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बाबूगिरी’ से परे कर्तव्यनिष्ठा की मिसाल बने सहायक नायब नाजिर प्रतीक दीक्षित




*दिवंगत कर्मचारी के परिवार से जुड़े पेंशन, GPF, PPF, फंड एवं अन्य देयकों के प्रकरणों के समयबद्ध निराकरण पर पटवारियों ने जताया आभार*


*राजस्व कार्यालयों में लेटलतीफी की आम धारणा के बीच ईमानदारी और संवेदनशीलता से काम करने वाले कर्मचारियों की सराहना जरूरी*


 *दैनिक रेवाँचल टाईम्स - लखनादौन/सिवनी।* राजस्व विभाग के कार्यालयों में आम जनता और विभागीय कर्मचारियों से जुड़े कामों को लेकर अक्सर लेटलतीफी, प्रक्रियात्मक उलझनों और बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने जैसी शिकायतें सामने आती रहती हैं। कई बार कार्यालयीन व्यवस्था में कार्य समय पर पूरा न होने से संबंधित व्यक्ति को अनावश्यक परेशानी उठानी पड़ती है। ऐसे माहौल में यदि कोई कर्मचारी पारंपरिक ‘बाबूगिरी’ की कार्यशैली से अलग हटकर अपने दायित्व को संवेदनशीलता, ईमानदारी और समयबद्धता के साथ निभाता है, तो उसकी सराहना होना निश्चित रूप से जरूरी है।


ऐसी ही कार्यशैली को लेकर मध्यप्रदेश जागरूक पटवारी संघ के प्रांताध्यक्ष सतीश सोनी ने और मध्यप्रदेश पटवारी संघ तहसील शाखा लखनादौन, जिला सिवनी ने लखनादौन तहसील में पदस्थ सहायक नायब नाजिर प्रतीक दीक्षित के प्रति आभार व्यक्त करते हुए प्रशंसा पत्र जारी किया है। संघ द्वारा जारी पत्र में उनके द्वारा दिवंगत पटवारी कुंजभवन हनुमत के देवलोक गमन के पश्चात उनके परिवार से जुड़े विभिन्न सेवा-संबंधी प्रकरणों के निराकरण में किए गए सहयोग की विशेष रूप से सराहना की गई है।


 *पेंशन से लेकर GPF-PPF एवं अन्य देयकों तक किया सहयोग* 


पटवारी पदाधिकारी ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि दिवंगत कर्मचारी से संबंधित पेंशन, GPF, PPF, फंड एवं अन्य देयकों के प्रकरणों को सहायक नायब नाजिर प्रतीक दीक्षित ने संवेदनशीलता, तत्परता एवं कर्तव्यनिष्ठा के साथ समयबद्ध तरीके से निराकृत कराने में सहयोग किया।


किसी कर्मचारी के निधन के बाद उसके परिवार के लिए पेंशन एवं अन्य वित्तीय लाभ केवल सरकारी प्रक्रिया का हिस्सा नहीं होते, बल्कि कठिन समय में परिवार के लिए आर्थिक सहारा भी होते हैं। ऐसे में यदि इनसे जुड़े प्रकरण अनावश्यक रूप से लंबित रहें तो परिवार की परेशानी और बढ़ सकती है। इसके विपरीत, संबंधित कर्मचारी यदि मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में सहयोग करे तो जरूरतमंद परिवार को समय पर राहत मिल सकती है।


मध्य प्रदेश जागरूक पटवारी संघ के अनुसार, श्री दीक्षित के सहयोग से शोकाकुल परिवार को कठिन समय में आवश्यक आर्थिक एवं प्रशासनिक सहायता समय पर प्राप्त हो सकी।


 *‘बाबूगिरी’ की धारणा बदलने वाले कर्मचारी भी हैं विभाग में* 


राजस्व कार्यालयों में पदस्थ लिपिक वर्ग को लेकर आम बोलचाल में ‘बाबूगिरी’ शब्द का इस्तेमाल अक्सर ऐसे व्यवहार के लिए किया जाता है, जिसमें फाइलों और प्रकरणों को अनावश्यक रूप से लंबित रखने अथवा लोगों को बार-बार कार्यालय आने की स्थिति बनती है। हालांकि यह भी महत्वपूर्ण है कि पूरे लिपिक वर्ग को एक ही नजर से देखना उचित नहीं है। विभाग में बड़ी संख्या में ऐसे कर्मचारी भी हैं जो अपने दायित्वों का निर्वहन पूरी जिम्मेदारी और ईमानदारी से करते हैं।


