दो साल से कार्यालय से नदारद रहकर पूरा वेतन लेने का आरोप! PHE विभाग में वेतन और भुगतान पर उठे सवाल
बिना उपस्थिति हस्ताक्षर वेतन आहरण और जल जीवन मिशन के यात्रा भत्तों की जांच की मांग
शिकायतकर्ता ने विभागीय पत्रों का दिया हवाला, कार्यपालन यंत्री मनोज भास्कर ने आरोप नकारते हुए प्रेस विज्ञप्ति को बताया फर्जी
दैनिक रेवांचल टाइम्स | मंडला। जिले के लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (पीएचई) विभाग में कर्मचारियों की उपस्थिति, वेतन आहरण और सरकारी राशि के भुगतान को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। मध्यप्रदेश टेक्नीशियन तकनीकी अनुपालन समिति के पूर्व संभागीय अध्यक्ष राजीव उसराठे ने एक प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
वहीं, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग मंडला के कार्यपालन यंत्री मनोज भास्कर ने इन आरोपों से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि उनके कार्यालय में ऐसा कुछ नहीं हुआ है और जिस प्रेस विज्ञप्ति की बात की जा रही है, वह फर्जी है।
इस तरह शिकायतकर्ता और विभागीय अधिकारी के परस्पर विरोधी बयानों के बाद अब सवाल उठ रहा है कि वास्तविक स्थिति क्या है और संबंधित अभिलेखों की जांच से क्या तथ्य सामने आएंगे?
दो वर्षों से अनुपस्थिति का आरोप, फिर वेतन भुगतान कैसे?
राजीव उसराठे की ओर से जारी बताई गई प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, मंडला खंड कार्यालय में पदस्थ एक महिला जिला सलाहकार लगभग दो वर्षों से कार्यालय से अनुपस्थित थीं। शिकायतकर्ता ने दावा किया है कि इसी कारण अप्रैल 2025 में उनका वेतन रोके जाने की बात सामने आई थी।
इसके बावजूद आरोप लगाया गया है कि संबंधित महिला जिला सलाहकार के कार्यालय की उपस्थिति पंजी में हस्ताक्षर नहीं होने पर भी भोपाल में रहते हुए पूरे माह का वेतन आहरित किया जा रहा है।
हालांकि, वेतन रोके जाने और बाद में भुगतान होने के इन दावों की पुष्टि संबंधित वेतन अभिलेखों एवं उपस्थिति रिकॉर्ड से ही हो सकती है।
यदि किसी कर्मचारी की नियमित उपस्थिति दर्ज नहीं है, तो उसके वेतन भुगतान का आधार क्या है? क्या कर्मचारी किसी अधिकृत कार्यालयीन कार्य, प्रतिनियुक्ति अथवा स्वीकृत व्यवस्था के अंतर्गत कार्यरत था? इन सवालों का जवाब संबंधित आदेश और अभिलेख ही दे सकते हैं।
दो सलाहकार और एक हाइड्रोलॉजिस्ट के वेतन पर भी सवाल
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि विभाग में कार्यरत दो कर्मचारी सलाहकारों एवं एक हाइड्रोलॉजिस्ट द्वारा खंड और उपखंड कार्यालय की उपस्थिति पंजी में हस्ताक्षर किए बिना वेतन आहरण किया गया।
शिकायत में मांग की गई है कि संबंधित कर्मचारियों की वास्तविक कार्यस्थल पर उपस्थिति, कार्य आवंटन, स्वीकृत अवकाश, वेतन भुगतान और कार्यालयीन आदेशों का मिलान कराया जाए।
आरोपों की पुष्टि होने पर ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि किसी भुगतान में नियमों का उल्लंघन हुआ है या नहीं।
जल जीवन मिशन में यात्रा भत्ता भुगतान की जांच की मांग
प्रेस विज्ञप्ति में वर्ष 2024, 2025 और 2026 के फरवरी-मार्च महीनों के दौरान जल जीवन मिशन के अंतर्गत बड़ी मात्रा में यात्रा भत्ता भुगतान किए जाने का भी आरोप लगाया गया है।
राजीव उसराठे का दावा है कि संबंधित कर्मचारियों के कार्यों, यात्रा विवरण, भुगतान अभिलेखों और माप पुस्तिकाओं का मिलान किया जाए, तो वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।
इसके अतिरिक्त, माप पुस्तिका (एमबी) रिकॉर्ड तैयार कराने तथा कथित फर्जी बिलों से जुड़े दस्तावेजों पर उपयंत्री और सहायक यंत्री के हस्ताक्षर कराए जाने के आरोप भी लगाए गए हैं।
हालांकि, इन आरोपों के समर्थन में प्रमाणित भुगतान विवरण, संबंधित बिलों की प्रतियां अथवा स्वतंत्र जांच के निष्कर्ष उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। ऐसे में इनकी सत्यता का निर्धारण दस्तावेजों की जांच के बाद ही संभव होगा।
