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एकलव्य छात्रा मौत मामला: जांच में लापरवाही का उल्लेख, विष्णु सिंगोर पर प्रस्तावित कार्रवाई की स्थिति पर उठे सवाल

एकलव्य छात्रा मौत मामला | मंडला

जांच में लापरवाही का उल्लेख, विष्णु सिंगोर पर प्रस्तावित कार्रवाई की स्थिति पर उठे सवाल

कलेक्टर कार्यालय ने मांगी कार्रवाई की जानकारी—सवाल, निलंबन प्रस्ताव पर आगे क्या हुआ?

दैनिक रेवांचल टाइम्स | मंडला। आदिवासी बाहुल्य मंडला जिले में जनजातीय विद्यार्थियों की सुरक्षा और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय की एक छात्रा की मृत्यु से जुड़े मामले में हुई जांच के बाद जनजातीय कार्य विभाग के क्षेत्र संयोजक विष्णु सिंगोर की भूमिका को लेकर विभागीय कार्रवाई की स्थिति अब सवालों के घेरे में है।

उपलब्ध पत्र के अनुसार कलेक्टर कार्यालय मंडला के पत्र क्रमांक एस.सी./2026/531, दिनांक 15 सितंबर 2026 में संयुक्त जांच दल की रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए विष्णु सिंगोर के विरुद्ध निलंबन की कार्रवाई प्रस्तावित किए जाने की बात दर्ज है। पत्र में संबंधित विभाग से अब तक की गई कार्रवाई की जानकारी भी मांगी गई है।

बड़ा सवाल—निलंबन प्रस्ताव के बाद कार्रवाई कहां तक पहुंची?

यदि जांच प्रतिवेदन के आधार पर निलंबन की कार्रवाई प्रस्तावित की गई थी तो उसके बाद सक्षम स्तर पर क्या निर्णय लिया गया? क्या निलंबन आदेश जारी हुआ? यदि नहीं हुआ तो प्रस्ताव अभी किस स्तर पर विचाराधीन है? यही सवाल अब पूरे मामले के केंद्र में है।

जांच रिपोर्ट में सहयोग नहीं करने का उल्लेख

कलेक्टर कार्यालय से सहायक आयुक्त, जनजातीय कार्य विभाग को भेजे गए पत्र में अगस्त 2025 में एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय की छात्रा की मृत्यु से जुड़े मामले का उल्लेख किया गया है। घटना के बाद मामले की जांच के लिए संयुक्त जांच दल गठित कर विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए थे।

उपलब्ध पत्र के विवरण के अनुसार संयुक्त जांच रिपोर्ट में यह उल्लेख किया गया कि विष्णु सिंगोर द्वारा जांच में अपेक्षित सहयोग नहीं किया गया। साथ ही छात्रा की मृत्यु के बाद उनके स्तर से जांच नहीं कराए जाने तथा उच्च अधिकारियों के निर्देशों के अनुपालन को लेकर भी सवाल दर्ज किए गए। इन्हीं बिंदुओं के आधार पर उनके विरुद्ध निलंबन की कार्रवाई प्रस्तावित किए जाने का उल्लेख पत्र में बताया गया है।

प्रस्तावित कार्रवाई और अंतिम आदेश में है बड़ा अंतर

यहां यह स्पष्ट करना भी जरूरी है कि किसी जांच रिपोर्ट में निलंबन की कार्रवाई प्रस्तावित होना और सक्षम प्राधिकारी द्वारा वास्तविक निलंबन आदेश जारी होना दो अलग प्रशासनिक चरण हैं। इसलिए यह सामने आना जरूरी है कि प्रस्ताव मिलने के बाद सक्षम अधिकारी ने क्या निर्णय लिया।

चार सवाल जिनका जवाब विभाग को देना चाहिए

क्या विष्णु सिंगोर के विरुद्ध प्रस्तावित निलंबन पर कोई अंतिम आदेश जारी हुआ? यदि हुआ तो उसकी तारीख और वर्तमान स्थिति क्या है? यदि आदेश जारी नहीं हुआ तो प्रस्ताव किस स्तर पर विचाराधीन है? और कलेक्टर कार्यालय द्वारा कार्रवाई की जानकारी मांगे जाने के बाद विभाग ने क्या जवाब भेजा?

संरक्षण के सवाल क्यों उठ रहे हैं?

