अयोध्या नगर में तीन एकड़ के प्रोजेक्ट पर सवाल: डुप्लेक्स निर्माण और बुकिंग का दावा, अब अनुमतियों का रिकॉर्ड बताएगा सच
डायवर्सन होने का दावा, लेकिन भूमि उपयोग, लेआउट, विकास अनुमति, भवन अनुज्ञा और RERA की स्थिति की जांच जरूरी
दैनिक रेवाँचल टाईम्स | भोपाल। राजधानी के अयोध्या नगर क्षेत्र में करीब तीन एकड़ भूमि पर विकसित किए जा रहे एक प्रोजेक्ट को लेकर कई सवाल सामने आए हैं। आरोप है कि यहां प्लॉट के साथ डुप्लेक्स निर्माण और बुकिंग की गतिविधियां चल रही हैं, जबकि परियोजना के लिए आवश्यक विभिन्न स्वीकृतियों की वास्तविक स्थिति अभी सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं है।
दैनिक रेवाँचल टाईम्स की टीम ने मामले की पड़ताल के दौरान प्रोजेक्ट से जुड़े बताए जा रहे व्यक्तियों से बातचीत की। टीम के पास मौजूद ऑडियो-वीडियो बातचीत में जमीन, प्लॉट, डुप्लेक्स निर्माण, बुकिंग तथा विभिन्न अनुमतियों को लेकर कई बातें सामने आई हैं। हालांकि इन बातचीतों के आधार पर किसी नियम उल्लंघन का अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। अब इन दावों का संबंधित सरकारी रिकॉर्ड से मिलान किया जाना जरूरी है।
पड़ताल में सामने आई जानकारी के अनुसार संबंधित स्थल पर केवल खाली प्लॉट बेचने के बजाय प्लॉट के साथ अलग-अलग डुप्लेक्स तैयार करके देने की बात कही जा रही है। प्रोजेक्ट से जुड़े लोगों द्वारा बुकिंग लिए जाने की जानकारी भी बातचीत में सामने आई है।
ऐसे में सबसे पहले यह स्पष्ट होना आवश्यक है कि परियोजना का अधिकृत स्वरूप क्या है— यह केवल व्यक्तिगत भूखंडों पर मकान निर्माण का मामला है, स्वीकृत कॉलोनी है, प्लॉटेड डेवलपमेंट है अथवा एक रियल एस्टेट प्रोजेक्ट के रूप में विकसित किया जा रहा है।
प्रोजेक्ट से जुड़ी बातचीत में भूमि का क्षेत्रफल करीब तीन एकड़ बताया गया है। साथ ही जमीन का डायवर्सन कराए जाने की बात भी कही गई है।
लेकिन डायवर्सन का दावा अपने आप यह साबित नहीं करता कि परियोजना से संबंधित प्रत्येक अन्य आवश्यक स्वीकृति भी प्राप्त हो चुकी है। जमीन का वर्तमान भू-उपयोग, डायवर्सन आदेश में दर्ज प्रयोजन, स्वीकृत लेआउट, विकास अनुमति और भवन निर्माण अनुमति का अलग-अलग रिकॉर्ड देखना जरूरी होगा।
यहां एक महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि RERA का प्रश्न केवल अखबार, होर्डिंग या ऑनलाइन विज्ञापन देने से नहीं जुड़ा है। पंजीकरण योग्य रियल एस्टेट परियोजना में पंजीकरण से पहले मार्केटिंग, बुकिंग, बिक्री, बिक्री की पेशकश अथवा खरीदारों को आमंत्रित करने पर भी कानून में प्रावधान हैं।
इसलिए यदि जांच में यह परियोजना RERA के अंतर्गत पंजीकरण योग्य पाई जाती है तो यह देखा जाना जरूरी होगा कि इसका RERA पंजीयन हुआ है या नहीं और कथित बुकिंग किस आधार पर की जा रही है।
पड़ताल में औपचारिक विज्ञापन नहीं दिए जाने की बात सामने आई है। लेकिन वास्तविक प्रश्न विज्ञापन का नहीं, बल्कि परियोजना की प्रकृति और कथित बुकिंग का है।
यदि परियोजना RERA पंजीकरण के दायरे में आती है तो केवल यह कहना पर्याप्त नहीं होगा कि उसका औपचारिक विज्ञापन नहीं किया गया। बुकिंग और बिक्री से संबंधित गतिविधियों की स्थिति भी रिकॉर्ड से स्पष्ट करनी होगी।
पूरे मामले में एक महत्वपूर्ण प्रश्न भवन निर्माण अनुमति का भी है। यदि संबंधित डुप्लेक्सों के लिए भवन अनुमति जारी की गई है तो यह देखना जरूरी होगा कि वह किस भूमि और किस स्वीकृत लेआउट के आधार पर जारी हुई।
यह भी जांच का विषय होगा कि अनुमति पूरे प्रोजेक्ट के संदर्भ में है या अलग-अलग भूखंडों के लिए, अनुमति के साथ कौन-कौन से दस्तावेज संलग्न किए गए और मौके पर किया जा रहा निर्माण स्वीकृत नक्शे से मेल खाता है या नहीं।
