शराब ठेकेदार और उसके गुर्गों की भूमिका पर उठे सवाल, मवई-बालाघाट से आपूर्ति की चर्चा; आबकारी विभाग की निगरानी पर सवालिया निशान
दैनिक रेवांचल टाईम्स - मंडला। जिले के मोतीनाला-मवई क्षेत्र में कथित अवैध शराब कारोबार को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय स्तर पर आरोप हैं कि शराब की दुकानों से सरेराह शराब निकालकर गांवों और कस्बों तक पहुंचाई जा रही है। मवई और बालाघाट की ओर से भी शराब की खेप पहुंचने की चर्चाएं हैं। यदि इन आरोपों की पुष्टि होती है तो मामला केवल अवैध बिक्री का नहीं, बल्कि शराब आपूर्ति के पूरे नेटवर्क और उसकी निगरानी व्यवस्था का बन जाता है।
दुकान से गांव तक शराब, आखिर किसकी शह पर?
स्थानीय लोगों के बीच आरोप है कि शराब ठेकेदार से जुड़े कुछ लोग और उनके कथित गुर्गे दुकान से शराब निकालकर अलग-अलग गांवों और कस्बों में पहुंचा रहे हैं। सवाल यह है कि यदि शराब की दुकानों से इस तरह खुलेआम आपूर्ति हो रही है तो इसकी जानकारी आबकारी विभाग को क्यों नहीं मिल रही? क्या विभाग को इसकी भनक नहीं है या फिर निगरानी व्यवस्था केवल कागजों तक सीमित है?
शराब ठेकेदार की भूमिका की भी हो जांच
अवैध शराब कारोबार की जांच केवल छोटे विक्रेताओं और परिवहन करने वालों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। यह भी जांच का विषय है कि शराब कहां से निकल रही है, किन वाहनों से पहुंचाई जा रही है और इस आपूर्ति में शराब ठेकेदार अथवा उससे जुड़े कर्मचारियों की कोई भूमिका है या नहीं। आरोप सही पाए जाने पर संबंधित लोगों की जवाबदेही तय होना जरूरी है।
आंखों पर पट्टी बांधे बैठा है प्रशासन?
मोतीनाला-मवई जैसे संवेदनशील क्षेत्र में यदि गांव-गांव शराब पहुंचने के आरोप सामने आ रहे हैं तो आबकारी विभाग की नियमित निगरानी और कार्रवाई पर सवाल उठना स्वाभाविक है। आखिर अवैध शराब की आपूर्ति के रास्तों की पहचान क्यों नहीं हो रही? क्या विभाग ने कभी दुकानों के स्टॉक, बिक्री रिकॉर्ड और वास्तविक बिक्री की जांच की है? यदि कार्रवाई हुई है तो उसके परिणाम सार्वजनिक क्यों नहीं हैं?
प्रशासन से सीधे सवाल
शराब दुकानों से गांवों तक शराब पहुंचाने के आरोपों की जांच कब होगी?
शराब ठेकेदार और उसके कर्मचारियों की भूमिका की पड़ताल क्यों नहीं?
मवई और बालाघाट से कथित शराब आपूर्ति के रास्तों पर निगरानी कौन कर रहा है?
आबकारी विभाग ने अब तक कितनी कार्रवाई की और कितने प्रकरण दर्ज किए?
क्या जिला प्रशासन इस पूरे नेटवर्क की निष्पक्ष जांच कराएगा?
अब छोटे विक्रेताओं पर नहीं, पूरे नेटवर्क पर कार्रवाई की दरकार!
मोतीनाला-मवई क्षेत्र में सामने आ रहे आरोपों की निष्पक्ष जांच आवश्यक है। प्रशासन को शराब दुकानों के स्टॉक रजिस्टर, बिक्री रिकॉर्ड, परिवहन और आपूर्ति व्यवस्था की जांच करानी चाहिए। साथ ही स्थानीय शिकायतों की पुष्टि के लिए विशेष जांच अभियान चलाया जाना चाहिए।
सवाल सीधा है—यदि दुकान से शराब निकलकर गांव-गांव पहुंच रही है तो इसकी जवाबदेही किसकी है? शराब ठेकेदार की, उसके कर्मचारियों की या उस विभाग की, जिसकी जिम्मेदारी अवैध शराब कारोबार पर अंकुश लगाना है?
वही अब देखना यह है कि प्रशासन इस कथित शराब नेटवर्क की जड़ तक पहुंचता है या फिर कार्रवाई कुछ छोटे विक्रेताओं तक सिमटकर रह जाती है।
