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स्वच्छ भारत मिशन पर 'पुलिसिया डंडा'!"



सरकारी पुलिया की सफाई कर रहे सरपंच, भाजपा मंडल अध्यक्ष और ग्रामीणों पर शांति भंग का मामला दर्ज, जनहित के काम पर कार्रवाई से उठे सवाल




रेवांचल टाइम्स | मंडला | बीजाडांडी एक तरफ देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वच्छ भारत मिशन को जनआंदोलन बनाने का संदेश दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर मंडला जिले के बीजाडांडी में सरकारी पुलिया की सफाई कर जलभराव से लोगों को राहत दिलाने की कोशिश कर रहे सरपंच, भाजपा मंडल अध्यक्ष और ग्रामीणों पर ही पुलिस ने शांति भंग का मामला दर्ज कर दिया। इस कार्रवाई के बाद पूरे क्षेत्र में यह सवाल गूंज रहा है कि क्या अब सफाई करना भी अपराध है?

ग्राम पंचायत बीजाडांडी के वार्ड क्रमांक 14 और 15 में लंबे समय से जलभराव की समस्या बनी हुई है। पंचायत का आरोप है कि नेशनल हाईवे-30 की सरकारी पुलिया को अवरुद्ध किए जाने से बरसाती पानी मोहल्ले में भर रहा था। ग्रामीणों की शिकायत और प्रशासन को पूर्व सूचना देने के बाद पंचायत ने जेसीबी और ट्रैक्टर की मदद से पुलिया की सफाई शुरू कराई। इसी दौरान पुलिस मौके पर पहुंची और बाद में मौजूद लोगों के खिलाफ शांति भंग का मामला दर्ज कर लिया।

जनहित का काम या अपराध?

सरपंच एवं भाजपा मंडल अध्यक्ष डीएल कुम्हरे का आरोप है कि मौके पर कोई विवाद, मारपीट या तनाव नहीं था। भूमि स्वामी भी मौजूद था, फिर भी पुलिस ने केवल सफाई कार्य में लगे लोगों के नाम लिखकर उनके खिलाफ कार्रवाई कर दी। उनका कहना है कि यह कार्रवाई बदले की भावना से की गई है और जनहित में किए जा रहे कार्य को अपराध की तरह प्रस्तुत किया गया।

पुलिस ने बीएनएसएस की धारा 126 एवं 135(3) के तहत इस्तगासा तैयार कर तहसीलदार के समक्ष प्रस्तुत किया है। पुलिस का कहना है कि भविष्य में शांति भंग होने की आशंका को देखते हुए यह कार्रवाई की गई।


स्थानीय जनता का बड़ा सवाल


वही जब नालियां जाम थीं, पुलिया बंद थी, मोहल्ले में गंदा पानी भर रहा था तब जिम्मेदार विभाग कहां था?

जब लोग बीमारी और जलभराव से परेशान थे तब प्रशासन की मशीनरी क्यों नहीं जागी?

और जब ग्रामीण खुद सफाई के लिए आगे आए तो उन पर ही कार्रवाई क्यों?

कागजों में 'स्वच्छ भारत', धरातल पर गंदगी का अंबार

सरकारी फाइलों में स्वच्छता के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, करोड़ों रुपये खर्च होने की बातें होती हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग नजर आती है। नगरों और गांवों में जगह-जगह कचरे के ढेर, जाम नालियां, बदबू और गंदगी आज भी आम लोगों की मजबूरी बने हुए हैं। जनता बीमारी झेल रही है, जबकि स्वच्छता अभियान की सफलता का ढिंढोरा कागजों और बैठकों में पीटा जा रहा है।

प्रभारी मंत्री का बयान

जिले के प्रभारी मंत्री दिलीप जायसवाल ने कहा कि कोई भी व्यक्ति कानून अपने हाथ में न ले। यदि किसी को कोई समस्या है तो वह संबंधित अधिकारियों के समक्ष अपनी शिकायत रखे, प्रशासन उसका समाधान करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि कानून का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई की जाएगी, चाहे वह किसी भी राजनीतिक दल से जुड़ा हो।


जनता की दो टूक


वही स्वच्छता अभियान केवल पोस्टर, भाषण और सरकारी रिपोर्टों से सफल नहीं होगा। यदि सरकारी तंत्र समय पर अपनी जिम्मेदारी निभाए तो आम नागरिकों को खुद जेसीबी लेकर नालियां और पुलिया साफ करने की नौबत ही न आए। वहीं, यदि किसी कार्रवाई को लेकर विवाद है, तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कानून का पालन हुआ या जनहित में काम कर रहे लोगों के साथ अनावश्यक कार्रवाई की गई।

"स्वच्छता करने वालों पर कार्रवाई और गंदगी फैलाने वालों पर खामोशी—यही है सबसे बड़ा सवाल, जिसका जवाब जनता मांग रही है।"

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