बजाग में गीता दान और पूर्णाहुति के साथ श्रीमद् देवी भागवत कथा संपन्न, दुर्गा पंडालों में हवन-पूजन और भंडारे की धूम
नौ दिनों तक भक्तिरस में डूबा नगर, स्वामी विट्ठलदास जी महाराज ने दिया सदाचार और मर्यादित जीवन का संदेश; नर्मदा मंदिर में गरबा प्रतियोगिता ने बांधा समां
दैनिक रेवांचल टाइम्स | बजाग। डिंडौरी जिले के बजाग नगर में शारदीय नवरात्रि का पर्व श्रद्धा, भक्ति और धार्मिक उल्लास के साथ संपन्न हुआ। नौ दिनों तक नगर का वातावरण मां आदिशक्ति की आराधना, देवी स्तुति और धार्मिक अनुष्ठानों से भक्तिमय बना रहा। राम मंदिर परिसर में आयोजित नौ दिवसीय श्रीमद् देवी भागवत कथा का समापन नवमी के अवसर पर स्वामी श्री विट्ठलदास जी महाराज के प्रवचन, गीता दान और पूर्णाहुति के साथ हुआ।
इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने गीता दान कर पुण्य लाभ अर्जित किया। वहीं, नगर के विभिन्न दुर्गा पंडालों में हवन-पूजन, कन्या भोज और भंडारे आयोजित किए गए। धार्मिक कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर परिवार और समाज की सुख-समृद्धि की कामना की।
नौ दिवसीय देवी भागवत कथा, गीता दान, पूर्णाहुति, हवन-पूजन, कन्या भोज, विशाल भंडारे और नर्मदा मंदिर परिसर में गरबा प्रतियोगिता।
सदाचार ही मनुष्य के जीवन की सच्ची पूंजी : स्वामी विट्ठलदास
श्रीमद् देवी भागवत कथा के नवम दिवस स्वामी श्री विट्ठलदास जी महाराज ने मां तुलसी, माता सावित्री और 51 शक्तिपीठों से जुड़े धार्मिक प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने मां लक्ष्मी के तुलसी स्वरूप तथा गंगा और सरस्वती के नदी रूप में प्रकट होने से जुड़ी पौराणिक कथाओं के माध्यम से श्रद्धालुओं को धर्म, आस्था और सदाचार का महत्व समझाया।
स्वामी जी ने कहा कि मनुष्य के जीवन में उत्तम चरित्र और सदाचार का विशेष महत्व है। केवल धन एकत्रित करना जीवन की सफलता का आधार नहीं हो सकता। यदि व्यक्ति का आचरण अच्छा नहीं है तो उसका धन भी जीवन को सार्थक नहीं बना सकता।
स्वामी जी ने समझाया कि जिस प्रकार किसी विशाल भवन की मजबूती उसकी नींव पर निर्भर करती है, उसी प्रकार मनुष्य के जीवन की सफलता उसके चरित्र, संस्कार और आचरण पर आधारित होती है।
भगवान श्रीराम के आदर्श जीवन से प्रेरणा लेने का आह्वान
प्रवचन के दौरान स्वामी विट्ठलदास जी महाराज ने भगवान श्रीराम के आदर्श जीवन का उल्लेख करते हुए कहा कि मर्यादा और कर्तव्यपालन जीवन के महत्वपूर्ण आधार हैं। भगवान श्रीराम का जीवन प्रत्येक व्यक्ति को अनुशासन, सदाचार और मर्यादित व्यवहार की प्रेरणा देता है।
उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं के आध्यात्मिक संदेश को समझने के लिए भी मर्यादा और आदर्श जीवन के महत्व को जानना आवश्यक है। व्यक्ति को अपने व्यवहार में अच्छे संस्कारों और धर्मसम्मत आचरण को स्थान देना चाहिए।
दैनिक जीवन में पूजा-पाठ और आध्यात्मिक साधना का महत्व
स्वामी जी ने श्रद्धालुओं को दैनिक जीवन में धर्म और आध्यात्मिकता अपनाने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि धार्मिक परंपरा में सुबह उठकर हथेलियों के दर्शन का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता के अनुसार हथेलियों में मां लक्ष्मी, मां सरस्वती और भगवान गोविंद का वास माना जाता है।
