बीजाडांडी, मंडला।

बीजाडांडी के एक निजी क्लीनिक में बवासीर का इलाज कराने पहुंचे 48 वर्षीय ग्रामीण के शरीर पर कथित रूप से बिना विशेषज्ञता चीरा लगाने का मामला सामने आया है। परिजनों का आरोप है कि प्रक्रिया के बाद मरीज को रातभर रक्तस्राव होता रहा। सुबह उसे बीजाडांडी उप स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद गंभीर हालत में जबलपुर मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया।
परिजनों का आरोप: बिना विस्तृत जांच के किया ऑपरेशन
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, विकासखंड बीजाडांडी के यादव मोहल्ला निवासी मरीज को बवासीर की शिकायत थी। इसी परेशानी के उपचार के लिए वह बीजाडांडी स्थित एक निजी क्लीनिक पहुंचा था। परिजनों का आरोप है कि क्लीनिक संचालक ने बिना विस्तृत जांच और आवश्यक चिकित्सकीय परीक्षण के तत्काल ऑपरेशन की बात कही और मरीज के शरीर पर चीरा लगा दिया।
परिजनों के अनुसार, इसके बाद लगातार रक्तस्राव होने लगा और मरीज की हालत बिगड़ती गई। पूरी रात परेशानी बनी रही, लेकिन रक्तस्राव बंद नहीं हुआ। आखिरकार सुबह परिजन उसे बीजाडांडी उप स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे।
प्राथमिक उपचार के बाद मेडिकल कॉलेज भेजा
उप स्वास्थ्य केंद्र में उपस्थित चिकित्सक डॉ. अक्षय हरदाहा ने मरीज की स्थिति देखते हुए तत्काल प्राथमिक उपचार किया। हालत और आवश्यक उपचार की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए उसे जबलपुर मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। परिजनों ने चिकित्सक को बताया कि निजी क्लीनिक में कथित रूप से बिना विशेषज्ञता चीरा लगाए जाने के बाद से मरीज को लगातार रक्तस्राव हो रहा था।
क्लीनिक की योग्यता और पंजीयन पर सवाल
सूत्रों के अनुसार, संबंधित निजी क्लीनिक पर लंबे समय से बिना आवश्यक पंजीयन चिकित्सा सेवाएं देने के आरोप हैं। यहां साधारण बुखार और सर्दी-जुकाम से लेकर बड़ी बीमारियों के उपचार तथा ऑपरेशन जैसी प्रक्रियाएं किए जाने की शिकायतें सामने आने की बात भी कही गई है। हालांकि, क्लीनिक के पंजीयन, संचालक की चिकित्सकीय योग्यता और अनधिकृत उपचार संबंधी आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
बीएमओ बोले—जांच के लिए गठित की जा रही टीम
बीएमओ डॉ. अजयतोष मरावी ने बताया कि मामला संज्ञान में आया है। जांच के लिए टीम गठित की जा रही है। बिना डिग्री और पंजीयन के क्लीनिक का संचालन पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
यह मामला ग्रामीण क्षेत्रों में निजी क्लीनिकों की निगरानी और मरीजों की सुरक्षा पर सवाल खड़े करता है। संबंधित क्लीनिक का पंजीयन, संचालक की योग्यता, उपचार की अनुमति तथा ऑपरेशन जैसी प्रक्रियाओं के लिए आवश्यक सुविधाओं की स्थिति जांच के अहम बिंदु हैं। मरीज के मेडिकल दस्तावेज, रेफरल पर्ची और परिजनों के बयानों के आधार पर यह स्पष्ट होना जरूरी है कि प्रक्रिया किसने की और क्या निर्धारित चिकित्सकीय मानकों का पालन किया गया।