किताबों से दोस्ती, नेतृत्व की तैयारी: बीजाडांडी में 50 ‘पुस्तकालय रिसोर्स बच्चों’ की कार्यशाला
10 प्राथमिक शालाओं के बच्चों ने लिया भाग, पठन संस्कृति के साथ अभिव्यक्ति और नेतृत्व क्षमता विकसित करने पर जोर
दैनिक रेवाँचल टाईम्स - मंडला, बीजाडांडी। बच्चों में किताबों के प्रति रुचि बढ़ाने और विद्यालयीन पुस्तकालयों को जीवंत सीखने के केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में एकलव्य फाउंडेशन द्वारा ओरेकल के वित्तीय सहयोग से संचालित जीवंत पुस्तकालय कार्यक्रम के अंतर्गत बुधवार, 30 सितंबर को एक दिवसीय ‘पुस्तकालय रिसोर्स बच्चों की कार्यशाला’ आयोजित की गई।
कार्यशाला प्राथमिक शाला चरगांव माल एवं बीआरसी कार्यालय बीजाडांडी में आयोजित हुई। इसमें विकासखंड की चयनित 10 प्राथमिक शालाओं से पांच-पांच बच्चों सहित कुल 50 बच्चों ने सहभागिता की।
कार्यशाला में प्राथमिक शाला भटा डुंगरिया, बरौंची, विजयपुर, पिपरिया रैय्यत, चरगांव माल, सलैया माल, घोंटा, घुघरी, डुंगरिया और पिपरिया (बुदरा) के बच्चों ने हिस्सा लिया।
कार्यशाला का उद्देश्य बच्चों को ‘पुस्तकालय रिसोर्स’ के रूप में उनकी भूमिका, जिम्मेदारी और जवाबदेही से परिचित कराना था, ताकि विद्यालयों में पुस्तकालय की गतिविधियों को अधिक सक्रिय और प्रभावी बनाया जा सके।
बच्चों को पुस्तकों को व्यवस्थित रखने, अपनी पसंद की पुस्तक चुनने और दूसरे बच्चों को भी पढ़ने के लिए प्रेरित करने सहित पुस्तकालय संचालन से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों की जानकारी दी गई। विशेष जोर इस बात पर रहा कि बच्चे केवल पुस्तकालय के पाठक न रहें, बल्कि उसकी गतिविधियों में सक्रिय भागीदार और नेतृत्वकर्ता भी बनें।
कार्यशाला को रोचक बनाने के लिए कविता गायन, किताब-अखबार, ‘मेरे जैसे कौन’, किताबों को प्रदर्शित करने के तरीके, बुक रेस और किताब चर्चा जैसी गतिविधियां आयोजित की गईं।
इन गतिविधियों ने बच्चों को किताबों से सहज रूप से जुड़ने के साथ अपने विचार व्यक्त करने, सवाल पूछने और दूसरे बच्चों के विचार सुनने का अवसर दिया।
कार्यशाला में बच्चों की स्वतंत्र पठन क्षमता, भाषा एवं अभिव्यक्ति कौशल, रचनात्मक सोच, तार्किक समझ और नेतृत्व क्षमता विकसित करने पर विशेष ध्यान दिया गया। सामूहिक गतिविधियों के माध्यम से बच्चों में सहयोग, संवाद और समूह में सीखने की भावना को भी प्रोत्साहित किया गया।
एकलव्य फाउंडेशन की इस पहल का उद्देश्य विद्यालयीन पुस्तकालयों को केवल किताबों के संग्रह तक सीमित रखने के बजाय बच्चों के लिए पढ़ने, सीखने, सोचने, कल्पना करने और अपनी बात कहने का जीवंत माध्यम बनाना है।
पुस्तकालय रिसोर्स बच्चों को जिम्मेदारी देकर विद्यालय स्तर पर अन्य बच्चों को भी पुस्तकों से जोड़ने और नियमित पठन की संस्कृति विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है।
कार्यशाला में बीआरसी मनोज चंदेल, बीएसी, सीएसी, प्राथमिक शाला चरगांव माल के शिक्षक श्री झारिया, दो अतिथि शिक्षक, तीन यूथ साथी तथा एकलव्य टीम बीजाडांडी के साथी उपस्थित रहे।
आयोजन से जुड़े लोगों के अनुसार बीजाडांडी शिक्षा तंत्र द्वारा इस प्रकार के शैक्षणिक नवाचारों और बच्चों को केंद्र में रखकर आयोजित गतिविधियों में लगातार सहयोग प्रदान किया जा रहा है।
पुस्तकालय रिसोर्स बच्चों की यह पहल विद्यालय में बच्चों को जिम्मेदारी देने के साथ उनमें नेतृत्व विकसित करने का प्रयास भी है। इससे किताब और बच्चे के बीच रिश्ता मजबूत होने के साथ विद्यालय में सामूहिक पठन की संस्कृति को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
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