जयकुमार नागवंशी और मित्रमंडल ने 10 नदियों का जल अर्पित कर देश की सुख-समृद्धि की कामना की
30 लाख श्रद्धालुओं की रिकॉर्ड उपस्थिति के बीच गूंजे 'हर-हर महादेव' और 'जय भूराभगत' के जयकारे
रेवांचल टाइम्स छिंदवाड़ा|नागपंचमी के पावन अवसर पर छिंदवाड़ा जिले के ग्राम नेर से 'हर हर महादेव श्री भूराभगत महाराज मित्रमंडल' के तत्वाधान में एक ऐतिहासिक एवं भव्य कावड़ पदयात्रा का सफल आयोजन किया गया। हनुमान भक्त जयकुमार नागवंशी एवं उनके समर्पित मित्रमंडल ने अटूट श्रद्धा और अदम्य साहस का परिचय देते हुए महज 29 घंटे में 96 किलोमीटर की दुर्गम पैदल दूरी तय कर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया।
पचमढ़ी से प्रारंभ होकर यह विशाल पदयात्रा घने जंगलों, ऊंची पहाड़ियों और गहरी खाइयों के प्राकृतिक सौंदर्य से होते हुए प्रसिद्ध नागद्वार, चौरागढ़ और श्री भूराभगत भोलेनाथ मंदिर पहुंची। यात्रा के दौरान जयकुमार नागवंशी एवं कावड़ियों ने मां नर्मदा सहित नौ पवित्र नदियों के जल से भगवान शिव और नागदेव का विधिवत जलाभिषेक एवं दुग्धाभिषेक कर पूजा-अर्चना की।
10 वर्षों का रिकॉर्ड टूटा, उमड़ा 30 लाख श्रद्धालुओं का जनसैलाब
यात्रा के दौरान नागद्वार एवं चौरागढ़ मंदिर के मुख्य पुजारी से चर्चा करते हुए जब जयकुमार नागवंशी ने श्रद्धालुओं की उपस्थिति के बारे में जानकारी ली, तो पुजारी ने बताया कि पिछले 10 वर्षों के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है जब 30 लाख से भी अधिक शिवभक्तों ने इस दुर्गम और घने जंगलों वाले मार्ग से गुजरकर भगवान नागदेव और भोलेनाथ के दर्शन किए हैं। पूरे मार्ग में 'जय भूराभगत', 'हर-हर महादेव' और 'जय श्री राम' के भक्तिमय जयकारों से अंचल गुंजायमान रहा।
जन-कल्याण और विश्व शांति की कामना
पदयात्रा के मुख्य आयोजक एवं हनुमान भक्त जयकुमार नागवंशी ने बताया कि यह ऐतिहासिक एवं कठिन कावड़ यात्रा समस्त देशवासियों की सुख, शांति, समृद्धि और खुशहाली की मंगल कामना को लेकर निकाली गई थी। यात्रा का समापन एक विशाल भंडारे के महाप्रसाद वितरण के साथ हुआ, जिसमें मध्यप्रदेश ही नहीं बल्कि देश-विदेश से आए लाखों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।
प्रशासन एवं श्रद्धालुओं का जताया आभार
यात्रा के सफल एवं सुरक्षित समापन पर जयकुमार नागवंशी ने सुचारू व्यवस्थाओं के लिए स्थानीय शासन-प्रशासन का विशेष धन्यवाद ज्ञापित किया। साथ ही उन्होंने यात्रा में शामिल हुए तथा समापन अवसर पर पहुंचे लाखों श्रद्धालुओं एवं सहयोगियों का ह्रदय से आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह सनातन परंपरा इसी प्रकार अटूट और भव्य रूप से निरंतर चलती रहेगी।
