच में सामग्री की मात्रा और निर्माण की वास्तविक प्रगति का तकनीकी आकलन भी किया जाना चाहिए। साथ ही यह देखा जाना चाहिए कि भुगतान से पहले कार्य का भौतिक सत्यापन किस अधिकारी या तकनीकी कर्मचारी ने किया था।

अब सवाल सिर्फ मटेरियल का नहीं, भुगतान प्रक्रिया का भी

ग्रामीणों का कहना है कि मौके पर निष्पक्ष भौतिक सत्यापन कराया जाए और उसकी तुलना पंचायत के अभिलेखों से की जाए। यदि स्थल निरीक्षण और दस्तावेजों में अंतर मिलता है तो यह स्पष्ट किया जाए कि उसका कारण क्या है और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।

वहीं यदि दस्तावेज और वास्तविक निर्माण सही पाए जाते हैं तो पंचायत प्रशासन को भी रिकॉर्ड सार्वजनिक कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, ताकि अनियमितता के आरोपों और ग्रामीणों की आशंकाओं का तथ्यात्मक समाधान हो सके।

लाटो पंचायत से जुड़े इन सवालों के जवाब जरूरी

  • बिलों में दर्ज गिट्टी और सीमेंट की आपूर्ति कहां हुई?
  • निर्माण स्थल पर अपेक्षित सामग्री क्यों दिखाई नहीं दे रही?
  • काम किस योजना अथवा मद से स्वीकृत है?
  • कार्य की कुल स्वीकृत लागत कितनी है?
  • अब तक कितनी राशि का भुगतान किया गया?
  • कार्य स्थल पर सूचना बोर्ड क्यों नहीं है?
  • भुगतान से पहले किसने भौतिक सत्यापन किया?
  • माप पुस्तिका में कितनी प्रगति दर्ज की गई है?
रेवांचल टाइम्स का सवाल
अगर बिलों में निर्माण सामग्री की खरीदी दर्ज है तो उसका सत्यापन योग्य रिकॉर्ड कहां है? पंचायत अभिलेख, भुगतान और मौके की वास्तविक स्थिति का मिलान कर प्रशासन को तथ्य सार्वजनिक करने चाहिए।


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