पचलू टोला की बदहाली पर फूटा ग्रामीणों का गुस्सा, बच्चों को लेकर SDM कार्यालय पहुंचे ग्रामीण; कीचड़ में तब्दील सड़क ने खोली विकास के दावों की पोल
दैनिक रेवांचल टाईम्स - मंडला, जिले में कहा कहा कैसे और कैसा विकास हुआ है ये अब किसी से छिपा नही है और बच्चे बूढे सब जनने लगे है और सही और गलत और कौन सुनेगा बच्चे बुड्ढे सब अपनी समस्याएं लेकर पहुँच रहे कभी गर्मियों में लोगों को पीने के लिए पानी नसीब होता है तो बरसात में चलने के लिए सड़क ये कैसा विकास है और कहाँ हुआ कैसे हुआ ये लोगों को समझ नही आ रहा है।
वही विकास खंड नैनपुर की ग्राम पंचायत गौराछापर के पचलू टोला से शिक्षा और बुनियादी सुविधाओं की बदहाली की तस्वीर सामने आई है। यहां प्राथमिक शाला पचलू टोला का भवन करीब दो वर्षों से क्षतिग्रस्त हालत में पड़ा है। स्कूल भवन की छत की खराब स्थिति के चलते छोटे-छोटे बच्चों को सुरक्षित स्कूल भवन के बजाय ग्रामीणों के घरों में बैठाकर पढ़ाई कराने की नौबत आ गई है। वहीं दूसरी ओर पचलू टोला से माखा टोला तक जाने वाला मार्ग बारिश में कीचड़ और दलदल में तब्दील हो गया है। लंबे समय से समस्याओं का समाधान नहीं होने से नाराज ग्रामीण आखिरकार स्कूली बच्चों को साथ लेकर नैनपुर एसडीएम कार्यालय पहुंचे और प्रशासन के सामने अपनी समस्या रखी।
जिस स्कूल में भविष्य बनना था, वही भवन बना खतरा
प्राथमिक शाला पचलू टोला में पढ़ने वाले बच्चों के लिए स्कूल भवन सुरक्षित होना चाहिए, लेकिन ग्रामीणों के अनुसार भवन की छत पिछले करीब दो वर्षों से क्षतिग्रस्त है। भवन की जर्जर स्थिति को देखते हुए बच्चों को वहां बैठाना जोखिमपूर्ण माना जा रहा है। इसी वजह से लंबे समय से बच्चों की कक्षाएं ग्रामीणों के घरों में संचालित की जा रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जिन मासूमों को बेहतर शिक्षा और सुरक्षित वातावरण मिलना चाहिए, वे स्कूल भवन के अभाव में घरों में पढ़ने को मजबूर हैं ग्रामीणों ने आशंका जताई कि यदि क्षतिग्रस्त छत की समय रहते मरम्मत नहीं कराई गई तो बारिश के दौरान किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है।
दो साल से आवेदन-निवेदन, फिर भी नहीं सुधरी हालत
ग्रामीणों का आरोप है कि स्कूल भवन की मरम्मत के लिए कई बार संबंधित अधिकारियों और जिम्मेदारों को आवेदन दिए गए। मौखिक रूप से भी समस्या की जानकारी दी गई, लेकिन करीब दो साल बीत जाने के बाद भी मरम्मत कार्य शुरू नहीं हो पाया। ग्रामीणों का सवाल है कि जब मामला सीधे बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा से जुड़ा है, तो आखिर जिम्मेदार विभाग इतनी लंबी अवधि तक क्यों इंतजार करता रहा?
बारिश में सड़क बनी दलदल, बच्चों का निकलना मुश्किल
स्कूल भवन की समस्या के साथ पचलू टोला के ग्रामीणों के सामने आवागमन की गंभीर समस्या भी बनी हुई है। पचलू टोला–माखा टोला मार्ग बारिश के दिनों में कीचड़ और दलदल में बदल जाता है। इस मार्ग से ग्रामीणों के साथ स्कूली बच्चे भी आवागमन करते हैं। कीचड़ के कारण बच्चों के फिसलने और चोट लगने का खतरा बना रहता है। बुजुर्गों, महिलाओं और अन्य ग्रामीणों को भी रोजाना परेशानी उठानी पड़ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव को जोड़ने वाले इस महत्वपूर्ण मार्ग की स्थिति लंबे समय से खराब है, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं किया गया
मासूम बच्चों को लेकर SDM कार्यालय पहुंचे ग्रामीण
लगातार समस्या का समाधान नहीं होने से परेशान ग्रामीण बच्चों को साथ लेकर नैनपुर एसडीएम कार्यालय पहुंचे। ग्रामीणों ने प्रशासन के समक्ष स्कूल भवन और सड़क दोनों समस्याओं को प्रमुखता से रखा। ग्रामीणों ने मांग की कि संबंधित विभाग के अधिकारियों को तत्काल मौके पर भेजकर स्कूल भवन की तकनीकी जांच कराई जाए और क्षतिग्रस्त छत की मरम्मत का काम शुरू कराया जाए। इसके साथ ही पचलू टोला–माखा टोला मार्ग का स्थल निरीक्षण कराकर बारिश के मौसम में तत्काल आवागमन योग्य व्यवस्था और स्थायी सड़क निर्माण की कार्रवाई की जाए।
मंत्री सम्पतिया उइके ने दिया जल्द मरम्मत का आश्वासन
वही ग्रामीणों ने मंत्री सम्पतिया उइके को फोन से समस्या बताया हालकि मंत्री महोदया ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए ग्रामीणों को आश्वासन दिया गया कि पचलू टोला प्राथमिक शाला के क्षतिग्रस्त भवन की जल्द मरम्मत करवाई जाएगी।
मंत्री ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा से जुड़ा मामला गंभीर है तथा संबंधित विभाग से जानकारी लेकर आवश्यक कार्रवाई कराई जाएगी। मंत्री के आश्वासन के बाद ग्रामीणों में उम्मीद जगी है कि करीब दो वर्षों से लंबित स्कूल भवन की समस्या अब जल्द हल होगी। ग्रामीणों का कहना है कि अब वे केवल आश्वासन नहीं चाहते। उनका कहना है कि आश्वासन के बाद जल्द से जल्द मरम्मत कार्य जमीन पर शुरू होना चाहिए, ताकि बच्चों को फिर से सुरक्षित स्कूल भवन में बैठकर पढ़ाई करने का अवसर मिल सके।
पंचायत के विकास कार्यों पर भी उठे सवाल
वही जानकारी के अनुसार पचलू टोला की स्थिति को लेकर ग्रामीणों ने ग्राम पंचायत गौराछापर के विकास कार्यों पर भी सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि प्राथमिक शाला का भवन दो वर्षों से क्षतिग्रस्त है और गांव को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण मार्ग बारिश में दलदल में बदल रहा है, तो इन मूलभूत समस्याओं को प्राथमिकता से क्यों नहीं सुलझाया गया? ग्रामीणों ने ग्राम पंचायत की सरपंच भागीरथी गोंड से भी मांग की है कि बच्चों की शिक्षा और गांव के आवागमन से जुड़े इन मामलों को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विभागों के साथ समन्वय कर शीघ्र समाधान कराया जाए।