कलेक्टर और विभागीय अधिकारियों के पत्रों का दिया हवाला
शिकायतकर्ता ने दावा किया है कि मामले में पूर्व में भी वरिष्ठ अधिकारियों और कलेक्टर कार्यालय के समक्ष शिकायतें की गई थीं। उन्होंने निम्नलिखित पत्रों का उल्लेख किया है।
31 अगस्त 2026
विभागीय वरिष्ठ अधिकारियों का पत्र क्रमांक
2394/स्टेनो/मु.अ. जबलपुर
3 अगस्त 2026
कलेक्टर मंडला का पत्र क्रमांक
शिकायत/713
24 सितंबर 2026
कलेक्टर कार्यालय का पत्र क्रमांक
कलेक्टर/सतर्कता/764
राजीव उसराठे का आरोप है कि संबंधित पत्रों और शिकायतों के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।
हालांकि, इन पत्रों की प्रतियां, उनकी विषयवस्तु और उन पर की गई विभागीय कार्रवाई का स्वतंत्र सत्यापन अभी आवश्यक है। पत्रों का हवाला दिए जाने मात्र से किसी अनियमितता की पुष्टि नहीं होती।
इनका कहना: आरोपों पर दोनों पक्ष आमने-सामने
“मुझे इस संबंध में कोई जानकारी नहीं है और हमारे कार्यालय से ऐसा कुछ नहीं हुआ है। जिस प्रेस विज्ञप्ति की बात की जा रही है, वह फर्जी है।”
— मनोज भास्कर
कार्यपालन यंत्री, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग, मंडला
“हस्ताक्षर पंजी में बिना हस्ताक्षर के वेतन का भुगतान किया जा रहा है। जल जीवन मिशन के तहत भारी मात्रा में यात्रा भत्ते का भुगतान किया गया है। मेरे द्वारा कलेक्टर एवं संबंधित अधिकारियों को शिकायत भी की गई है। जांच में सच सामने आ जाएगा।”
— राजीव उसराठे
पूर्व संभागीय अध्यक्ष, मध्यप्रदेश टेक्नीशियन तकनीकी अनुपालन समिति
निष्पक्ष जांच से ही स्पष्ट होगी वास्तविक स्थिति
शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों और कार्यपालन यंत्री के खंडन के बाद मामले में अभिलेखों की निष्पक्ष जांच महत्वपूर्ण हो गई है।
जांच में संबंधित कर्मचारियों की उपस्थिति पंजी, वेतन भुगतान के स्वीकृति आदेश, बैंक भुगतान विवरण, यात्रा भत्ता दावे, यात्रा अनुमोदन, माप पुस्तिकाओं और संबंधित बिलों का मिलान किया जा सकता है।
इसके साथ ही शिकायतकर्ता द्वारा बताए गए पत्रों की प्रामाणिकता और उन पर की गई कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट करना भी जरूरी है।
जांच में इन सवालों के जवाब जरूरी
- संबंधित महिला जिला सलाहकार की वास्तविक उपस्थिति और कार्यस्थल क्या था?
- अप्रैल 2025 में वेतन रोके जाने का कोई आधिकारिक आदेश जारी हुआ था या नहीं?
- यदि वेतन रोका गया था, तो उसके बाद भुगतान किस आदेश के आधार पर हुआ?
- अन्य कर्मचारियों के वेतन भुगतान और उपस्थिति अभिलेखों में क्या स्थिति दर्ज है?
- जल जीवन मिशन के यात्रा भत्ता भुगतान के समर्थन में कौन-कौन से दस्तावेज उपलब्ध हैं?
- माप पुस्तिकाओं और बिलों से संबंधित आरोपों में कितनी सत्यता है?
- शिकायतकर्ता द्वारा बताए गए पत्रों पर विभाग ने क्या कार्रवाई की?
सरकारी धन के भुगतान में पारदर्शिता बनाए रखना विभागीय अधिकारियों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। यदि शिकायतों की जांच में अनियमितता सामने आती है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। वहीं, आरोप निराधार पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की स्थिति भी स्पष्ट की जानी चाहिए।
आरोप और खंडन के बीच बड़ा सवाल—क्या अभिलेखों की जांच से सामने आएगा सच?
मंडला PHE विभाग में वेतन, उपस्थिति और यात्रा भत्ता भुगतान को लेकर उठे सवालों का समाधान प्रमाणित रिकॉर्ड और निष्पक्ष जांच से ही संभव है।
संपादकीय टिप्पणी: समाचार शिकायतकर्ता के आरोपों और संबंधित कार्यपालन यंत्री के उपलब्ध खंडन पर आधारित है। कथित वित्तीय अनियमितताओं, पत्रों की प्रामाणिकता तथा कर्मचारियों की अनुपस्थिति की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। किसी भी व्यक्ति या अधिकारी को जांच के बिना दोषी नहीं माना जा सकता।

