7 बार के सांसद और कैबिनेट मंत्री के गढ़ मंडला को कब मिलेगी औद्योगिक पहचान?
जबलपुर-इंदौर इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के फैसले के बाद आदिवासी अंचल के विकास पर उठी मांग
फग्गन सिंह कुलस्ते और संपतिया उइके से मंडला के लिए विशेष औद्योगिक पैकेज की पहल की अपेक्षा
दैनिक रेवांचल टाइम्स | मंडला/भोपाल। मध्यप्रदेश में औद्योगिक विकास को गति देने की दिशा में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सरकार के एक नए फैसले ने महाकौशल अंचल में उम्मीदें बढ़ा दी हैं। भोपाल में आयोजित कैबिनेट बैठक में जबलपुर-इंदौर इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के विकास के लिए 100 करोड़ रुपये की अधिकृत पूंजी वाली विशेष कंपनी के गठन का निर्णय लिए जाने की जानकारी सामने आई है।
इस पहल से निवेश और रोजगार के नए अवसर विकसित होने की उम्मीद जताई जा रही है। प्रस्ताव से लगभग तीन लाख रोजगार अवसर सृजित होने का दावा भी किया जा रहा है। हालांकि, रोजगार का वास्तविक आंकड़ा परियोजना के क्रियान्वयन और भविष्य में होने वाले निवेश पर निर्भर करेगा।
इस घोषणा के बीच एक बड़ा सवाल मंडला और डिंडोरी जैसे आदिवासी बहुल जिलों को लेकर भी उठ रहा है। जब महाकौशल में औद्योगिक विकास की नई संभावनाएं तलाश की जा रही हैं, तो मंडला को अपना औद्योगिक हब कब मिलेगा?
क्या औद्योगिक विकास का लाभ केवल बड़े शहरों तक सीमित रहेगा या मंडला जैसे आदिवासी अंचलों के युवाओं को भी अपने जिले में रोजगार और उद्यम के अवसर मिलेंगे?
सात बार के सांसद और कैबिनेट मंत्री के क्षेत्र में उद्योगों की कमी क्यों?
मंडला संसदीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व लंबे समय से वरिष्ठ भाजपा नेता फग्गन सिंह कुलस्ते करते रहे हैं। सात बार सांसद चुने गए कुलस्ते केंद्र सरकार में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं।
वहीं, प्रदेश सरकार में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री संपतिया उइके भी इसी अंचल से जुड़ी प्रमुख राजनीतिक हस्ती हैं। ऐसे में क्षेत्र के औद्योगिक विकास को लेकर इन दोनों जनप्रतिनिधियों से अपेक्षाएं स्वाभाविक रूप से बढ़ जाती हैं।
सवाल यह है कि इतने लंबे राजनीतिक प्रतिनिधित्व और प्रभावशाली नेतृत्व के बावजूद मंडला में बड़े उद्योगों, कृषि आधारित प्रसंस्करण इकाइयों और संगठित औद्योगिक क्लस्टरों का अपेक्षित विस्तार क्यों नहीं हो पाया?
जिले के युवाओं के सामने स्थानीय स्तर पर रोजगार के पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराने की चुनौती बनी हुई है। रोजगार और बेहतर आय की तलाश में युवाओं को जबलपुर, इंदौर तथा अन्य शहरों की ओर जाना पड़ता है।
जबलपुर-इंदौर कॉरिडोर से महाकौशल को उम्मीद, मंडला को क्या मिलेगा?
