देवी भागवत कथा में सृष्टि की उत्पत्ति का दिव्य वर्णन, नौ देवियों की झांकी देख भावविभोर हुए श्रद्धालु
राममंदिर परिसर में भक्ति का अद्भुत संगम, स्वामी विट्ठलदास जी महाराज ने सुनाई महारास और देवी महात्म्य की कथा
दैनिक रेवाँचल टाइम्स | बजाग। शारदेय नवरात्रि के पावन अवसर पर बजाग नगर के राममंदिर परिसर में आयोजित नौ दिवसीय श्रीमद् देवी भागवत कथा के आठवें दिन भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक उल्लास का अद्भुत संगम देखने को मिला। कथा व्यास पूज्य स्वामी श्री विट्ठलदास जी महाराज ने देवी के विभिन्न दिव्य स्वरूपों, सृष्टि की उत्पत्ति और महारास की महिमा से जुड़े धार्मिक प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया। कथा श्रवण के लिए पहुंचे श्रद्धालु आध्यात्मिक प्रसंगों में भावविभोर नजर आए।
नवरात्रि के पावन वातावरण में आयोजित कथा के दौरान देवी महात्म्य का विशेष वर्णन किया गया। वहीं कन्याओं को मां दुर्गा के नौ स्वरूपों में सजाकर प्रस्तुत की गई मनोहारी झांकी आकर्षण का प्रमुख केंद्र रही। देवी स्वरूपों के दर्शन के दौरान पूरा कथा पंडाल मां जगदंबा के जयकारों से गूंज उठा।
महारास की महिमा और किशोरी जी के दिव्य स्वरूप का वर्णन
कथा व्यास स्वामी श्री विट्ठलदास जी महाराज ने आठवें दिन महारास की महिमा का वर्णन करते हुए किशोरी जी के दिव्य स्वरूप और उनसे विभिन्न देवी-देवताओं के प्राकट्य से जुड़े धार्मिक प्रसंग सुनाए।
उन्होंने कथा में वर्णित प्रसंगों के माध्यम से बताया कि महारास के दौरान किशोरी जी के दिव्य स्वरूप से वरुण देवता के प्राकट्य का वर्णन मिलता है। इसी क्रम में उनकी जिह्वा से मां सरस्वती, वाम अंग से मां दुर्गा तथा दाहिने अंग से राधारानी के अवतरण का प्रसंग सुनाया गया।
इन पौराणिक कथाओं के माध्यम से स्वामी जी ने देवी शक्ति, आध्यात्मिक चेतना और सृष्टि के दिव्य स्वरूप का धार्मिक महत्व समझाया।
श्रीकृष्ण के अंश से महाविष्णु के प्राकट्य की कथा
कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण के सोलहवें अंश से महाविष्णु के प्राकट्य का धार्मिक प्रसंग भी सुनाया गया। स्वामी जी ने देवी भागवत में वर्णित सृष्टि विस्तार की कथा प्रस्तुत करते हुए मां राधारानी के उदर से ब्रह्मांड की उत्पत्ति का वर्णन किया।
इसके साथ ही ब्रह्मांड को स्वयं से दूर करने तथा भगवान श्रीकृष्ण के श्राप से संबंधित प्रसंगों का उल्लेख करते हुए लक्ष्मी, सरस्वती और गंगा के रूप में प्रकट हुई तीनों देवियों के संतानहीन होने की पौराणिक कथा भी सुनाई।
इन प्रसंगों को सुनाते हुए कथा व्यास ने श्रद्धालुओं को धार्मिक ग्रंथों में वर्णित सृष्टि की उत्पत्ति और देवी शक्ति की महिमा से परिचित कराया।
कथा व्यास ने महारास, देवी-देवताओं के प्राकट्य और सृष्टि की उत्पत्ति से जुड़े धार्मिक प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया।
नौ देवियों के दिव्य स्वरूपों की झांकी बनी आकर्षण का केंद्र
श्रीमद् देवी भागवत कथा के आठवें दिन मां दुर्गा के नौ स्वरूपों के महात्म्य का विशेष वर्णन किया गया। इस अवसर पर कन्याओं को नवदुर्गा के स्वरूपों में सजाकर आकर्षक और मनोहारी झांकी प्रस्तुत की गई।
नौ देवियों के रूप में सजी कन्याओं को देखकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव के साथ देवी स्वरूपों के दर्शन किए और मां जगदंबा की स्तुति करते हुए सुख, शांति और समृद्धि की कामना की।
नवरात्रि के अवसर पर प्रस्तुत इस झांकी ने कथा आयोजन को और अधिक भक्तिमय बना दिया।
कन्याओं के रूप में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की मनोहारी झांकी ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया।
जय दुर्गे, जय काली के जयकारों से गूंजा राममंदिर परिसर
झांकी के दौरान कथा पंडाल में श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बन रहा था। मां दुर्गा के दिव्य स्वरूपों के दर्शन होते ही पूरा परिसर ‘जय दुर्गे, जय काली’ और मां जगदंबा के जयकारों से गुंजायमान हो उठा।
श्रद्धालुओं ने पूरी आस्था के साथ मां भगवती का स्मरण किया। धार्मिक वातावरण और देवी स्वरूपों की मनोहारी प्रस्तुति ने उपस्थित भक्तों को भावविभोर कर दिया।
राममंदिर परिसर में नवरात्रि का उत्साह और भक्ति का वातावरण पूरे आयोजन के दौरान बना रहा।
बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने किया कथा श्रवण
नौ दिवसीय श्रीमद् देवी भागवत कथा के आठवें दिन बड़ी संख्या में धर्मप्रेमी श्रद्धालु राममंदिर परिसर पहुंचे। उन्होंने कथा व्यास के मुखारविंद से देवी महात्म्य, महारास और सृष्टि की उत्पत्ति से जुड़े पौराणिक प्रसंगों का श्रवण किया।
आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं में धार्मिक उत्साह दिखाई दिया। देवी भागवत कथा और नवदुर्गा की झांकी ने श्रद्धालुओं को भक्ति तथा आध्यात्मिक अनुभूति से जोड़ने का अवसर प्रदान किया।
शारदेय नवरात्रि के पावन अवसर पर बजाग का राममंदिर परिसर देवी आराधना और श्रद्धा का प्रमुख केंद्र बना रहा।
देवी भागवत कथा के आठवें दिन सृष्टि की उत्पत्ति के धार्मिक प्रसंगों और नौ देवियों की जीवंत झांकी ने आयोजन को विशेष बना दिया।
