Breaking

revanchal times new

सरकारी नाली पर पक्का निर्माण? बम्हनी बंजर में कथित अतिक्रमण ने नगर परिषद की निगरानी पर खड़े किए सवाल

बम्हनी बंजर | कथित अतिक्रमण | नगर परिषद

सरकारी नाली पर पक्का निर्माण? कथित अतिक्रमण ने नगर परिषद की निगरानी पर खड़े किए सवाल

नाली की भूमि को निर्माण में शामिल करने का आरोप; कॉलम-बीम के बाद लेंटर की तैयारी की शिकायत, अब सीमांकन और स्थल जांच की मांग

दैनिक रेवाँचल टाईम्स - मंडला, बम्हनी बंजर। नगर परिषद बम्हनी बंजर क्षेत्र में एक व्यावसायिक प्रतिष्ठान के सामने स्थित शासकीय नाली की भूमि पर कथित रूप से पक्का निर्माण किए जाने का मामला सामने आया है। स्थानीय स्तर पर मिली जानकारी के अनुसार पूनम साड़ी सेल के सामने स्थित नाली के हिस्से को लेकर विवाद की स्थिति बनी हुई है।



आरोप है कि सुरभि साड़ी शोरूम के संचालक सौरव अग्रवाल द्वारा कराए जा रहे निर्माण में सार्वजनिक नाली के हिस्से को अंदर लेते हुए कॉलम और बीम खड़े किए जा रहे हैं तथा आगे लेंटर डालने की तैयारी है। हालांकि निर्माण वास्तव में निजी स्वामित्व की भूमि पर है या नगर परिषद की नाली अथवा सार्वजनिक भूमि के किसी हिस्से को इसमें शामिल किया गया है, इसकी पुष्टि अधिकृत सीमांकन और नगर परिषद की जांच से ही हो सकेगी।

आठ वर्ष पहले इसी स्थान से हटाया गया था अतिक्रमण?

स्थानीय लोगों का दावा है कि करीब आठ वर्ष पहले तत्कालीन एसडीएम मंडला के निर्देश पर इसी क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई थी और मौके से चार ठेले हटाए गए थे।

यदि पुरानी कार्रवाई इसी नाली अथवा सार्वजनिक भूमि से संबंधित थी तो नगर परिषद के रिकॉर्ड में इसकी जानकारी उपलब्ध होनी चाहिए। पुराने सीमांकन और अतिक्रमण कार्रवाई के अभिलेख वर्तमान विवाद की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने में महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।

सबसे पहले सीमांकन—निजी जमीन कहां, सरकारी नाली कहां?

पूरे मामले का सबसे महत्वपूर्ण सवाल भूमि की वास्तविक सीमा का है। नगर परिषद और राजस्व अमले को मौके पर उपलब्ध नक्शे, रिकॉर्ड और निर्माण की स्थिति का मिलान कर यह स्पष्ट करना होगा कि निर्माण पूरी तरह निजी भूमि के भीतर हो रहा है या सार्वजनिक नाली की भूमि का कोई हिस्सा भी इसमें शामिल किया गया है।

यदि निर्माण निजी भूमि पर और स्वीकृत अनुमति के अनुरूप पाया जाता है तो आरोपों की स्थिति स्वतः स्पष्ट हो जाएगी। लेकिन यदि जांच में नाली अथवा सार्वजनिक भूमि पर निर्माण पाया जाता है तो यह भी स्पष्ट करना होगा कि निर्माण किस अनुमति के आधार पर किया जा रहा था।

कानून भी कहता है—नाली के ऊपर निर्माण के लिए जरूरी है परिषद की लिखित सहमति

मध्यप्रदेश नगरपालिकाएं अधिनियम, 1961 में नगर परिषद में निहित सीवर, नाली, पुलिया अथवा गटर के ऊपर नए निर्माण या पुनर्निर्माण को लेकर स्पष्ट प्रावधान हैं। ऐसे निर्माण के लिए परिषद की लिखित सहमति आवश्यक होती है।

इसलिए इस मामले में यह भी जांच का विषय है कि संबंधित निर्माण के लिए नगर परिषद से नक्शा अथवा निर्माण अनुमति ली गई है या नहीं और यदि कोई अनुमति जारी हुई है तो उसमें नाली तथा निर्माण की सीमा किस प्रकार दर्ज है।

नाली दबेगी तो जल निकासी पर क्या होगा असर?

