मंडला। किसानों के साथ कथित अभद्र व्यवहार, निर्धारित मात्रा से अधिक धान एवं गेहूं की तौल और सहकारी व्यवस्था में मनमानी के आरोपों से घिरे बी-पैक्स दाडीभानपुर समिति प्रबंधक उत्कर्ष राय को लेकर अब गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। सवाल सिर्फ उनके कार्यशैली पर नहीं, बल्कि उन अधिकारियों पर भी हैं जो अपने ही आदेशों को अमल में लाने में नाकाम दिखाई दे रहे हैं।
धान एवं गेहूं उपार्जन के दौरान किसानों के साथ कथित दुर्व्यवहार और तय मानकों से अधिक अनाज तौलने के आरोपों के चलते मवई और घुघरी क्षेत्र के दर्जनों सरपंचों ने लिखित शिकायत देकर कड़ा विरोध दर्ज कराया था। शिकायतों की गंभीरता को देखते हुए जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मंडला की महाप्रबंधक सुश्री साक्षी पंद्राम ने वस्तुस्थिति की जांच के बाद 1 जुलाई को उत्कर्ष राय का बी-पैक्स दाडीभानपुर से बी-पैक्स विक्रमपुर स्थानांतरण करने का आदेश जारी किया।
लेकिन हैरानी की बात यह है कि आदेश जारी होने के बावजूद आज तक उसका पालन नहीं कराया गया। सवाल उठता है कि आखिर किसके दबाव में महाप्रबंधक का अपना ही आदेश ठंडे बस्ते में डाल दिया गया? क्या राजनीतिक और प्रशासनिक संरक्षण के चलते स्थानांतरण आदेश को जानबूझकर होल्ड पर रखा गया है?
यदि शिकायतें सही थीं और जांच के बाद स्थानांतरण आवश्यक माना गया था, तो फिर आदेश पर अमल क्यों नहीं हुआ? और यदि शिकायतें गलत थीं, तो फिर स्थानांतरण आदेश जारी ही क्यों किया गया?
यह पूरा मामला सहकारी व्यवस्था की पारदर्शिता और प्रशासनिक निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा रहा है। किसान और जनप्रतिनिधि अब यह जानना चाहते हैं कि आखिर किसके संरक्षण में समिति प्रबंधक को बचाया जा रहा है और महाप्रबंधक अपने ही आदेश को लागू कराने में असमर्थ क्यों दिखाई दे रही हैं।
अब निगाहें जिला प्रशासन और सहकारिता विभाग पर हैं। क्या इस मामले में जवाबदेही तय होगी या फिर आदेशों की अवहेलना और संरक्षण की राजनीति यूं ही जारी रहेगी?