प्रस्तावित विभागीय कार्रवाई की वर्तमान स्थिति सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं होने के कारण अब प्रशासनिक संरक्षण को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि किसी व्यक्ति या जनप्रतिनिधि द्वारा संरक्षण दिए जाने का कोई स्वतंत्र रूप से सत्यापित प्रमाण फिलहाल सामने नहीं आया है।

ऐसे में संरक्षण की अटकलों का सबसे स्पष्ट जवाब विभागीय रिकॉर्ड ही दे सकता है। प्रस्ताव किस तारीख को किस कार्यालय भेजा गया, उस पर क्या टिप्पणी हुई और सक्षम प्राधिकारी ने क्या निर्णय लिया—इन तथ्यों के सामने आने से स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

मानव अधिकार आयोग को भी बतानी है कार्रवाई की स्थिति

उपलब्ध पत्र के अनुसार कलेक्टर कार्यालय ने संबंधित विभाग से की गई कार्रवाई की जानकारी इसलिए भी मांगी है ताकि मानव अधिकार आयोग को कार्रवाई के प्रतिवेदन से अवगत कराया जा सके। इससे विभागीय कार्रवाई की वर्तमान स्थिति और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।

यदि किसी मामले में आयोग को प्रतिवेदन भेजा जाना है तो विभाग द्वारा की गई वास्तविक कार्रवाई का रिकॉर्ड स्पष्ट होना जरूरी है। ऐसे में केवल निलंबन प्रस्ताव का उल्लेख पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि प्रस्ताव के बाद हुए निर्णय की स्थिति भी सामने आनी चाहिए।

आदिवासी छात्रावासों और विद्यालयों में जवाबदेही का बड़ा सवाल

मंडला जैसे आदिवासी बाहुल्य जिले में आवासीय विद्यालयों में रहने वाले विद्यार्थियों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और देखरेख अत्यंत संवेदनशील विषय है। किसी विद्यार्थी की मृत्यु के बाद होने वाली जांच का उद्देश्य केवल रिपोर्ट तैयार करना नहीं, बल्कि घटनाक्रम की वास्तविकता सामने लाना, जिम्मेदारी निर्धारित करना और भविष्य में ऐसी परिस्थितियों की पुनरावृत्ति रोकना भी है।

कार्रवाई हुई तो आदेश सामने आए, नहीं हुई तो कारण बताया जाए

इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण तथ्य अब कार्रवाई की वर्तमान स्थिति है। यदि निलंबन अथवा कोई अन्य विभागीय कार्रवाई हुई है तो उसका आदेश और तारीख स्पष्ट की जानी चाहिए। यदि प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय नहीं हुआ है तो यह भी बताया जाना चाहिए कि मामला किस सक्षम स्तर पर लंबित है और इसके क्या प्रशासनिक कारण हैं।

सहायक आयुक्त बोले—पत्र देखकर सुनिश्चित की जाएगी उचित कार्रवाई

दैनिक रेवांचल टाइम्स ने इस संबंध में सहायक आयुक्त जनजातीय कार्य मंडला डॉ. अरुण शुक्ला से बात की। उन्होंने बताया कि उन्हें अभी तक संबंधित आदेश की प्रति प्राप्त होने की जानकारी नहीं है और आदेश देखने के बाद ही आगे की स्थिति स्पष्ट की जा सकेगी।

इनका कहना है—

“विष्णु सिंगोर के विरुद्ध निलंबन की कार्रवाई को लेकर आपके द्वारा मुझे अवगत कराया गया है। मैं संबंधित आदेश को देख लूं, उसके बाद ही नियमानुसार उचित कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।”

— डॉ. अरुण शुक्ला
सहायक आयुक्त, जनजातीय कार्य विभाग, मंडला

अब जवाब विभागीय रिकॉर्ड से ही मिलेगा

जांच रिपोर्ट में दर्ज निष्कर्ष, प्रस्तावित निलंबन, कलेक्टर कार्यालय का पत्र और सहायक आयुक्त का यह कहना कि संबंधित आदेश देखने के बाद कार्रवाई की जाएगी—इन सबके बीच अब सबसे जरूरी है कि विभाग पूरे मामले की वर्तमान स्थिति स्पष्ट करे। इससे यह भी साफ होगा कि प्रस्तावित कार्रवाई किस स्तर तक पहुंची और यदि निर्णय लंबित है तो उसका कारण क्या है।

महत्वपूर्ण

जांच रिपोर्ट में किसी अधिकारी के विरुद्ध लापरवाही का उल्लेख या निलंबन की अनुशंसा/प्रस्ताव अपने आप अंतिम दोषसिद्धि नहीं है। अंतिम विभागीय जिम्मेदारी और कार्रवाई सक्षम प्राधिकारी के आदेश तथा लागू सेवा नियमों के अनुसार निर्धारित होगी। संबंधित अधिकारी विष्णु सिंगोर का पक्ष सामने आने पर उसे भी प्रकाशित किया जाना उचित होगा।

दैनिक रेवांचल टाइम्स
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