सार्वजनिक नाली केवल जमीन का एक हिस्सा नहीं बल्कि नगरीय जल निकासी व्यवस्था का महत्वपूर्ण अंग है। स्थानीय लोगों ने आशंका जताई है कि यदि नाली के मूल स्वरूप या उसकी चौड़ाई को प्रभावित किया गया तो बारिश और गंदे पानी की निकासी में परेशानी पैदा हो सकती है।

इसलिए निरीक्षण में केवल यह देखना पर्याप्त नहीं होगा कि कॉलम कहां खड़े हैं, बल्कि नाली की मूल चौड़ाई, पानी के प्रवाह, सफाई के लिए उपलब्ध पहुंच और भविष्य में रखरखाव की व्यवस्था भी देखी जानी चाहिए।

मामला नगर परिषद के संज्ञान में, अब स्थल निरीक्षण का इंतजार

उपलब्ध जानकारी के अनुसार मामला नगर परिषद की मुख्य नगर पालिका अधिकारी मीना पटेल के संज्ञान में पहुंचाया गया है। उनका कहना बताया गया है कि कर्मचारी को मौके पर भेजकर स्थल का निरीक्षण कराया जाएगा।

अब निगाह इस बात पर है कि निरीक्षण में नाली और निर्माण की वास्तविक सीमा का परीक्षण किस प्रकार किया जाता है और मौके की स्थिति के आधार पर परिषद क्या निर्णय लेती है।

निरीक्षण तक निर्माण आगे बढ़ा तो जिम्मेदारी किसकी?

शिकायत करने वालों का आरोप है कि नगर परिषद तक मामला पहुंचने के बावजूद मौके पर निर्माण कार्य आगे बढ़ रहा है और कॉलम-बीम के बाद लेंटर डालने की तैयारी की जा रही है।

ऐसे में सवाल यह है कि विवादित निर्माण की स्थिति स्पष्ट होने तक नगर परिषद ने मौके पर क्या कदम उठाया? यदि निर्माण वैध है तो दस्तावेजों से स्थिति साफ की जानी चाहिए और यदि प्रथम दृष्टया सार्वजनिक भूमि अथवा नाली प्रभावित होती दिखाई देती है तो नियमानुसार तत्काल कार्रवाई पर निर्णय होना चाहिए।

इन दस्तावेजों से साफ हो सकती है पूरी तस्वीर

नगर परिषद यदि संबंधित भूखंड का स्वामित्व रिकॉर्ड, स्वीकृत नक्शा, भवन निर्माण अनुमति, नाली का नगर परिषद रिकॉर्ड, पुराना सीमांकन तथा पूर्व में हुई अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दस्तावेजों का मिलान करती है तो विवाद की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

रेवाँचल टाईम्स के सीधे सवाल

जिस स्थान पर निर्माण चल रहा है उसकी वास्तविक सीमा क्या है? नाली नगर परिषद के रिकॉर्ड में कितनी चौड़ी और कहां तक दर्ज है? क्या संबंधित निर्माण का नक्शा स्वीकृत है? क्या नाली के ऊपर अथवा उसके हिस्से को शामिल कर निर्माण करने की कोई लिखित अनुमति दी गई है? यदि नहीं, तो निर्माण प्रारंभ होने के समय नगर परिषद का मैदानी अमला कहां था? और यदि निर्माण पूरी तरह वैध है तो परिषद दस्तावेज सार्वजनिक कर विवाद को समाप्त क्यों नहीं करती?

आरोप की पुष्टि सीमांकन और दस्तावेजों की जांच से ही

फिलहाल संबंधित शोरूम संचालक पर लगाए गए अतिक्रमण के आरोप की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। केवल निर्माण होते दिखाई देने से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि सरकारी भूमि पर अतिक्रमण सिद्ध हो गया है। इसके लिए नगर परिषद एवं संबंधित राजस्व रिकॉर्ड के आधार पर स्थल का सीमांकन और निर्माण अनुमति की जांच जरूरी है।

अब नजर नगर परिषद की आगामी कार्रवाई पर है। स्थल निरीक्षण और रिकॉर्ड की जांच के बाद यह साफ होना चाहिए कि निर्माण निजी भूमि की सीमा में है या सार्वजनिक नाली का कोई हिस्सा प्रभावित हो रहा है। यदि अतिक्रमण नहीं है तो स्थिति स्पष्ट की जाए और यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो निर्माण पूरा होने का इंतजार किए बिना नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

दैनिक रेवाँचल टाईम्स
मंडला | बम्हनी बंजर | नगर परिषद | सार्वजनिक नाली | कथित अतिक्रमण

Post a Comment

Previous Post Next Post
revanchal times new