दैनिक रेवांचल टाइम्स की लगातार खबरों के बावजूद जिम्मेदारों की चुप्पी पर सवाल
दैनिक रेवांचल टाइम्स घुघरी। प्राथमिक शाला सहजर के जर्जर भवन और बारिश में टपकती दीवारों को लेकर दैनिक रेवांचल टाइम्स मंडला द्वारा लगातार खबरों के माध्यम से शासन-प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया जा रहा है। बावजूद इसके विद्यालय की बदहाल स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं होने से शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली और जिम्मेदार अधिकारियों की संवेदनशीलता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
एक ओर शासन बच्चों को बेहतर शिक्षा, सुरक्षित विद्यालय और आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के दावे करता है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण क्षेत्र के नौनिहाल ऐसे भवन में पढ़ने को मजबूर हैं, जहां बारिश के दौरान पानी टपकने और भवन की जर्जर स्थिति के कारण सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है।
खबरों का असर क्यों नहीं?
दैनिक रेवांचल टाइम्स ने विद्यालय की समस्या को प्रमुखता से प्रकाशित कर जिम्मेदार विभाग तक पहुंचाने का प्रयास किया। खबरों के माध्यम से यह सवाल भी उठाया गया कि आखिर बच्चों की सुरक्षा से जुड़ी समस्या पर विभाग कब संज्ञान लेगा। लेकिन लगातार समाचार प्रकाशन के बाद भी यदि मौके पर स्थिति जस की तस बनी हुई है, तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या विभाग को किसी बड़े हादसे का इंतजार है?
समाचार प्रकाशित होने के बाद सामान्य तौर पर संबंधित अधिकारी मौके का निरीक्षण कर स्थिति का जायजा लेते हैं और आवश्यक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की जाती है। लेकिन सहजर स्कूल और अन्य जर्जर हालत पर पड़े स्कूलों के मामले में ऐसी प्रभावी कार्रवाई कब होगी, यह अब बड़ा सवाल बन गया है।
*जर्जर भवन में मासूमों की सुरक्षा कौन सुनिश्चित करेगा?*
विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चे स्वयं अपनी सुरक्षा के लिए कोई निर्णय नहीं ले सकते। उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी पूरी तरह शासन-प्रशासन और संबंधित विभाग की है। ऐसे में यदि भवन की स्थिति वास्तव में जर्जर है, तो उसकी तकनीकी जांच कराकर बच्चों के लिए सुरक्षित व्यवस्था करना जरूरी है। बारिश के मौसम में टपकती दीवारें, खराब छत अथवा कमजोर प्लास्टर जैसी स्थिति केवल असुविधा का विषय नहीं है, बल्कि संभावित दुर्घटना का कारण भी बन सकती है। ऐसे में सवाल यह है कि जिम्मेदार अधिकारी निरीक्षण और कार्रवाई के लिए किसी हादसे का इंतजार क्यों करें?
*कागजों में शिक्षा व्यवस्था मजबूत, जमीन पर तस्वीर अलग*
सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा व्यवस्था मजबूत करने और बच्चों को बेहतर सुविधाएं देने के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित कर रही है। लेकिन योजनाओं और दावों की वास्तविक परीक्षा ऐसे ही ग्रामीण विद्यालयों में होती है। यदि किसी प्राथमिक विद्यालय के भवन की स्थिति लंबे समय से खराब है और लगातार खबरों के प्रकाशन के बावजूद सुधार नहीं हो रहा, तो यह केवल भवन की समस्या नहीं रह जाती, बल्कि निगरानी व्यवस्था और विभागीय जवाबदेही पर भी सवाल खड़ा करती है।
जिम्मेदारों से अब सीधा सवाल
दैनिक रेवांचल टाइम्स द्वारा लगातार मामला उठाए जाने के बाद अब संबंधित विभाग से यह अपेक्षा है कि वह प्राथमिक शाला सहजर का तत्काल निरीक्षण कराए और भवन की वास्तविक स्थिति सार्वजनिक करे।
क्या भवन सुरक्षित है?
क्या इसकी तकनीकी जांच कराई गई है?
यदि भवन जर्जर है तो बच्चों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं की गई?
और खबरों के प्रकाशन के बाद अब तक क्या कार्रवाई की गई?
*इन सवालों का जवाब विभाग को देना चाहिए।*
बच्चों की सुरक्षा किसी फाइल की तरह लंबित रखने का विषय नहीं है। यदि भवन की स्थिति खराब है तो समय रहते मरम्मत, पुनर्निर्माण अथवा वैकल्पिक व्यवस्था करना विभाग की जिम्मेदारी है। अब देखना यह है कि दैनिक रेवांचल टाइम्स की लगातार खबरों के बाद विभाग जागता है या फिर मासूमों की सुरक्षा से जुड़ा यह मामला भी सरकारी फाइलों में दबकर रह जाता है।
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