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मौसी के घर जाने को उत्साहित महाप्रभु जगन्नाथ



दैनिक रेवांचल टाईम्स - स्वस्थ हुए भगवान जगन्नाथ स्नान पूर्णिमा के बाद अस्वस्थ हुए भगवान जगन्नाथ महाप्रभु 14 दिन के एकांतवास के बाद मंगलवार को स्वस्थ होकर भक्तों को दर्शन दिए 



स्वस्थ होने के बाद महाप्रभु भगवान जगन्नाथ भैया बलराम और सुभद्रा देवी के साथ रथ पर सवार होकर मौसी मां गुड़िया के घर जाएंगे पंडित संदीप ज्योतिषी ने बताया मान्यता है कि प्रभु वहां भक्तों के स्नेह और सेवा का आनंद लेते हैं उनके स्वागत में तरह-तरह के पकवान बनाए जाएंगे और गीत संगीत के साथ कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा उड़ीसा के पवित्र जगन्नाथ धाम पुरी में भगवान जगन्नाथ के दर्शन और उनके महाप्रसाद का धार्मिक महत्व है जगन्नाथ धाम जाने वाले श्रद्धालुओं को वहां से आते समय चावल की छोटी पोटली जरूर लाना चाहिए इस छोटी पोटली के अंदर भगवान जगन्नाथ का सुखा प्रसाद चावल के दाने का होता है जिसे निर माल्य कहा जाता है स्कंद पुराण में निर्मली की महिमा पर विस्तृत रूप से यह माना जाता है यह कोई साधारण चावल नहीं बल्कि प्रभु को अर्पित किया गया महाप्रसाद होता है जगन्नाथ धाम में मिलने वाली निर माल्य की पोटली मैं मिलने वाले चावल को जो व्यक्ति प्रतिदिन खाता है भगवान उसकी रक्षा स्वयं करते हैं इसके अलावा जिन भी घरों में यह पोटली होती है वहां पर कभी भी धन-धान्य की कमी नहीं होती 


जगन्नाथ धाम में एकादशी से जुड़ी खास परंपरा 


पंडित संदीप ज्योतिषी ने बताया कि पूरे भारतवर्ष में एकादशी के दिन बड़ी ही श्रद्धा के साथ व्रत का पालन किया जाता है इस दिन अनाज खासतौर पर चावल का सेवन करना पूर्ण रूप से वर्जित माना जाता है लेकिन जगन्नाथ पुरी में यह परंपरा इसके विपरीत है यहां एकादशी के मौके पर भगवान जगन्नाथ जी को चावल का भोग लगाया जाता है और महाप्रसाद के रूप में चावल बांटा जाता है सबसे हैरान की बात यह है की पुरी जगन्नाथ में एकादशी के दिन चावल का सेवन करना पाप नहीं बल्कि पुण्य है एक बार सृष्टि के रचनाकार ब्रह्मा जी भगवान जगन्नाथ का महाप्रसाद ग्रहण करने के लिए पूरी पहुंचे लेकिन जब वे मंदिर पहुंचे तब तक प्रसाद खत्म हो चुका था केवल एक पत्ते पर बासी चावल के दाने बचे थे  जिन्हें एक कुत्ता चाट रहा था ब्रह्मा जी की भक्ति भगवान जगन्नाथ के प्रति कितनी सच्ची और निर्मल थी कि उन्होंने बिना किसी संकोच के पटल पर कुत्ते के साथ बैठकर चावल खाने लगे तभी वहां पर एकादशी देवी प्रकट हुई और कहा कहा कि आज एकादशी है और आप चावल खा रहे हैं यह व्रत का उल्लंघन है इतने में स्वयं भगवान जगन्नाथ प्रकट हुए और उन्होंने एकादशी से कहा कि जहां सच्ची भक्ति है वहां कोई नियम लागू नहीं होता है इसके बाद भगवान जगन्नाथ ने घोषणा करते हुए कहा की मेरे महाप्रसाद पर किसी भी तरह के व्रत या तिथि का बंधन नहीं रहेगा यहां भक्ति को प्राथमिकता दी जाएगी ना कि नियमों को इस पल भगवान ने एकादशी को उल्टा लटका दिया तभी से लेकर आज तक यह परंपरा चली आ रही है की एकादशी के दौरान जहां चावल खाना मना होता है वहीं पर जगन्नाथ पुरी में चावल खाया जाता है।

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