लखनादौन तहसील में सहायक नायब नाजिर के पद पर कार्यरत प्रतीक दीक्षित के प्रति पटवारी संघ का यह आभार पत्र इसी सकारात्मक पक्ष को सामने लाता है। इससे यह संदेश भी जाता है कि कार्यालय में पद छोटा या बड़ा नहीं, बल्कि अपने दायित्व के प्रति कर्मचारी का दृष्टिकोण महत्वपूर्ण होता है।


 *‘काम को टालना नहीं, समय पर पूरा करना’ बने कार्यालयीन संस्कृति* 


सरकारी कार्यालय आम जनता और कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण सेवा केंद्र होते हैं। राजस्व विभाग में तो आम नागरिकों के साथ-साथ पटवारी एवं अन्य मैदानी कर्मचारियों के अनेक प्रशासनिक और सेवा संबंधी कार्य भी कार्यालयों के माध्यम से होते हैं। ऐसे में प्रत्येक स्तर पर समयबद्ध कार्यप्रणाली, पारदर्शिता और संवेदनशील व्यवहार बेहद जरूरी है। सिवनी जिले की अनेक तहसीलों में तो विभागीय कर्मचारी जिसमें पटवारी भी अपनी वेतन संबंधित कई समस्याओं को लेकर जिले की तहसीलो में कार्यरत कई लापरवाह बाबूओं की बाबूगिरी से परेशान है।


एक कर्मचारी की छोटी-सी तत्परता भी किसी परिवार के लिए बड़ी राहत बन सकती है। खासकर किसी कर्मचारी की मृत्यु के बाद उसके परिवार को मिलने वाले वैधानिक लाभों के मामलों में संवेदनशीलता और शीघ्रता का विशेष महत्व है।


 *पटवारी संघ ने कहा—सेवाभाव और संवेदनशीलता अनुकरणीय* 


मध्यप्रदेश जागरूक पटवारी संघ प्रांताध्यक्ष और मध्यप्रदेश पटवारी संघ, तहसील शाखा लखनादौन ने अपने पत्र में  प्रतीक दीक्षित द्वारा प्रदर्शित सेवाभाव, मानवीय संवेदनशीलता एवं कर्मचारी हितों के प्रति समर्पण को अत्यंत प्रशंसनीय एवं अनुकरणीय बताया है। वहीं सराहनीय कार्य के लिए उन्हें हृदय से धन्यवाद ज्ञापित करते हुए उनके उत्तम स्वास्थ्य, उज्ज्वल भविष्य एवं निरंतर प्रगति की मंगलकामना की है।


 *अच्छे कार्य की सार्वजनिक सराहना से बढ़ता है कर्मचारियों का मनोबल* 


सरकारी व्यवस्था में जहां लापरवाही या देरी पर सवाल उठाना जरूरी है,तो वहीं अच्छे कार्य करने वाले कर्मचारियों की सार्वजनिक रूप से प्रशंसा करना भी उतना ही आवश्यक है। इससे ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा को प्रोत्साहन मिलता है तथा अन्य कर्मचारियों को भी अपने दायित्वों का निर्वहन बेहतर तरीके से करने की प्रेरणा मिलती है।


पटवारी संघ का यह आभार केवल एक कर्मचारी को धन्यवाद देने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संदेश भी देता है कि सरकारी कार्यालयों में ‘बाबूगिरी’ नहीं, बल्कि ‘कर्तव्यगिरी’ की आवश्यकता है—जहां फाइलों को रोकने के बजाय आगे बढ़ाया जाए, लोगों को भटकाने के बजाय मार्गदर्शन दिया जाए और नियमों के दायरे में रहते हुए जरूरतमंद को उसका हक समय पर दिलाया जाए।

यही कार्यप्रणाली किसी भी सरकारी कार्यालय की वास्तविक कार्य-संस्कृति और जनता के प्रति उसकी संवेदनशीलता की पहचान बन सकती है।

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