अंधेरे में पंडरिया: अधिकतर स्ट्रीट लाइटें बंद होने की शिकायत, रात में राहगीरों की बढ़ी परेशानी
ग्रामीणों ने उठाए रखरखाव पर सवाल, मुख्य मार्गों और गलियों में रोशनी की व्यवस्था दुरुस्त करने की मांग
नारायणगंज/मंडला। पंडरिया पंचायत क्षेत्र में स्ट्रीट लाइटों की स्थिति को लेकर स्थानीय ग्रामीणों ने नाराजगी जताई है। ग्रामीणों का आरोप है कि क्षेत्र के मुख्य मार्गों, अंदरूनी गलियों और सार्वजनिक स्थानों पर लगी अधिकतर स्ट्रीट लाइटें लंबे समय से बंद पड़ी हैं। इसके कारण रात होते ही कई हिस्सों में अंधेरा छा जाता है और लोगों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ता है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक पर्याप्त रोशनी नहीं होने से रात के समय पैदल चलने वालों और दोपहिया वाहन चालकों को परेशानी होती है। ग्रामीणों का कहना है कि अंधेरे में सड़क के गड्ढे और मवेशी समय पर दिखाई नहीं देते, जिससे दुर्घटना का खतरा बना रहता है। हालांकि दुर्घटनाओं की संख्या को लेकर कोई आधिकारिक आंकड़ा सामने नहीं आया है।
ग्रामीणों का कहना है कि अंधेरी गलियों और मार्गों के कारण महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को रात के समय निकलने में असुविधा होती है। क्षेत्र में आवारा कुत्तों और मवेशियों की मौजूदगी के कारण भी लोग पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था को जरूरी बता रहे हैं।
स्थानीय निवासियों ने यह भी आशंका जताई है कि सार्वजनिक स्थानों पर पर्याप्त रोशनी नहीं रहने से चोरी अथवा अन्य असामाजिक गतिविधियों का खतरा बढ़ सकता है। ग्रामीणों की मांग है कि सुरक्षा की दृष्टि से प्रमुख मार्गों और सार्वजनिक स्थानों की बंद लाइटों को प्राथमिकता के आधार पर चालू कराया जाए।
ग्रामीणों का आरोप है कि बंद स्ट्रीट लाइटों को ठीक कराने के लिए पंचायत स्तर पर कई बार मौखिक शिकायतें की जा चुकी हैं, लेकिन अब तक अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। उनका कहना है कि स्ट्रीट लाइट लगाने के साथ उनका नियमित रखरखाव भी जरूरी है, ताकि सार्वजनिक धन से तैयार सुविधा वास्तव में ग्रामीणों के उपयोग में आ सके।
स्थानीय लोगों ने पंचायत क्षेत्र में लगी स्ट्रीट लाइटों का सर्वे कराने और खराब लाइटों की सूची तैयार कर उन्हें जल्द सुधारने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि जहां नई लाइट या अन्य तकनीकी सुधार की आवश्यकता है, वहां भी समयबद्ध कार्रवाई की जानी चाहिए।
स्ट्रीट लाइटों की संख्या, कितनी लाइटें वर्तमान में खराब हैं, उनके रखरखाव की जिम्मेदारी किसके पास है और मरम्मत के लिए क्या कार्रवाई की गई है—इन बिंदुओं पर पंचायत प्रशासन का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है। पंचायत का पक्ष मिलने पर स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।
ग्रामीणों का कहना है कि विकास की योजनाओं का वास्तविक लाभ तभी है, जब उनसे जुड़ी बुनियादी सुविधाएं चालू हालत में रहें। अब उनकी निगाह इस बात पर है कि पंडरिया की बंद स्ट्रीट लाइटों को रोशन करने के लिए जिम्मेदार अमला कितनी जल्दी कार्रवाई करता है।
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