परियोजना के लिए नगर तथा ग्राम निवेश विभाग से कौन-सी स्वीकृति आवश्यक थी और वास्तव में कौन-सी स्वीकृति प्राप्त की गई है, इसका निर्धारण भूमि की स्थिति, प्रोजेक्ट के स्वरूप और संबंधित रिकॉर्ड के आधार पर किया जाना चाहिए।
इसलिए बिना दस्तावेज देखे यह कहना कि T&CP की अनुमति निश्चित रूप से नहीं है अथवा निश्चित रूप से आवश्यक नहीं थी—दोनों ही जल्दबाजी होगी।
मामले की पड़ताल के दौरान प्रोजेक्ट से जुड़े बताए जा रहे उदय भान सिंह और संजय यादव के नाम सामने आए हैं। टीम द्वारा की गई बातचीत में परियोजना, निर्माण, बुकिंग और अनुमतियों से जुड़े विषयों पर जानकारी ली गई।
इन व्यक्तियों की कानूनी भूमिका—भूमि स्वामी, डेवलपर, प्रमोटर, बिल्डर अथवा किसी अन्य क्षमता में—संबंधित दस्तावेज सामने आने के बाद ही स्पष्ट रूप से निर्धारित की जा सकती है। इसलिए इस स्तर पर किसी व्यक्ति को नियम उल्लंघन का जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं होगा।
बातचीत के दौरान यह दावा भी सामने आया कि आसपास के अन्य स्थानों पर भी RERA और T&CP की अनुमति के बिना प्लॉटिंग की जा रही है।
यदि ऐसा है तो यह अलग से प्रशासनिक जांच का विषय है। किसी अन्य परियोजना में कथित नियम उल्लंघन वर्तमान परियोजना की वैधानिकता का प्रमाण नहीं बन सकता। प्रत्येक प्रोजेक्ट की अनुमति और निर्माण की स्थिति उसके अपने दस्तावेजों के आधार पर जांची जानी चाहिए।
यदि किसी निर्माणाधीन परियोजना में आम लोगों से बुकिंग राशि ली जा रही है तो संभावित खरीदारों के लिए परियोजना की कानूनी स्थिति जानना महत्वपूर्ण है। स्वामित्व, स्वीकृत नक्शा, विकास अनुमति, निर्माण अनुमति और जहां लागू हो वहां RERA पंजीकरण जैसे दस्तावेज खरीदार को परियोजना की वास्तविक स्थिति समझने में मदद करते हैं।
दैनिक रेवाँचल टाईम्स इस मामले में अब उपलब्ध दावों और रिकॉर्डिंग को सरकारी दस्तावेजों से मिलाने की दिशा में संबंधित राजस्व कार्यालय, नगर निगम, नगर तथा ग्राम निवेश विभाग और अन्य सक्षम प्राधिकरणों से रिकॉर्ड एवं आधिकारिक स्थिति जानने का प्रयास करेगा।
1. संबंधित जमीन का वर्तमान स्वीकृत भू-उपयोग क्या है?
2. डायवर्सन आदेश किस प्रयोजन के लिए जारी हुआ?
3. करीब तीन एकड़ भूमि का कोई स्वीकृत लेआउट है या नहीं?
4. T&CP अथवा अन्य सक्षम प्राधिकरण से कौन-कौन सी स्वीकृतियां ली गई हैं?
5. कॉलोनी अथवा विकास अनुमति की आवश्यकता थी या नहीं?
6. भवन निर्माण अनुमति किस प्राधिकरण ने और किन दस्तावेजों के आधार पर जारी की?
7. भवन अनुमति पूरे प्रोजेक्ट की है या अलग-अलग भूखंडों की?
8. मौके पर बन रहे डुप्लेक्स स्वीकृत नक्शों के अनुरूप हैं या नहीं?
9. परियोजना RERA पंजीकरण के दायरे में आती है या किसी वैधानिक छूट में?
10. यदि बुकिंग ली जा रही है तो उसका कानूनी और दस्तावेजी आधार क्या है?
फिलहाल मामला मौके की जानकारी, संबंधित व्यक्तियों से हुई बातचीत और उनसे जुड़े दावों के स्तर पर है। रेवाँचल टाईम्स ने स्वतंत्र रूप से अभी यह स्थापित नहीं किया है कि परियोजना में किसी अनिवार्य अनुमति का उल्लंघन हुआ है।
परियोजना का नाम, खसरा नंबर, स्वीकृत लेआउट, डायवर्सन आदेश, भवन अनुमति, विकास अनुमति और RERA से संबंधित रिकॉर्ड मिलने के बाद ही वास्तविक स्थिति पर ठोस निष्कर्ष निकाला जा सकेगा।
यदि परियोजना के पास उसके स्वरूप के अनुसार सभी आवश्यक स्वीकृतियां मौजूद हैं तो संबंधित दस्तावेज सामने आने पर उठ रहे सवाल स्वतः स्पष्ट हो जाएंगे। लेकिन यदि किसी आवश्यक अनुमति के बिना विकास, निर्माण अथवा ऐसी बुकिंग की पुष्टि होती है जिसके लिए पूर्व पंजीकरण जरूरी था, तो सक्षम विभागों के सामने नियमानुसार कार्रवाई और अनुमति प्रक्रिया की जांच का प्रश्न खड़ा होगा।
सवाल सीधा है—स्वीकृतियां हैं तो रिकॉर्ड क्या कहता है, और यदि कोई अनिवार्य स्वीकृति नहीं थी तो निर्माण तथा बुकिंग किस आधार पर आगे बढ़ी?
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