उन्होंने स्नान के बाद तुलसी पूजन, सूर्य को अर्घ्य और प्रभु आराधना की परंपराओं का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपनी दिनचर्या में पूजा-पाठ और आध्यात्मिक चिंतन के लिए समय निकालना चाहिए।
रुद्राक्ष, तुलसी और भस्म की धार्मिक महिमा बताई
कथा के दौरान स्वामी जी ने तुलसी और रुद्राक्ष धारण करने की धार्मिक महिमा का वर्णन किया। उन्होंने शिवपुराण से जुड़ी मान्यता का उल्लेख करते हुए बताया कि रुद्राक्ष को भगवान शिव का प्रिय माना जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार भगवान शिव के अश्रु बिंदुओं से रुद्राक्ष की उत्पत्ति हुई थी।
उन्होंने रुद्राक्ष के विभिन्न प्रकारों और धार्मिक महत्व की जानकारी दी। साथ ही भस्म को जीवन की नश्वरता और आध्यात्मिक चिंतन का प्रतीक बताते हुए श्रद्धालुओं को सदाचारपूर्ण जीवन जीने की प्रेरणा दी।
दुर्गा पंडालों में हवन-पूजन और भंडारे, उमड़े श्रद्धालु
सोमवार को बजाग नगर के विभिन्न दुर्गा पंडालों में हवन-पूजन, कन्या भोज और भंडारे के साथ नवरात्रि के धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुए। दोपहर से प्रारंभ हुए कार्यक्रम देर शाम तक चलते रहे। मां दुर्गा के दर्शन, पूजा-अर्चना और प्रसाद ग्रहण करने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती रही।
नगर के राम मंदिर, ठाकुरदेव, गांधी चौक, बजरंग मंदिर, कबीर मोहल्ला, हराटोला, आवास मोहल्ला, मोनी बाबा कुटी स्थित नर्मदा मंदिर और शारदा मंदिर सहित विभिन्न स्थानों पर धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए।
ग्रामीण अंचलों में भी हवन-पूजन और कन्या भोज के आयोजन हुए। श्रद्धालुओं ने मां आदिशक्ति की आराधना कर परिवार, समाज और क्षेत्र में सुख-शांति एवं समृद्धि की कामना की।
नर्मदा मंदिर में गरबा प्रतियोगिता ने बांधा समां
नवरात्रि के अवसर पर रविवार की रात मोनी बाबा कुटी स्थित नर्मदा मंदिर परिसर में गरबा प्रतियोगिता आयोजित की गई। प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक गरबा प्रस्तुत कर आयोजन को आकर्षक बनाया। गरबा की प्रस्तुतियों ने धार्मिक वातावरण में उत्साह और उल्लास का रंग भर दिया।
उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को मंदिर समिति की ओर से पुरस्कार प्रदान किए गए। प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले प्रतिभागियों को भी सम्मानित किया गया।
कथा की सफलता पर समिति और ग्रामवासियों का आभार
नौ दिवसीय श्रीमद् देवी भागवत कथा के सफल आयोजन पर स्वामी श्री विट्ठलदास जी महाराज ने सार्वजनिक दुर्गोत्सव समिति राम मंदिर के अध्यक्ष रवि साहू, उपाध्यक्ष मनोज साहू, सचिव सुखचैन साहू, यशवंत साहू, चूरामन साहू सहित समस्त साहू समाज और ग्रामवासियों के सहयोग के प्रति आभार व्यक्त किया।
उन्होंने धार्मिक आयोजन में सहभागिता करने वाले सभी श्रद्धालुओं और सहयोगियों को शुभकामनाएं दीं। नौ दिनों तक चले कथा, पूजा-अर्चना और सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने बजाग नगर में धार्मिक आस्था, सामूहिक सहभागिता और सामाजिक एकता का संदेश दिया।
