भूकंप आपदा से निपटने के लिए आपदा मित्रों को सात दिवसीय क्षमता संवर्धन प्रशिक्षण
दैनिक रेवाँचल टाईम्स – छिंदवाड़ा। प्राकृतिक आपदाओं से निपटने और आपातकालीन परिस्थितियों में जनहानि तथा संपत्ति के नुकसान को कम करने के उद्देश्य से स्थानीय होमगार्ड परिसर में आपदा मित्रों के लिए सात दिवसीय क्षमता संवर्धन प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। प्रशिक्षण में विशेष रूप से भूकंप जैसी आपदाओं के पूर्व की तैयारियों, बचाव के उपायों और राहत कार्यों की जानकारी दी गई।
कार्यक्रम जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण छिंदवाड़ा के अध्यक्ष एवं कलेक्टर हरेंद्र नारायण के निर्देशन में आयोजित किया गया। इस अवसर पर होमगार्ड कमांडेंट स्नेहलता पाठ्या, सिविल डिफेंस के सब डिविजन वार्डन एवं रिसोर्स पर्सन श्यामल राव तथा प्रोफेसर डॉ. अर्चना भार्गव उपस्थित रहीं।
प्रशिक्षण में आपदा मित्रों को भूकंप के दौरान क्या करें और क्या न करें, सामुदायिक बचाव दलों के गठन, आपदा पूर्व योजना तैयार करने, ध्वस्त संरचनाओं में खोज एवं बचाव तथा राहत उपकरणों के उपयोग की जानकारी दी गई।
आपदा के समय समाज की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण : स्नेहलता पाठ्या
होमगार्ड कमांडेंट स्नेहलता पाठ्या ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए शासन-प्रशासन अपने स्तर पर आवश्यक कार्य कर रहा है, लेकिन किसी भी आपदा के समय सबसे पहले स्थानीय समुदाय की भूमिका महत्वपूर्ण होती है।
उन्होंने बताया कि आपदा प्रभावित क्षेत्र में रहने वाले नागरिक ही सबसे पहले स्थिति का सामना करते हैं। ऐसे में उन्हें आपदाओं के जोखिम, सुरक्षा उपायों और प्रारंभिक राहत कार्यों की जानकारी उपलब्ध कराना आवश्यक है।
स्नेहलता पाठ्या ने कहा कि आपदा प्रबंधन संबंधी जागरूकता बढ़ाने और लोगों को प्रशिक्षण देने में सभी की सहभागिता जरूरी है, ताकि किसी आपातकालीन स्थिति में स्थानीय स्तर पर समय रहते सहायता उपलब्ध कराई जा सके।
आपदा पूर्व योजना और सामुदायिक दलों के गठन पर जोर
सिविल डिफेंस के सब डिविजन वार्डन एवं रिसोर्स पर्सन श्यामल राव ने प्रतिभागियों को विभिन्न प्रकार की आपदाओं और उनसे निपटने की तैयारियों के बारे में जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि भूकंप जैसी आपदा से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए पहले से आपदा प्रबंधन योजना तैयार करना आवश्यक है। इस योजना में स्थानीय समुदाय की सहभागिता सुनिश्चित की जानी चाहिए।
श्यामल राव ने बताया कि आपदा के समय विभिन्न जिम्मेदारियों के निर्वहन के लिए अलग-अलग दलों का गठन कर उन्हें प्रशिक्षित किया जा सकता है। इससे आपातकालीन परिस्थितियों में कार्यों का बेहतर समन्वय संभव होता है।
सूचना एवं प्रसारण दल : आपदा से संबंधित सूचनाओं का आदान-प्रदान और लोगों को सतर्क करना।
खोज एवं बचाव दल : आपदा प्रभावित क्षेत्रों में फंसे लोगों की तलाश और सुरक्षित निकासी में प्रशिक्षित बचावकर्मियों की सहायता करना।
चिकित्सा दल : घायलों तक प्राथमिक सहायता और चिकित्सा सुविधाएं पहुंचाने में सहयोग करना।
राहत एवं नुकसान आकलन दल : प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति और क्षति का आकलन कर राहत व्यवस्था में सहयोग करना।
भोजन एवं आवास दल : आपदा प्रभावित लोगों के लिए अस्थायी आश्रय, भोजन और आवश्यक व्यवस्थाओं में सहयोग करना।
स्कूलों और परिवारों तक पहुंचे भूकंप से बचाव की जानकारी : डॉ. अर्चना भार्गव
