मुकदम टोला स्कूल की शासकीय जमीन पर अतिक्रमण का आरोप, ग्रामीणों ने उठाई जमीन बचाने की मांग
ग्रामीण बोले—बच्चों के खेल मैदान, अतिरिक्त कक्ष और भविष्य की शैक्षणिक जरूरतों के लिए जरूरी है जमीन
घुघरी/टिकरिया। तहसील घुघरी अंतर्गत ग्राम टिकरिया के मुकदम टोला स्थित प्राथमिक शाला की शासकीय भूमि पर कथित अतिक्रमण का मामला सामने आया है। ग्रामीणों ने इस संबंध में अनुविभागीय अधिकारी राजस्व घुघरी को आवेदन देकर मामले की जांच, सीमांकन और अतिक्रमण पाए जाने पर उसे हटाने की मांग की है।
ग्रामीणों का आरोप है कि स्कूल से लगी शासकीय भूमि के एक हिस्से पर कथित रूप से कब्जा कर खेती की जा रही है। उनका कहना है कि यदि यह स्थिति बनी रही तो भविष्य में विद्यालय के विस्तार, खेल मैदान और दूसरी शैक्षणिक गतिविधियों के लिए आवश्यक भूमि की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है।
ग्रामीणों द्वारा राजस्व अधिकारी को दिए गए आवेदन के अनुसार खसरा क्रमांक 483 में कुल 0.25 हेक्टेयर शासकीय भूमि दर्ज होने की बात कही गई है। आवेदन में बताया गया है कि करीब 0.03 हेक्टेयर भूमि पर स्कूल भवन एवं परिसर बना हुआ है, जबकि शेष लगभग 0.22 हेक्टेयर भूमि को विद्यालय भवन, खेल मैदान तथा अन्य शासकीय एवं सामाजिक उपयोग से जुड़ी भूमि बताया गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि स्कूल परिसर से लगी इस शासकीय भूमि को भविष्य की जरूरतों को देखते हुए सुरक्षित रखा जाना चाहिए।
ग्रामीणों ने अपने आवेदन में आरोप लगाया है कि गांव के एक व्यक्ति रमेश यादव पिता झुमकलाल यादव द्वारा उक्त शासकीय भूमि के एक हिस्से का कथित रूप से उपयोग खेती के लिए किया जा रहा है। शिकायत में कहा गया है कि स्कूल की दीवार से लगे हिस्से को खेत के रूप में उपयोग किया जा रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि वर्तमान समय में स्कूल भवन के लिए पर्याप्त स्थान दिखाई दे सकता है, लेकिन भविष्य में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ने पर अतिरिक्त कक्षों, खेल मैदान और दूसरी शैक्षणिक गतिविधियों के लिए जमीन की आवश्यकता पड़ सकती है।
ऐसे में यदि स्कूल से लगी शासकीय भूमि पर किसी प्रकार का अतिक्रमण बना रहता है तो भविष्य में विद्यालय के विकास के लिए उपलब्ध स्थान सीमित होने की आशंका है।
ग्रामीणों का कहना है कि स्कूल की शासकीय भूमि को केवल वर्तमान भवन की जरूरत के आधार पर नहीं देखा जाना चाहिए। यह जमीन आने वाले वर्षों में गांव के बच्चों और विद्यालय की आवश्यकताओं के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है।
● खेल मैदान के लिए पर्याप्त स्थान
● अतिरिक्त कक्षों का निर्माण
● शैक्षणिक गतिविधियों के लिए परिसर का विस्तार
● अन्य सार्वजनिक एवं विद्यालयीन जरूरतों के लिए भूमि
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि राजस्व अभिलेखों के आधार पर मौके की जांच और भूमि का सीमांकन कराया जाए। यदि जांच में शासकीय भूमि पर अतिक्रमण पाया जाता है तो नियमानुसार कार्रवाई कर जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराया जाए।
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि संबंधित भूमि गांव के बच्चों के भविष्य और सार्वजनिक उपयोग से जुड़ी है, इसलिए इसका संरक्षण आवश्यक है। अब ग्रामीणों की नजर प्रशासन की कार्रवाई पर है कि शिकायत के बाद मौके का निरीक्षण, सीमांकन और राजस्व दस्तावेजों की जांच कब कराई जाती है।
किसी व्यक्ति द्वारा शासकीय भूमि पर अवैध कब्जा किए जाने की बात फिलहाल ग्रामीणों की शिकायत और आरोप पर आधारित है। राजस्व अभिलेखों की जांच, मौके के सीमांकन और संबंधित पक्ष का पक्ष सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि भूमि पर वास्तव में अतिक्रमण है या नहीं।
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