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नैनपुर में स्मार्ट मीटर से बढ़े बिजली बिलों पर किसानों में आक्रोश, फ्लैट रेट व्यवस्था पर उठे सवाल

दैनिक रेवांचल टाईम्स | मण्डला | नैनपुर

नैनपुर में स्मार्ट मीटर से बढ़े बिजली बिलों पर किसानों में आक्रोश

फ्लैट रेट व्यवस्था पर उठे सवाल; किसानों का दावा—मई से बढ़ने लगे बिल, अगस्त में कुछ उपभोक्ताओं की राशि 10 हजार रुपये तक पहुंची

दैनिक रेवांचल टाईम्स - मण्डला/नैनपुर। नैनपुर क्षेत्र में कृषि विद्युत कनेक्शनों पर लगाए गए स्मार्ट मीटर और उसके बाद आए बिजली बिलों को लेकर किसानों में नाराजगी है। किसानों का आरोप है कि वर्षों से फ्लैट रेट व्यवस्था के तहत बिल जमा करने वाले कृषि उपभोक्ताओं के स्थायी कनेक्शनों पर पर्याप्त जानकारी दिए बिना स्मार्ट मीटर लगाए गए और इसके बाद कई उपभोक्ताओं के बिल पहले की तुलना में काफी बढ़ गए।

फ्लैट रेट व्यवस्था बदली तो आदेश कहां है?

किसानों का कहना है कि वे लंबे समय से कृषि पंप कनेक्शनों के लिए लागू व्यवस्था के अनुसार बिजली बिल जमा करते आ रहे थे। अब उनका सवाल है कि यदि फ्लैट रेट व्यवस्था में कोई बदलाव किया गया है तो वह किस आदेश के तहत हुआ और इसकी जानकारी संबंधित कृषि उपभोक्ताओं को पहले क्यों नहीं दी गई?


किसानों ने मांग की है कि विद्युत विभाग कृषि कनेक्शनों पर वर्तमान में लागू टैरिफ, फ्लैट रेट व्यवस्था की स्थिति और स्मार्ट मीटर लगाए जाने के आधार से संबंधित आदेश सार्वजनिक करे, ताकि भ्रम की स्थिति समाप्त हो सके।

किसानों का दावा
पहले करीब ₹1500 / 6 माह
अब कुछ बिल ₹6,000 से ₹10,000 तक

मई से बिल बढ़ने का दावा, अगस्त में 10 हजार तक

किसानों के अनुसार मई 2026 से कई कृषि उपभोक्ताओं को हर महीने करीब 2 हजार रुपये के बिल मिलने लगे। उनका दावा है कि पहले लगभग छह माह में करीब 1500 रुपये जमा किए जाते थे। इसके बाद राशि बढ़ती गई और अगस्त में कुछ उपभोक्ताओं के बिल 6 हजार से 10 हजार रुपये तक पहुंच गए।

किसानों का तर्क है कि बरसात के मौसम में खेतों में विद्युत पंपों का उपयोग सामान्य तौर पर कम रहता है। ऐसे में बिल में दिखाई गई खपत को लेकर उन्होंने सवाल उठाए हैं। किसानों ने पुराने बिल, नए बिल, मीटर रीडिंग और वास्तविक खपत का मिलान कर स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है।

स्मार्ट मीटर लगाने से पहले जानकारी क्यों नहीं दी?

किसानों का आरोप है कि खेतों में स्मार्ट मीटर लगाए जाने के दौरान उन्हें स्पष्ट रूप से यह नहीं बताया गया कि मीटर किस आदेश के तहत लगाए जा रहे हैं और इसके बाद बिलिंग व्यवस्था पर क्या प्रभाव पड़ेगा।

उनका कहना है कि यदि शासन अथवा विद्युत वितरण कंपनी की किसी योजना या बिलिंग प्रणाली में बदलाव हुआ है तो उसकी शर्तों और प्रभाव की स्पष्ट जानकारी उपभोक्ताओं को दी जानी चाहिए।

जूनियर इंजीनियर की कार्यप्रणाली पर किसानों ने उठाए सवाल

किसानों का कहना है कि उन्होंने नैनपुर में पदस्थ जूनियर इंजीनियर रीतेश कुमार वनवारी से भी बढ़े हुए बिलों को लेकर संपर्क किया। किसानों का आरोप है कि उनकी शिकायतों पर संतोषजनक जानकारी नहीं मिली और बिल जमा नहीं करने की स्थिति में कनेक्शन काटे जाने की बात कही गई।

महत्वपूर्ण: किसानों द्वारा लगाए गए इन आरोपों पर विद्युत विभाग अथवा संबंधित अधिकारी का आधिकारिक पक्ष सामने आना अभी बाकी है। विभाग का पक्ष मिलने पर उसे भी समान प्रमुखता से प्रकाशित किया जाना चाहिए।

एसडीएम की जनसुनवाई तक पहुंचा मामला

बढ़े हुए बिजली बिलों की शिकायत लेकर किसान मंगलवार को एसडीएम कार्यालय में आयोजित जनसुनवाई में पहुंचे। किसानों के अनुसार उन्होंने एसडीएम आशुतोष महादेव सिंह ठाकुर के सामने बिलिंग से जुड़ी पूरी समस्या रखी।

किसानों का कहना है कि एसडीएम ने मामले को दिखवाने का आश्वासन दिया था, लेकिन शिकायत के एक सप्ताह बाद तक उन्हें समाधान की प्रतीक्षा है।

181 की शिकायत बंद होने पर भी नाराजगी

कुछ किसानों ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 181 पर भी शिकायत दर्ज कराने की बात कही है। किसानों का आरोप है कि वास्तविक समस्या का समाधान होने से पहले ही कुछ शिकायतों को निराकृत बताकर बंद कर दिया गया।

किसानों ने मांग की है कि शिकायतों की स्थिति और उनके निराकरण में दर्ज विभागीय जवाब की भी जांच की जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि शिकायत किस आधार पर बंद की गई।

समाधान नहीं हुआ तो सामूहिक विरोध की चेतावनी

बढ़ते बिजली बिलों से परेशान किसानों ने अब एकजुट होकर विभाग के सामने मामला रखने का निर्णय लिया है। किसानों की प्रमुख मांग है कि फ्लैट रेट व्यवस्था की वर्तमान स्थिति स्पष्ट की जाए, स्मार्ट मीटर लगाने से संबंधित आदेश की जानकारी दी जाए तथा पुराने और नए बिलों के साथ मीटर रीडिंग का परीक्षण कराया जाए।

किसानों के पांच सीधे सवाल
फ्लैट रेट व्यवस्था की वर्तमान स्थिति क्या है?
कृषि कनेक्शनों पर स्मार्ट मीटर किस आदेश के तहत लगाए गए?
मई 2026 के बाद बिल अचानक क्यों बढ़े?
पुराने और नए बिलों तथा मीटर रीडिंग का मिलान कब होगा?
विवादित बिलों में त्रुटि मिलने पर सुधार की प्रक्रिया क्या होगी?
किसानों को चाहिए आदेश और बिलिंग का स्पष्ट हिसाब

किसानों का कहना है कि उनका विरोध स्मार्ट मीटर की तकनीक से अधिक बढ़े हुए बिल और बिलिंग के आधार को लेकर है। विभाग रिकॉर्ड के साथ स्थिति स्पष्ट करे और यदि बिलों में त्रुटि है तो उसका सुधार किया जाए। समाधान नहीं मिलने पर किसानों ने सामूहिक विरोध दर्ज कराने की बात कही है।

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