अटैचमेंट-संलग्नीकरण और अतिशेष शिक्षकों के ‘खेल’ पर कलेक्टर की सख्ती, अब किसके दबाव में बदलेगा आदेश?
जनजातीय कार्य विभाग में मूल पदस्थापना छोड़कर दूसरी जगह जमे शिक्षकों पर कार्रवाई की तैयारी, सात दिन में मूल विद्यालय लौटने के निर्देश
दैनिक रेवांचल टाइम्स — मंडला। आदिवासी बाहुल्य मंडला जिले में शिक्षा व्यवस्था को लेकर लंबे समय से उठ रहे सवालों के बीच जिला प्रशासन ने अहम कदम उठाया है। जनजातीय कार्य विभाग के अंतर्गत विद्यालयों में किए गए शिक्षकों के अटैचमेंट-संलग्नीकरण को निरस्त करने के निर्देश जारी किए गए हैं। आदेश सामने आने के बाद विभागीय गलियारों में हलचल तेज है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि वर्षों से चली आ रही यह व्यवस्था वास्तव में समाप्त होगी या किसी नए आदेश और व्यवस्था के जरिए फिर पुराने हालात लौट आएंगे?
7 सितंबर का आदेश: सात दिन में मूल विद्यालय पहुंचें शिक्षक
जानकारी के अनुसार जिला कलेक्टर द्वारा 7 सितंबर 2026 को जारी आदेश में स्थानांतरण नीति के अतिरिक्त अन्य व्यवस्थाओं के तहत मूल संस्था से अलग किए गए शिक्षकों के अटैचमेंट-संलग्नीकरण को तत्काल प्रभाव से निरस्त करने के निर्देश दिए गए हैं।
संबंधित शिक्षकों को सात दिवस के भीतर अपनी मूल पदस्थापना वाले विद्यालय में उपस्थित होकर कार्यभार ग्रहण करने तथा इसकी जानकारी संबंधित अधिकारियों के माध्यम से जिला कार्यालय को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
दूरस्थ और वनांचल के स्कूलों में शिक्षक नहीं, फिर दूसरी जगह संलग्न क्यों?
मंडला जिले के ग्रामीण, वनांचल और आदिवासी क्षेत्रों में आज भी कई विद्यालय शिक्षकों की कमी की समस्या से जूझ रहे हैं। ऐसे में स्वाभाविक सवाल उठता है कि जब मूल विद्यालयों में शिक्षकों की आवश्यकता है तो उन्हें दूसरी संस्थाओं में संलग्न करने की जरूरत आखिर क्यों पड़ी?
शिक्षकों के संलग्नीकरण की व्यवस्था को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। आरोप रहे हैं कि शैक्षणिक अथवा अन्य व्यवस्थाओं के नाम पर कुछ शिक्षकों को उनकी मूल पदस्थापना से हटाकर दूसरी संस्थाओं में सेवाएं देने के लिए लगाया गया। यदि इससे मूल विद्यालयों में शिक्षकों की उपलब्धता प्रभावित हुई है तो इसका सीधा असर विद्यार्थियों की पढ़ाई पर पड़ना स्वाभाविक है।
कागजों में शिक्षक पूरे, जमीन पर स्कूल खाली?
सरकारी रिकॉर्ड में शिक्षकों की पदस्थापना भले निर्धारित संख्या के अनुसार दिखाई देती हो, लेकिन ग्रामीण विद्यालयों की वास्तविक स्थिति को लेकर अलग-अलग शिकायतें और सवाल सामने आते रहे हैं। कहीं सीमित शिक्षकों के भरोसे विद्यालय संचालन की बात सामने आती है तो कहीं विषयवार शिक्षकों की कमी विद्यार्थियों की पढ़ाई को प्रभावित करती दिखाई देती है।
ऐसे में कलेक्टर द्वारा संलग्नीकरण निरस्त करने का फैसला शिक्षा व्यवस्था को मूल पदस्थापना के अनुरूप व्यवस्थित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। हालांकि प्रशासन के सामने असली चुनौती आदेश जारी करना नहीं, बल्कि उसका प्रभावी पालन सुनिश्चित कराना है।
आदेश जारी होते ही ‘दबाव’ की चर्चा, क्या सात दिन बाद बदलेगी तस्वीर?
कलेक्टर का आदेश सामने आने के बाद विभागीय स्तर पर चर्चाओं का दौर तेज है। प्रभावित लोगों की ओर से आदेश में बदलाव अथवा राहत हासिल करने के लिए राजनीतिक या विभागीय स्तर पर प्रयास किए जाने की चर् ```
