बसनिया बांध की पर्यावरण प्रभाव आकलन रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग, 2 दिसम्बर को जनसुनवाई
मंडला | दैनिक रेवाँचल टाईम्स

बरगी बांध विस्थापित एवं प्रभावित संघ के राजकुमार सिन्हा ने बसनिया बांध की पर्यावरणीय प्रभाव आकलन रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट उपलब्ध होने से लोग नर्मदा नदी की जैव विविधता तथा नदी पर पड़ने वाले संचयी और पर्यावरणीय प्रभावों को लेकर आगामी 2 दिसम्बर को ग्राम बिलगढा, तहसील घुघरी में आयोजित जनसुनवाई में अपनी आपत्तियां लिखित रूप में दर्ज करा सकेंगे।
21 नवंबर 2023 को दिए गए थे अध्ययन के निर्देश
सिन्हा के अनुसार, केन्द्रीय पर्यावरण मंत्रालय की नदी घाटी विशेषज्ञ समिति ने नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण को 21 नवंबर 2023 को विभिन्न बिन्दुओं पर अध्ययन करने के लिखित निर्देश दिए थे। इनमें परियोजना निर्माण के कारण नर्मदा नदी एवं संबंधित नालों के जलग्रहण क्षेत्र की वहन क्षमता, जल प्रवाह की निरंतरता और संचयी पर्यावरणीय प्रभाव का विस्तृत अध्ययन शामिल है।
निर्देशों में वन भूमि का उपयोग यथासंभव कम रखते हुए पर्यावरणीय एवं पारिस्थितिकीय निरंतरता सुनिश्चित करना तथा परियोजना प्रस्ताव के साथ पर्यावरणीय प्रभाव आकलन और पर्यावरण प्रबंधन योजना नर्मदा कंट्रोल अथॉरिटी को भेजकर उनकी टिप्पणियां एवं अनुशंसाएं प्राप्त करना भी शामिल था। वन भूमि परिवर्तन और जैव विविधता की हानि से जंगल के पारिस्थितिकी तंत्र पर पड़ने वाले प्रभावों का पर्यावरणीय लाभ-हानि विश्लेषण करने को भी कहा गया था।
मिट्टी, भूजल और जैव विविधता के अध्ययन पर जोर
टीओआर के अनुरूप बेसलाइन डाटा संकलित करने, जलाशय एवं वन क्षेत्र से लगे कम से कम 10 गांवों में मिट्टी की गुणवत्ता एवं विशेषताओं का अध्ययन करने और परियोजना क्षेत्र के कम से कम 10 स्थानों पर तीनों ऋतुओं—ग्रीष्म, वर्षा एवं शीत—में भूजल स्तर मापने के निर्देश दिए गए थे। परियोजना एवं जलविद्युत उत्पादन से जलीय तथा स्थलीय पारिस्थितिकी तंत्र, जल गुणवत्ता, मत्स्य उत्पादन और जैव विविधता पर पड़ने वाले प्रभावों का अध्ययन कर पर्यावरण प्रबंधन योजना तैयार करना भी इसमें शामिल है।
क्षेत्र की वनस्पति एवं जीव-जंतुओं का फील्ड सर्वे कर वैज्ञानिक पद्धति से विस्तृत डाटा एवं मेट्रिक्स तैयार करने, प्रयुक्त कार्यप्रणाली बताने और स्थानीय प्रजातियों का विस्तृत विवरण तैयार करने को कहा गया था। डूब क्षेत्र में आने वाले वृक्षों, वनस्पतियों एवं जीव-जंतुओं की संख्या, घनत्व और प्रजातिवार सूची सहित रिपोर्ट मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक को प्रस्तुत करने का भी निर्देश था।
इसके साथ ही अनुसूची-1 के अंतर्गत संरक्षित वन्यजीवों के संरक्षण की विस्तृत योजना तैयार कर मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक से अनुमोदन प्राप्त करना, स्थानीय एवं प्रवासी पक्षियों के आवास, प्रजनन और प्रवास पर प्रभावों का वैज्ञानिक अध्ययन करना तथा जलवैज्ञानिक परिवर्तनों का मत्स्य संसाधनों, मछलियों की विविधता एवं उनके प्रजनन पर असर जांचना भी शामिल है।
खनन स्थलों, कटाव और वाटरशेड की योजना भी शामिल
डूब क्षेत्र और बांध के डाउनस्ट्रीम क्षेत्र में रेत खनन एवं अन्य खदान स्थलों का सर्वेक्षण तथा चिन्हांकन करने, निर्माण सामग्री के स्रोत, परियोजना स्थल से उनकी दूरी और परिवहन की विस्तृत योजना रिपोर्ट में शामिल करने के निर्देश थे। निर्माण कार्य में उपयोग होने वाली खदानों के सुधार, पुनर्स्थापन एवं मरम्मत की विस्तृत कार्ययोजना भी प्रस्तुत की जानी थी।
जलाशय एवं नदी किनारों की सुरक्षा और कटाव रोकने की विस्तृत योजना के साथ परियोजना क्षेत्र की 10 किलोमीटर परिधि में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के परामर्श से वाटरशेड विकास की संभावनाओं का अध्ययन करने को कहा गया था। परियोजना में उपयोग होने वाले जल के संबंध में सक्षम अधिकारियों से स्वीकृति, हस्ताक्षर एवं एमओयू प्राप्त करना तथा निर्माण और संचालन के दौरान चरणबद्ध पर्यावरणीय अनुपालन प्रस्तुत करना भी निर्देशों में शामिल है।
सिन्हा के अनुसार, बांध से 2107 हेक्टेयर जंगल डूब में आने के कारण लगभग 5 लाख पेड़ों की कटाई का अनुमान है। उन्होंने मांग की कि जनसुनवाई में पर्यावरणीय प्रभावों पर लिखित आपत्तियां दर्ज कराने के लिए पर्यावरणीय प्रभाव आकलन रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।