जबलपुर-इंदौर इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के विकास के लिए विशेष कंपनी के गठन का निर्णय प्रदेश में औद्योगिक निवेश को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
प्रस्तावित व्यवस्था के माध्यम से औद्योगिक बुनियादी ढांचे, निवेश और व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा देने की संभावना है। लेकिन मंडला और डिंडोरी जैसे जिलों के लिए यह जानना भी जरूरी है कि उन्हें इस परियोजना से प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से क्या लाभ मिलेगा।
केवल बड़े औद्योगिक केंद्रों में निवेश बढ़ने से आदिवासी अंचलों का संतुलित विकास अपने आप सुनिश्चित नहीं हो जाता। इसके लिए अलग से योजनाबद्ध प्रयास, स्थानीय संसाधनों पर आधारित उद्योग और रोजगारपरक प्रशिक्षण की जरूरत होगी।
अधिकृत पूंजी को परियोजना पर तत्काल खर्च होने वाली राशि नहीं माना जाना चाहिए। रोजगार संबंधी आंकड़े भी संभावित हैं।
वन उपज और कोदो-कुटकी से बदल सकती है मंडला की तस्वीर
मंडला जिले में वन एवं कृषि आधारित उद्योगों की संभावनाएं मौजूद हैं। यहां महुआ, हर्रा, बहेड़ा, गोंद जैसी वन उपज तथा कोदो-कुटकी जैसे मोटे अनाजों से जुड़े प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन के अवसर विकसित किए जा सकते हैं।
यदि स्थानीय स्तर पर खाद्य प्रसंस्करण, पैकेजिंग, भंडारण, विपणन और हर्बल उत्पादों से जुड़ी इकाइयां स्थापित हों, तो किसानों, वन उपज संग्राहकों, महिला स्व-सहायता समूहों और युवाओं के लिए आय के नए रास्ते खुल सकते हैं।
इसके लिए जरूरी है कि उद्योगों का विकास स्थानीय समुदायों की भागीदारी, पर्यावरणीय नियमों और वन अधिकारों का सम्मान करते हुए किया जाए।
मंडला में इन क्षेत्रों में बन सकते हैं रोजगार के अवसर
- कोदो-कुटकी प्रसंस्करण: सफाई, पैकेजिंग और ब्रांडेड खाद्य उत्पादों की इकाइयां।
- वन उपज आधारित उद्योग: महुआ और अन्य अनुमत वन उत्पादों का मूल्य संवर्धन।
- हर्बल एवं प्राकृतिक उत्पाद: गुणवत्ता मानकों के अनुरूप प्रसंस्करण और विपणन।
- कृषि आधारित उद्यम: भंडारण, फूड प्रोसेसिंग और स्थानीय उत्पादों की बाजार तक पहुंच।
- महिला और युवा उद्यमिता: प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और छोटे उद्योगों के लिए साझा सुविधाएं।
रेल और सड़क कनेक्टिविटी मजबूत हो तो बढ़ सकते हैं निवेश के अवसर
मंडला में औद्योगिक विकास की संभावनाओं को साकार करने के लिए बेहतर परिवहन व्यवस्था भी जरूरी है। यदि मंडला से जबलपुर, बिलासपुर और रायपुर की दिशा में सड़क तथा रेल संपर्क को योजनाबद्ध तरीके से मजबूत किया जाए, तो माल परिवहन और व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है।
उद्योग स्थापित करने के लिए केवल जमीन उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं होगा। निर्बाध बिजली, पानी, सड़क, परिवहन, भंडारण, डिजिटल सुविधाएं और कुशल श्रमिकों की उपलब्धता भी आवश्यक है।
ऐसे में मंडला के लिए एक समग्र औद्योगिक विकास योजना तैयार करने की आवश्यकता महसूस की जा रही है, जिसमें स्थानीय संसाधनों के साथ बाजार की मांग और पर्यावरणीय परिस्थितियों का भी ध्यान रखा जाए।
मुख्यमंत्री के सामने उठे विशेष ट्राइबल इंडस्ट्रियल पैकेज की मांग
