जीवन का सहज प्रवाह: धैर्य, संतोष और स्वाभिमान की राह पर सूर्य जी के विचार
जीवन: एक सहज प्रवाह
धैर्य, संतोष और आत्म-रक्षा की राह
— युगपुरुष 'सूर्य जी'

दैनिक रेवाँचल टाईम्स। युगपुरुष 'सूर्य जी' अपने इस चिंतनपरक लेख में मन की मजबूती, धैर्य और संतोष को जीवन का आधार बताते हैं। उनका संदेश है कि जीवन को सुंदर बनाए रखने के लिए हर चीज़ जीतने की होड़ में पड़ना जरूरी नहीं है।
धैर्य और संतोष बनाए रखें
हे मनुष्यों! यदि तुम अपने मन को हमेशा मजबूत बनाए रखते हो, तो सब कुछ तुम्हारे पास होता है और सब ठीक रहता है। धैर्य और संतोष को कभी न छोड़ना, क्योंकि धैर्य बनाए रखना ही जीवन का आधार है। जीवन को हमेशा सुंदर बनाए रखा जा सकता है, बस हर चीज़ को जीतने की होड़ में मत लगिए।
हर पल सहेजें, स्वाभिमान भी बचाएं
जीवन वह है जो हम आज जी रहे हैं; कल जो था, वह बस एक सपना था जो हमने देखा था। हमें हर पल को सहेज कर जीना है और व्यर्थ की बहस से बचना है। इस भीषण और निष्ठुर दुनिया में इंसान का अच्छा होना अच्छी बात है, पर जरूरत से ज्यादा अच्छा होना दुखी कर देता है। इसलिए अच्छे और सज्जन बने रहो, पर साथ ही अपने स्वाभिमान और अस्तित्व को बचाने का प्रयास भी करते जाओ।
निरंतर बेहतर होने की राह
जितना हो सके भीड़ से बचो। सूर्य जी के अनुसार, भीड़ के पास विवेक, संवेदना और गहरा संवाद नहीं होता; वहां होता है तो बस कुचल देने वाला एक अंधा हथियार। अपने कदम बढ़ाते जाओ, हर दिन बेहतर होते जाओ और निरंतर चलते जाओ—यही अंतस का उजास है।