तीन ठेकेदार बदले, मजदूरों का भुगतान गायब, सड़क अब भी अधूरी
दैनिक रेवांचल टाइम्स | घुघरी, मंडला जिले की घुघरी तहसील मुख्यालय के अंतर्गत आने वाले ग्रामीण एरिया आज भी अपने विकास की राह जोट रहे हैं। गांवों में या तो स्कूल बिल्डिंग नहीं हे तो कही पर रास्ते ही नहीं हैं और अगर रास्ते बनाने का कार्य विभागों के द्वारा किया भी जाता हैं तो इतनी उदासीनता और लापरवाही पूर्वक की लगता ही नहीं कभी कोई कार्य पूर्ण हो भी पायेगा ऐसा ही एक मामला घुघरी विकासखंड की ग्राम पंचायत सिंघनपुरी के पद्दीकोना में बन रही दो किलोमीटर की सड़क का हैं यह सड़क कोई साधारण सड़क नहीं, बल्कि धैर्य, इंतजार और सरकारी व्यवस्था की "जीवंत प्रयोगशाला" है। सड़क का सफर इतना लंबा हो गया कि आठ साल बीत गए, लेकिन मंजिल अभी भी दूर है।
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क पर काम से ज्यादा ठेकेदार बदलने का रिकॉर्ड बना है। अब तक तीन ठेकेदार बदल चुके हैं, लेकिन सड़क की किस्मत नहीं बदली। ऐसा लगता है कि ठेकेदार बदलना तो आसान है, पर सड़क बनाना सबसे कठिन काम है।
हैरानी की बात यह भी है कि करोड़ों रुपये के इस निर्माण कार्य का कोई सूचना बोर्ड तक नहीं लगाया गया। शायद जिम्मेदारों को डर हो कि कहीं जनता को यह न पता चल जाए कि सड़क किस विभाग की है, कितने रुपये खर्च हो रहे हैं और आखिर जवाबदेह कौन है।
उधर जिन मजदूरों ने सड़क पर पसीना बहाया, वे आज भी अपनी मजदूरी का इंतजार कर रहे हैं। लगता है इस सड़क पर सिर्फ डामर, सीमेंट ही नहीं, मजदूरों का हक भी कहीं दब गया है।
सूत्र बताते हैं कि विभाग ने दोबारा प्राक्कलन बनाकर फिर से राशि स्वीकृत कर दी है। यानी सड़क पर खर्च बढ़ता जा रहा है, लेकिन सड़क की लंबाई वही दो किलोमीटर और हालत वही अधूरी।
अब ग्रामीण पूछ रहे हैं कि आखिर यह सड़क पहले बनेगी या इसकी फाइलें? विकास की यह रफ्तार देखकर लगता है कि अगर सड़क बनने की यही गति रही तो आने वाली पीढ़ियां इस सड़क का उद्घाटन देखने के लिए इतिहास की किताबों का सहारा लेंगी।
तो वही ग्रामीण जनता का सवाल विभाग और जिम्मेदारों से पूछ रहे हम कि आखिर दो किलोमीटर की सड़क बनने में आठ साल क्यों लग गए? मजदूरों का भुगतान कब होगा? और इस अधूरी सड़क का जिम्मेदार कौन है?
अब देखना यह है कि जिम्मेदार विभाग इन सवालों का जवाब देता है या फिर सड़क की तरह जवाब भी वर्षों तक अधूरा ही पड़ा रहता है।



