सलवाह में Jio-BSNL नेटवर्क से ग्रामीण परेशान: टॉवर मौजूद, फिर भी कमजोर सिग्नल और इंटरनेट की शिकायत
ग्रामीणों ने उठाया सवाल—टॉवर चालू हैं तो भरोसेमंद नेटवर्क क्यों नहीं? तकनीकी जांच और समयबद्ध सुधार की मांग
घुघरी/सलवाह। गांवों तक डिजिटल सेवाओं की पहुंच लगातार बढ़ रही है, लेकिन घुघरी तहसील के सलवाह क्षेत्र में मोबाइल नेटवर्क की स्थिति को लेकर ग्रामीणों ने गंभीर शिकायतें की हैं। ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में Jio और BSNL के टॉवर मौजूद होने के बावजूद कई स्थानों पर स्थिर मोबाइल नेटवर्क और उपयोगी इंटरनेट स्पीड नहीं मिल पा रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि मोबाइल टॉवर स्थापित होने के बाद भी यदि उपभोक्ताओं को नियमित और भरोसेमंद सेवा नहीं मिल रही है तो इसकी तकनीकी वजह सामने आनी चाहिए। टॉवर की क्षमता, कवरेज, बैकहॉल कनेक्टिविटी, बिजली आपूर्ति और उपकरणों की स्थिति की जांच कर वास्तविक समस्या का पता लगाने की मांग की गई है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक Jio का नेटवर्क कई स्थानों पर कमजोर रहता है। ग्रामीणों का दावा है कि कुछ जगह सड़क या खुले क्षेत्र में मोबाइल सिग्नल मिल जाता है, लेकिन घरों के अंदर नेटवर्क कमजोर हो जाता है। इंटरनेट की गति भी कई बार इतनी कम होने की शिकायत है कि सामान्य ऑनलाइन कार्य करने में परेशानी आती है।
ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग, पंचायत, शिक्षा, स्वास्थ्य, सहकारिता और कई सरकारी सेवाओं में इंटरनेट का उपयोग बढ़ चुका है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कमजोर नेटवर्क के कारण ऑनलाइन बैंकिंग, दस्तावेज डाउनलोड, आवेदन, मोबाइल एप आधारित सेवाओं और अन्य डिजिटल कार्यों में बार-बार परेशानी का सामना करना पड़ता है।
कुछ ग्रामीणों का कहना है कि नेटवर्क की अनिश्चितता के कारण वे Jio के साथ BSNL की सिम भी रखते हैं, ताकि एक नेटवर्क काम न करे तो दूसरे से जरूरी कार्य किया जा सके। ग्रामीणों के मुताबिक दोनों सिम में रिचार्ज कराने से अतिरिक्त खर्च भी उठाना पड़ता है।
स्थानीय उपभोक्ताओं के अनुसार कुछ स्थानों पर BSNL से वॉयस कॉल अपेक्षाकृत बेहतर हो जाती है, लेकिन इसके टॉवर के बीच-बीच में बंद रहने की शिकायत भी ग्रामीण कर रहे हैं। इन शिकायतों की वास्तविक स्थिति टेलीकॉम कंपनी की तकनीकी जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
ग्रामीणों का कहना है कि सवाल केवल मोबाइल टॉवर खड़ा होने का नहीं, बल्कि उससे मिलने वाली वास्तविक सेवा का है। यदि नेटवर्क लगातार कमजोर रहता है तो यह पता लगाया जाना चाहिए कि समस्या कवरेज, क्षमता, बिजली आपूर्ति, उपकरण या बैकहॉल कनेक्टिविटी में से किस स्तर पर है।
टॉवर चालू हैं तो नेटवर्क कमजोर क्यों?
शिकायतें सामने आ रही हैं तो तकनीकी जांच कब होगी?
उपभोक्ता नियमित भुगतान कर रहे हैं तो सेवा की गुणवत्ता की जवाबदेही किसकी है?
ग्रामीणों ने संबंधित टेलीकॉम कंपनियों और जिम्मेदार विभाग से सलवाह क्षेत्र की नेटवर्क व्यवस्था की तकनीकी जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि टॉवर की उपलब्धता, बिजली व्यवस्था, बैकहॉल कनेक्टिविटी, नेटवर्क कवरेज, सिग्नल क्षमता और वास्तविक इंटरनेट स्पीड की जांच कर समस्या सामने लाई जाए और खराबी मिलने पर समय-सीमा में सुधार कराया जाए।
फिलहाल सलवाह में नेटवर्क की गुणवत्ता को लेकर सामने आई शिकायतों की स्वतंत्र तकनीकी पुष्टि होना बाकी है। संबंधित कंपनियों का पक्ष और क्षेत्र में वास्तविक नेटवर्क परीक्षण सामने आने के बाद ही समस्या के सटीक कारण का निर्धारण हो सकेगा। ग्रामीणों को अब उम्मीद है कि उनकी शिकायतों पर तकनीकी स्तर पर कार्रवाई कर मोबाइल और इंटरनेट सेवा में सुधार किया जाएगा।
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