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जीतकर ही लौटना, रुकना नहीं' :



दैनिक रेवाँचल टाईम्स - निराशा के क्षणों में भी आशा की किरण छिपी होती है, इसलिए हमेशा जीवन में मुस्कुराते हुए निरंतर आगे बढ़ते रहना चाहिए। कई बार यह जिंदगी हमें ऐसे मोड़ पर ले आती है जहाँ केवल ग़म का अंधेरा होता है। भीड़ में अकेले भी हम अकेले होते हैं। जिंदगी से हारे, अपनों से ठुकराए, चिंतित और हर तरह की समस्याओं से घिरे होते हैं। जिंदगी का कुछ पल बेहद कठिन होता है। जहाँ साथ देने वाले कोई नहीं होते पर हर मोड़ पर एक नई चुनौती होती है।

मन में विचारों का उफान जब होता है तो फैसला लेना मुश्किल होता है। परिस्थिति बदलती रहती है। जीवन में कई तरह के लोग आते-जाते हैं। विपरीत समय में भी जो अपने विवेक का प्रयोग करते हैं, किसी के बहकावे में नहीं आते, वे ही अपने जीवन को सफल और सुखी बना पाते हैं। जिंदगी का हर लम्हा एक जंग है और हर पल हमें सामना करने की शक्ति खुद में उत्पन्न करनी है। जीवन के इस रण में बिना थके हमें अपनी लड़ाई लड़नी है। जीतकर ही लौटना है इस युद्ध भूमि से क्योंकि कमजोर मानसिकता कभी आत्मिक आनंद को प्राप्त नहीं कर सकती।

रुकना नहीं बस जीतना है, यह संकल्प कीजिए। गिरकर उठने के साहस का नाम जिंदगी है, एक जगह बैठे रहने पर सोच कुंठित हो जाती है इसलिए चलते रहना जरूरी है। हर तरह की निराशाओं से निकलिए और बहाने करना छोड़िए। आज को सुंदर और सुखद बनाइए, कल क्या हो कोई नहीं जानता? खुद पर पूर्ण विश्वास के साथ कार्य कीजिए। किसी हालात में आपके कदम डगमगाएं नहीं। पछतावा मत कीजिए किसी बात का। जो हो गया उसे भूलिए और जो करना है, उसमें ध्यान दीजिए।

*काव्य:*

*तू खुद से एक बार पूछ,*

*क्यों तू कभी हताश हो जाता है?*

*तू तो निर्भय और साहसी है,*

*जो सदा सही पथ पर बढ़ता रहा है।*

*तेरी निराशा में भी,*

*असीम आशा की एक किरण है,*

*बस तू निरंतर बढ़ता रहना।*

*तू खुलकर हँस औरों को भी हँसा,*

*इस जीवन में सदा मुस्कुराते रहना...*

हमारे भीतर ज्ञान का असीम भंडार है, इसलिए हमें सदा जागे रहना है और अपनी जागृति को बढ़ाते हुए निरंतर चलते जाना है। जब हम पूरी दृढ़ता से कुछ ठान लेते हैं, तो जीवन में कितने भी तूफान आएं, कोई भी आँधी हमें रोक नहीं सकती। हमें लड़ना है और आगे ही आगे बढ़ना है, इसी का नाम जीवन है। जीवन का एक भी पल हताशा में न गुजरे, बल्कि हर पल कुछ नया सीखने की उत्सुकता और जिज्ञासा बनी रहनी चाहिए।

*सुश्री सरोज कंसारी*

कवयित्री, लेखिका एवं अध्यापिका 

रिपोर्टर, उद्घोषिका, नवापारा/राजिम,

रायपुर, (छत्तीसगढ़)

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