प्रोफेसर डॉ. अर्चना भार्गव ने कहा कि भूकंप से बचाव और सुरक्षा संबंधी जानकारी केवल प्रशिक्षण कार्यक्रमों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। इसे प्रत्येक विद्यालय और परिवार तक पहुंचाना आवश्यक है।
उन्होंने बताया कि भूकंप आने की स्थिति में क्या करना चाहिए और किन गतिविधियों से बचना चाहिए, इसकी जानकारी होने से जनहानि और अन्य नुकसान को कम करने में सहायता मिल सकती है।
डॉ. भार्गव ने प्रतिभागियों को भूकंप आपदा जोखिम प्रबंधन, देश के विभिन्न भूकंपीय जोन और भूगर्भीय गतिविधियों के कारण भूकंप उत्पन्न होने की प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी।
उन्होंने भूकंप से होने वाले संभावित जन-धन के नुकसान को कम करने के उपायों और आपदा पूर्व जागरूकता की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला।
ध्वस्त संरचनाओं में खोज और बचाव की बारीकियां समझाईं
सात दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान उपस्थित आपदा मित्रों को भूकंप के बाद ध्वस्त संरचनाओं में खोज एवं बचाव कार्य से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की गई।
प्रतिभागियों को बताया गया कि किसी भवन या अन्य संरचना के क्षतिग्रस्त होने की स्थिति में खोज एवं बचाव कार्य के दौरान प्रशिक्षित दलों का सहयोग, आवश्यक उपकरणों की उपलब्धता और सुरक्षा संबंधी सावधानियां महत्वपूर्ण होती हैं।
प्रशिक्षण का उद्देश्य आपदा मित्रों की क्षमताओं का विकास करना तथा उन्हें राहत एवं बचाव से संबंधित प्राथमिक जानकारी उपलब्ध कराना रहा।
एसडीआरएफ ने बचाव उपकरणों के उपयोग का दिया प्रशिक्षण
प्रशिक्षण के दौरान एसडीआरएफ के एएसआई वुदमान धुर्वे तथा सैनिक सुमित शर्मा, दीपेंद्र वरकड़े, राजा मर्शकोले और सचिन विश्वकर्मा ने आपदा के बाद राहत एवं बचाव कार्यों में उपयोग किए जाने वाले उपकरणों की जानकारी दी।
एसडीआरएफ दल ने प्रतिभागियों को बताया कि भूकंप के बाद राहत कार्यों के दौरान विभिन्न उपकरणों का उपयोग किस प्रकार किया जाता है और उनके संचालन में किन सावधानियों का ध्यान रखना आवश्यक है।
प्रशिक्षण में उपकरणों के उपयोग की विधियों से अवगत कराते हुए आपदा मित्रों की व्यावहारिक समझ और आपातकालीन परिस्थितियों में सहयोग करने की क्षमता विकसित करने पर जोर दिया गया।
समुदाय की भागीदारी से मजबूत होगी आपदा प्रबंधन व्यवस्था
प्रशिक्षण कार्यक्रम में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए प्रशासनिक तैयारी के साथ स्थानीय समुदायों को भी जागरूक और प्रशिक्षित बनाना जरूरी है।
आपदा मित्रों को विभिन्न राहत दलों की भूमिका, आपातकालीन सूचना व्यवस्था, प्राथमिक सहायता और बचाव कार्यों के समन्वय की जानकारी देने का उद्देश्य समुदाय आधारित आपदा प्रबंधन व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना है।
विशेषज्ञों ने विद्यालयों और परिवारों में आपदा संबंधी जागरूकता बढ़ाने तथा आपातकालीन परिस्थितियों के लिए पूर्व तैयारी को प्राथमिकता देने की आवश्यकता बताई।
छिंदवाड़ा के होमगार्ड परिसर में आयोजित सात दिवसीय क्षमता संवर्धन प्रशिक्षण में आपदा मित्रों को भूकंप सहित प्राकृतिक आपदाओं से निपटने की पूर्व तैयारियों, सामुदायिक दलों के गठन, खोज एवं बचाव की तकनीकों तथा राहत उपकरणों के उपयोग से परिचित कराया गया।
कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने संदेश दिया कि आपदा के समय प्रभावी राहत और बचाव के लिए पहले से की गई तैयारी, प्रशिक्षित मानव संसाधन तथा स्थानीय समुदाय की सक्रिय सहभागिता अत्यंत महत्वपूर्ण है।
