हादसे में घायल गाय ने तोड़ा दम, एसडीएम के जांच आदेश के बाद भी मौतों का सिलसिला जारी
दैनिक रेवाँचल टाईम्स - मंडला, जिले के नैनपुर में मुक्तिधाम परिसर में संचालित गौशाला में गौवंश की मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। कल सड़क हादसे में घायल हुई एक गाय ने आज दम तोड़ दिया। लगातार सामने आ रही मौतों की घटनाओं से स्थानीय लोगों में चिंता का माहौल है। वहीं, नगर पालिका द्वारा अब तक गौशाला में मृत गौवंश की कुल संख्या का कोई आधिकारिक आंकड़ा सार्वजनिक नहीं किया गया है।
मौके पर घटनाओं को देखने वाले स्थानीय लोगों का दावा है कि अब तक करीब 25 से 30 गौवंश की मौत हो चुकी है। लोगों का कहना है कि कई बार मृत गौवंश को ट्रैक्टर के माध्यम से वहां से ले जाते हुए उन्होंने देखा है। हालांकि इस संख्या की नगर पालिका अथवा पशु चिकित्सा विभाग की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में मृत गौवंश की वास्तविक संख्या और मृत्यु का पूरा रिकॉर्ड सामने लाना अब प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण हो गया है।
गौरतलब है कि गौशाला में लगातार हो रही मौतों और अव्यवस्थाओं को लेकर पूर्व में एसडीएम नैनपुर को लिखित आवेदन दिया गया था। आवेदन में गौशाला के संचालन, गौवंश की लगातार मौत, पर्याप्त चारा एवं चिकित्सा व्यवस्था, साफ-सफाई तथा मुक्तिधाम की भूमि के उपयोग को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए थे।
आवेदन में यह भी उल्लेख किया गया था कि संबंधित भूमि राजस्व अभिलेखों में "मध्यप्रदेश शासन-हिन्दुओं का श्मशान घाट" के नाम से दर्ज है। इसके बावजूद वहां गौशाला संचालित होने से मुक्तिधाम की मूल व्यवस्था एवं गरिमा प्रभावित होने की बात कही गई थी। आवेदन में यह भी बताया गया था कि समाज के दानदाताओं द्वारा अंतिम संस्कार में आने वाले लोगों के बैठने के लिए बनाए गए चबूतरों पर गौवंश को बांधा जा रहा है, जबकि अंतिम संस्कार के लिए लकड़ी और कंडे रखने वाले स्थानों पर गौशाला का सामान रखा जा रहा है। परिसर में चारा, सब्जियों के अवशेष और अन्य सामग्री बिखरे रहने से गंदगी की स्थिति का भी उल्लेख किया गया था।
इस शिकायत पर अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), नैनपुर ने 7 अगस्त 2026 को मुख्य नगर पालिका अधिकारी को पत्र भेजकर आवेदन में बताए गए तथ्यों की जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। पत्र में की गई कार्रवाई से आवेदक तथा एसडीएम कार्यालय को अवगत कराने के लिए भी कहा गया है। अब इस जांच प्रक्रिया के बीच लगातार नई मौत सामने आने से लोगों की चिंता और बढ़ गई है।
इससे पहले एसडीएम के निर्देश पर मंडला से पशु चिकित्सा विभाग की टीम भी गौशाला पहुंची थी। डिप्टी डायरेक्टर पशु चिकित्सा विभाग मंडला डॉ. उग्रसेन तिवारी ने गौवंश का स्वास्थ्य परीक्षण किया था। विभाग की प्राथमिक जांच में पॉलीथिन खाने और पर्याप्त पोषण नहीं मिलने जैसी परिस्थितियों को संभावित कारणों में बताया गया था। हालांकि मृत्यु का वास्तविक कारण पोस्टमार्टम के बाद ही स्पष्ट हो सकता है। विभाग की ओर से निरीक्षण के बाद किसी भी गौवंश की मृत्यु होने पर आधिकारिक पोस्टमार्टम कराने के निर्देश भी दिए गए थे।
अब कल सड़क दुर्घटना में घायल हुई गाय की आज मौत के बाद सवाल उठ रहा है कि क्या इस गाय का भी आधिकारिक पोस्टमार्टम कराया जाएगा और उसकी मृत्यु का वास्तविक कारण रिकॉर्ड में दर्ज किया जाएगा?
मामले का एक अहम पहलू यह भी है कि गौशाला संचालित होने के बावजूद नगर की सड़कों पर गौवंश के घूमने की तस्वीरें लगातार सामने आ रही हैं। ऐसे में नागरिक सवाल उठा रहे हैं कि यदि गौशाला का उद्देश्य निराश्रित गौवंश को सुरक्षित आश्रय देना है, तो गौवंश सड़कों पर क्यों घूम रहा है और दुर्घटनाओं का शिकार क्यों हो रहा है।
*मुक्तिधाम में गौशाला को लेकर धार्मिक चिंता*
मुक्तिधाम की भूमि पर गौशाला संचालन को लेकर धार्मिक पक्ष भी चर्चा में है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि हिन्दू परंपरा में मुक्तिधाम अंतिम संस्कार और धार्मिक कर्मकांडों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण एवं पवित्र स्थान माना जाता है। ऐसे में श्मशान परिसर में गौशाला संचालन को लेकर शुरू से ही आपत्तियां रही हैं। लगातार हो रही गौवंश की मौतों के बाद यह विषय धार्मिक भावनाओं और जनचिंता से भी जुड़ गया है।
*वृंदावन के पंडित शांतनु शर्मा के विचार के अनुसार*
जिस नगर में लगातार गौवंश की अकाल मृत्यु हो रही हो, वहां व्यवस्था, शासन और समाज की संवेदनशीलता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। उनके अनुसार धर्म, करुणा और जीवों की रक्षा किसी भी समाज के मूल नैतिक मूल्यों का हिस्सा है। गौवंश की लगातार उपेक्षा केवल पशु कल्याण का विषय नहीं, बल्कि समाज की संवेदनशीलता से भी जुड़ा विषय है। उनका कहना है कि जहां अन्न-जल देने वाली और पूजनीय गौवंश की रक्षा नहीं हो पाती, वहां समाज के नैतिक और धार्मिक मूल्यों को लेकर चिंता होना स्वाभाविक है।
फिलहाल नगर पालिका की ओर से गौशाला में हुई कुल मौतों का आधिकारिक आंकड़ा सामने नहीं आया है। स्थानीय लोगों के दावों और लगातार सामने आ रही घटनाओं के बीच अब प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती मृत गौवंश की वास्तविक संख्या, प्रत्येक मृत्यु का कारण और गौशाला की वास्तविक व्यवस्था को स्पष्ट करना है।
स्थानीय लोगों की मांग है कि गौशाला में मौजूद गौवंश की संख्या, मृत गौवंश का आधिकारिक रिकॉर्ड, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, चारा एवं चिकित्सा व्यवस्था तथा गौशाला संचालन से जुड़े वित्तीय और प्रशासनिक रिकॉर्ड सार्वजनिक किए जाएं। साथ ही एसडीएम के निर्देश पर चल रही जांच को निष्पक्ष एवं समयबद्ध तरीके से पूरा कर, यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदारी तय की जाए।
