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लोकतंत्र पर अव्यवस्था भारी: हंगामे की भेंट चढ़ा जिला अधिवक्ता संघ का चुनाव




 जबलपुर। लोकतंत्र की सबसे मजबूत बुनियाद मानी जाने वाली चुनाव प्रक्रिया सोमवार को जिला अधिवक्ता संघ के चुनाव में अव्यवस्था के बोझ तले दबती नजर आई। जिस चुनाव से अधिवक्ता समुदाय को नई नेतृत्व टीम मिलने की उम्मीद थी, वह भारी हंगामे, विरोध और प्रशासनिक लापरवाही के आरोपों के बीच आखिरकार निरस्त करना पड़ा।

सुबह मतदान शुरू होने से पहले ही निर्वाचन स्थल पर अधिवक्ताओं की भीड़ जुटने लगी थी। लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया, व्यवस्थाओं को लेकर असंतोष बढ़ता गया। देखते ही देखते विरोध प्रदर्शन तेज हो गया और चुनाव स्थल पर अफरातफरी का माहौल बन गया। हालात ऐसे बने कि निर्वाचन समिति द्वारा किए गए इंतजाम पूरी तरह नाकाफी साबित हुए।

चुनाव प्रक्रिया को लेकर उठे सवालों के बीच प्रदर्शनकारी अधिवक्ताओं और चुनाव संचालन कर रहे अधिकारियों के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई। स्थिति लगातार बिगड़ती देख यह साफ हो गया कि निष्पक्ष और शांतिपूर्ण मतदान कराना संभव नहीं रह गया है। आखिरकार चुनाव अधिकारियों ने सुरक्षा और पारदर्शिता को प्राथमिकता देते हुए मतदान प्रक्रिया तत्काल प्रभाव से निरस्त करने का निर्णय लिया।

यह घटनाक्रम केवल एक चुनाव के स्थगित होने की कहानी नहीं है, बल्कि यह उन व्यवस्थाओं पर भी सवाल खड़े करता है जिनके भरोसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया संचालित की जा रही थी। अधिवक्ता संघ जैसे प्रतिष्ठित संस्थान के चुनाव में यदि मूलभूत व्यवस्थाएं ही जवाब दे दें, तो स्वाभाविक रूप से पूरी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगना तय है।

अब नई तारीखों पर टिकी निगाहें

चुनाव निरस्त होने की आधिकारिक घोषणा के बाद अब सभी प्रत्याशी और मतदाता निर्वाचन समिति के अगले निर्णय का इंतजार कर रहे हैं। अधिवक्ता समुदाय में असमंजस का माहौल है और सबसे बड़ा सवाल यही है कि नए सिरे से मतदान कब और किन व्यवस्थाओं के साथ कराया जाएगा। निर्वाचन समिति ने जल्द नई तिथियों की घोषणा का भरोसा दिया है, लेकिन फिलहाल बार परिसर में चर्चा चुनाव से ज्यादा उसकी विफल व्यवस्था को लेकर हो रही है।

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