दैनिक रेवांचल टाईम्स - रुद्राक्ष का अर्थ रुद्राक्ष को हिंदू धर्म में काफी पवित्र माना गया है रुद्राक्ष दो शब्दों से मिलकर बना है पहला शब्द है रुद्र अर्थात भगवान शिव अक्ष अर्थात नेत्र मान्यता है कि भगवान शिव के नेत्रों से जहां-जहां अश्रु गिरे वहां रुद्राक्ष के वृक्ष उग गए
देवों के देव महादेव कहे जाने वाले भगवान शिव और रुद्राक्ष का गहरा संबंध है भगवान शिव को लेकर कई सारी पौराणिक कथाएं प्रचलित है भगवान शिव को रुद्राक्ष की माला धारण किए हुए आपने देखा होगा भगवान शिव से जुड़े होने के कारण रुद्राक्ष को बहुत ही पवित्र माना जाता है रुद्राक्ष को धारण करने मात्र से ही जीवन से सभी प्रकार के कष्ट दूर हो जाते हैं शिव पुराण के अनुसार रुद्राक्ष की उत्पत्ति भगवान शिव के आंसुओं से हुई थी इसलिए इसे भगवान शिव का स्वरूप माना जाता है प्राणियों के कल्याण के लिए जब कई सालों के बाद तक ध्यान करने के बाद भगवान शिव ने आंखें खोली तब आंसुओं की बूंद गिरी और धरती मां ने रुद्राक्ष के पेड़ों को जन्म दिया
एक अन्य पौराणिक कथा के अनुसार माता सती ने जब हवन कुंड में कूद कर आत्म दाह कर लिया था और महादेव विचलित होकर उनके जले हुए शरीर को तीनों लोकों में विलाप करते हुए विचरण कर रहे थे कहा जाता है की शिव के विलाप के कारण जहां-जहां भगवान शिव के आंसू टपके वहां-वहां रुद्राक्ष के वृक्ष उत्पन्न हुए
एक मुखी रुद्राक्ष
एक मुखी रुद्राक्ष इसे साक्षात शिव का स्वरूप कहा गया है इसे धारण करने से जीवन में किसी तरह की कमी नहीं रहती एक मुखी रुद्राक्ष अत्यंत दुर्लभ माना जाता है
दो मुखी रुद्राक्ष
दो मुखी रुद्राक्ष को शिव शक्ति का स्वरूप माना जाता है इसे धारण करने से आत्मविश्वास और मन की शांति प्राप्त होती है
तीन मुखी रुद्राक्ष
इस रुद्राक्ष में ब्रह्मा विष्णु और महेश की त्रिगुणात्मक शक्ति होती है यह परम शांति खुशहाली दिलाने वाला रुद्राक्ष है इसे धारण करने से घर में सुख संपत्ति यश सौभाग्य का लाभ होता है।
चार मुखी रुद्राक्ष
इसे ब्रह्मा का रूप माना जाता है यह इंसान को जीवन का उद्देश्य काम और मोक्ष देने वाला है त्वचा के रोग मानसिक क्षमता एकाग्रता में इसका विशेष लाभ होता है।
पांच मुखी रुद्राक्ष
इसे रुद्र का साक्षात स्वरूप बताया गया है यह पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध होता है माला के लिए इसी रुद्राक्ष का उपयोग किया जाता है इसको पहनने से मंत्र शक्ति और ज्ञान प्राप्त होता है
6 मुखी रुद्राक्ष
इसे भगवान कार्तिकेय का रूप माना गया है ज्ञान और आत्मविश्वास के लिए खास माना जाता है इसे दाहिने हाथ में पहनना चाहिए
सात मुखी रुद्राक्ष
इस को सप्त ऋषि का स्वरूप माना जाता है इसको धारण करने से आर्थिक संपन्नता प्राप्त होती है इसके धारण से मत्रों के जप का फल प्राप्त होता है
आठ मुखी रुद्राक्ष
यह रुद्राक्ष अष्टभुजा देवी और देवों में पूजे जाने वाले गणेश जी का स्वरूप है इसे धारण करने से दिव्य ज्ञान की प्राप्ति और मुकदमा में सफलता प्राप्त होती है अष्ट मुखी रुद्राक्ष अनेक प्रकार के शारीरिक रोगों को दूर करता है
9 मुखी रुद्राक्ष
9 मुखी रुद्राक्ष नवदुर्गा तथा नवग्रह का स्वरूप होने के कारण अधिक फलदायक और सुखदायक है यह अकाल मृत्यु हटाने वाला धन यश और कीर्ति प्रदान करने में लाभदायक है।
10 मुखी रुद्राक्ष
यह रुद्राक्ष भगवान विष्णु का स्वरूप माना जाता है इसे धारण करने से दमा गठिया पेट और नेत्र संबंधी रोगों से छुटकारा मिलता है।
11 मुखी रुद्राक्ष
11 मुखी रुद्राक्ष को साक्षात रूद्र कहा गया है जो इसे शिखा में धारण करता है उसे कई हजार यज्ञ करने का फल मिलता है
12 मुखी रुद्राक्ष
12 मुखी रुद्राक्ष कान में धारण करना शुभ बताया गया है इसे धारण करने से धन-धान्य और सुख की प्राप्ति होती है
तेरह मुखी रुद्राक्ष
तेरा मुखी रुद्राक्ष सारी मनोकामना पूरी करने वाला होता है
14 मुखी रुद्राक्ष
14 मुखी रुद्राक्ष धारण करने से मनुष्य शिव के समान पवित्र हो जाता है एवं इस सिर पर धारण करना चाहिए
रुद्राक्ष धारण करने के नियम
रुद्राक्ष धारण करने वाले व्यक्ति प्रतिदिन भगवान शिव की आराधना करें
किसी दूसरे का पहना हुआ रुद्राक्ष कभी ना पहने और ना ही अपना रुद्राक्ष किसी और को पहनाए
रुद्राक्ष की माला बनवाते समय ध्यान रखें की उसमें कम से कम 27 दाना जरूर हो
रुद्राक्ष को गंदे हाथों से कभी न छुए स्नान करने के बाद ही रुद्राक्ष धारण करें
रुद्राक्ष को हमेशा लाल या पीले रंग के धागे में ही धारण करें
कटे फटे रुद्राक्ष की माला न बनवाएं
अंतिम यात्रा में जाते समय रुद्राक्ष उतार कर जाना चाहिए नहीं तो वह अपवित्र हो जाता है रुद्राक्ष धारण करने वाले व्यक्ति को तामसिक भोजन नहीं करना चाहिए ऐसा करने से आपको केवल नुकसान ही होगा