जब प्रदेश सरकार जबलपुर-इंदौर इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के लिए नई व्यवस्था विकसित कर रही है, तब मंडला के लिए भी अलग औद्योगिक योजना की मांग महत्वपूर्ण हो गई है।
इस दिशा में सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते और कैबिनेट मंत्री संपतिया उइके से अपेक्षा की जा रही है कि वे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के समक्ष मंडला के लिए विशेष ट्राइबल इंडस्ट्रियल पैकेज की पहल करें।
ऐसी योजना में स्थानीय युवाओं के कौशल विकास, छोटे एवं मध्यम उद्योगों को प्रोत्साहन, वन और कृषि उत्पादों के प्रसंस्करण तथा निवेशकों को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा सकता है।
मंडला के लिए पांच प्रमुख मांगें
- मंडला जिले के लिए विशेष औद्योगिक विकास योजना तैयार की जाए।
- वन उपज और कोदो-कुटकी आधारित फूड प्रोसेसिंग क्लस्टर विकसित किए जाएं।
- स्थानीय युवाओं के लिए कौशल प्रशिक्षण और रोजगार को प्राथमिकता मिले।
- सड़क, रेल, बिजली और औद्योगिक बुनियादी ढांचे का विस्तार किया जाए।
- आदिवासी समुदायों, किसानों और महिला समूहों की भागीदारी सुनिश्चित की जाए।
युवाओं को चाहिए अपने जिले में रोजगार, सिर्फ घोषणाएं नहीं
मंडला जैसे आदिवासी बहुल जिले के लिए औद्योगिक विकास केवल निवेश का विषय नहीं, बल्कि स्थानीय रोजगार, पलायन की चुनौती और आर्थिक आत्मनिर्भरता से भी जुड़ा सवाल है।
यदि स्थानीय स्तर पर रोजगार देने वाले उद्योग विकसित होते हैं, तो युवाओं को अपने परिवारों से दूर जाकर काम तलाशने की मजबूरी कम हो सकती है। साथ ही किसानों और वन उपज संग्राहकों को अपने उत्पादों का बेहतर मूल्य मिलने की संभावना भी बढ़ेगी।
जरूरत इस बात की है कि मंडला के लिए औद्योगिक विकास का स्पष्ट रोडमैप तैयार हो, जिसमें परियोजनाओं की पहचान, संभावित निवेश, जिम्मेदार विभाग और क्रियान्वयन की समय-सीमा निर्धारित की जाए।
राजनीतिक नेतृत्व के सामने अब ठोस पहल की चुनौती
मंडला का प्रतिनिधित्व करने वाले वरिष्ठ जनप्रतिनिधियों के सामने अब अवसर है कि वे जिले की औद्योगिक जरूरतों को राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल कराने की दिशा में पहल करें।
सवाल यह भी है कि क्या जबलपुर-इंदौर कॉरिडोर से मिलने वाले संभावित अवसरों को मंडला और डिंडोरी जैसे जिलों तक पहुंचाने के लिए कोई अलग कार्ययोजना बनेगी? क्या यहां के स्थानीय संसाधनों पर आधारित उद्योगों को प्रोत्साहन मिलेगा?
इन सवालों का जवाब केवल राजनीतिक घोषणाओं से नहीं, बल्कि स्वीकृत परियोजनाओं, वास्तविक निवेश और स्थानीय युवाओं को मिलने वाले रोजगार से मिलेगा।
महाकौशल में उद्योगों की नई उम्मीद, लेकिन मंडला का इंतजार कब खत्म होगा?
सात बार के सांसद और कैबिनेट मंत्री के प्रभाव वाले जिले को अब चाहिए अपना औद्योगिक रोडमैप
आदिवासी अंचल का विकास तभी सार्थक होगा, जब निवेश के अवसर स्थानीय रोजगार, आय और आर्थिक आत्मनिर्भरता में बदलेंगे।
नोट: कॉरिडोर की प्रस्तावित कंपनी की अधिकृत पूंजी और संभावित रोजगार से जुड़े आंकड़े उपलब्ध समाचार विवरण पर आधारित हैं। मंडला के लिए विशेष औद्योगिक पैकेज इस समाचार में उठाई गई मांग है; इसकी सरकारी स्वीकृति की जानकारी उपलब्ध नहीं है।
