शिकायतों के घेरे में महिला एवं बाल विकास कार्यालय, जिम्मेदारों की भूमिका पर भी सवाल
अधीनस्थ कर्मचारी के खिलाफ शिकायतों पर कार्रवाई हुई या मामला दबा दिया गया? अभिलेखों की जांच से खुलेगा सच
मण्डला/भुआ-बिछिया। महिला एवं बाल विकास परियोजना कार्यालय बिछिया की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं। परियोजना कार्यालय के प्रभारी अधिकारी विनोद वाहने पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि अधीनस्थ कर्मचारी के विरुद्ध लगातार शिकायतें सामने आने के बावजूद अपेक्षित प्रशासनिक कार्रवाई नहीं की गई।
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि संबंधित कर्मचारी को कथित संरक्षण मिलने के कारण शिकायतों का प्रभावी निराकरण नहीं हो पा रहा है। हालांकि इन आरोपों की वास्तविक स्थिति विभागीय जांच और अभिलेखों के परीक्षण के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
यदि शिकायतें निराधार हैं तो निष्पक्ष जांच कर स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं की गई? और यदि शिकायतों में तथ्य हैं तो संबंधित स्तर पर क्या कार्रवाई हुई? यही सवाल अब विभागीय कार्यप्रणाली और प्रशासनिक पारदर्शिता को लेकर उठ रहे हैं।
प्रकरण में यह भी जांच का विषय है कि संबंधित कर्मचारी के विरुद्ध प्राप्त शिकायतों की जानकारी परियोजना कार्यालय द्वारा वरिष्ठ अधिकारियों को किस रूप में भेजी गई। क्या प्रत्येक शिकायत को विधिवत दर्ज किया गया और उस पर जांच की प्रक्रिया अपनाई गई?
यह भी स्पष्ट होना जरूरी है कि संबंधित कर्मचारी से कोई स्पष्टीकरण मांगा गया या नहीं, उपस्थिति एवं कार्यप्रणाली से जुड़े अभिलेखों का परीक्षण किया गया या नहीं और यदि किसी स्तर पर कार्रवाई की गई तो उसका विभागीय रिकॉर्ड क्या कहता है।
शिकायतों पर वास्तव में क्या कार्रवाई हुई, इसका जवाब विभागीय अभिलेखों से सामने आ सकता है। शिकायत पत्र, उपस्थिति पंजी, कार्यालयीन पत्राचार, स्पष्टीकरण और कार्रवाई संबंधी दस्तावेज वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने में महत्वपूर्ण होंगे।
महिला एवं बाल विकास विभाग सीधे महिलाओं और बच्चों से जुड़े संवेदनशील दायित्वों का निर्वहन करता है। ऐसे में कर्मचारियों की उपस्थिति, कर्तव्यपालन, अनुशासन और आचरण से संबंधित शिकायतों की निष्पक्ष जांच आवश्यक मानी जाती है।
शिकायतों को लंबे समय तक लंबित रखना अथवा उनका पर्याप्त परीक्षण किए बिना निराकरण करना—दोनों ही स्थितियां प्रशासनिक पारदर्शिता को लेकर सवाल पैदा कर सकती हैं। इसलिए यह स्पष्ट होना जरूरी है कि शिकायत मिलने के बाद कार्यालय स्तर पर कौन-कौन से कदम उठाए गए।
● शिकायत पत्रों का प्राप्ति एवं निराकरण रिकॉर्ड
● कर्मचारी की उपस्थिति से संबंधित पंजी
● कार्यालयीन पत्राचार एवं वरिष्ठ अधिकारियों को भेजी गई रिपोर्ट
● कारण बताओ नोटिस अथवा स्पष्टीकरण संबंधी दस्तावेज
● जांच एवं कार्रवाई से संबंधित आदेश और अभिलेख
पूरे मामले में केवल संबंधित कर्मचारी के खिलाफ की गई शिकायतों का परीक्षण ही पर्याप्त नहीं होगा। शिकायतें मिलने के बाद परियोजना कार्यालय स्तर पर क्या कार्रवाई हुई और वरिष्ठ अधिकारियों को क्या जानकारी भेजी गई, इसकी भी जांच होने पर वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।
यदि जांच में शिकायतें निराधार पाई जाती हैं तो विभाग को अभिलेखों और जांच निष्कर्षों के आधार पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। वहीं यदि शिकायतों में तथ्य पाए जाते हैं तो नियमानुसार जिम्मेदारी तय कर आवश्यक कार्रवाई की जानी चाहिए।
संबंधित अधिकारी अथवा कर्मचारी पर लगाए गए आरोप शिकायतकर्ताओं के दावों पर आधारित हैं। विभागीय अभिलेखों की जांच और संबंधित पक्षों का जवाब सामने आने के बाद ही यह निर्धारित किया जा सकेगा कि शिकायतों पर नियमानुसार कार्रवाई हुई अथवा किसी स्तर पर प्रशासनिक चूक हुई।
