MP News: प्रोबेशन पीरियड पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, 70%, 80% और 90% वेतन की व्यवस्था निरस्त
सरकारी कर्मचारियों को बड़ी राहत, हाईकोर्ट ने कहा—पूरा काम लिया जा रहा है तो प्रोबेशन के नाम पर कम वेतन देने का औचित्य नहीं
25 नवंबर 2019 के बाद नियुक्त संबंधित कर्मचारियों को प्रोबेशन अवधि के कार्य का पूरा वेतन देने का निर्देश, सरकारी मेमो भी निरस्त
डिवीजन बेंच ने सुनाया महत्वपूर्ण फैसला
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की डिवीजन बेंच ने 8 सितंबर 2026 को समान मुद्दे से जुड़ी कई रिट याचिकाओं पर साझा आदेश पारित किया।
कोर्ट ने निर्देश दिया कि 25 नवंबर 2019 के बाद नियुक्त संबंधित शासकीय कर्मचारियों को प्रोबेशन अवधि में किए गए कार्य का पूरा वेतन दिया जाए।
पहला वर्ष — न्यूनतम वेतनमान का 70 प्रतिशत, यानी 30 प्रतिशत कम।
दूसरा वर्ष — 80 प्रतिशत, यानी 20 प्रतिशत कम।
तीसरा वर्ष — 90 प्रतिशत, यानी 10 प्रतिशत कम वेतन दिया जाता था।
पूरा काम तो पूरा वेतन क्यों नहीं? हाईकोर्ट ने उठाया सवाल
हाईकोर्ट ने व्यवस्था से जुड़े नियमों और सर्कुलर को निरस्त करते हुए इस तथ्य को महत्वपूर्ण माना कि कर्मचारी निर्धारित भर्ती प्रक्रिया से चयनित होकर पद पर नियुक्त होता है और प्रोबेशन अवधि में भी उससे नियमित कर्मचारी की तरह पद के अनुरूप पूरा काम लिया जाता है।
ऐसी स्थिति में केवल प्रोबेशन अवधि का हवाला देकर निर्धारित वेतनमान से कम भुगतान किए जाने को अदालत ने उचित नहीं माना।
स्वास्थ्य विभाग में पदस्थ 21 कर्मचारियों ने सरकार की इस व्यवस्था को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता अंशुल तिवारी और अधिवक्ता अभिषेक पांडेय ने पैरवी की।
कक्षा-III और कक्षा-IV कर्मचारियों के प्रति भेदभावपूर्ण माना
कोर्ट ने माना कि कर्मचारी जिस पद पर नियुक्त हुआ है, उसके अनुरूप उससे काम लिया जा रहा है। ऐसे में उसे निर्धारित वेतनमान से कम भुगतान करने का उचित आधार नहीं है। कोर्ट ने इस व्यवस्था को कक्षा-III और कक्षा-IV कर्मचारियों के संदर्भ में भेदभावपूर्ण भी माना।
‘स्टाइपेंड’ के नाम पर कम वेतन देने पर भी सवाल
मामले में यह तर्क भी रखा गया कि 70, 80 और 90 प्रतिशत भुगतान को स्टाइपेंड बताने का स्पष्ट वैधानिक आधार नहीं है। भर्ती नियमों में निर्धारित पे-स्केल से कम वेतन सामान्य स्थिति में नहीं दिया जा सकता।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि सेवा नियमों के तहत इंक्रीमेंट रोकने अथवा अन्य निर्धारित कार्रवाई के प्रावधान हो सकते हैं, लेकिन वेतनमान को मनमाने तरीके से न्यूनतम स्तर से नीचे नहीं किया जा सकता।
हाईकोर्ट ने 25 नवंबर 2019 के उस मेमो को भी निरस्त कर दिया, जिसके आधार पर प्रोबेशन अवधि में 70%, 80% और 90% वेतन भुगतान की व्यवस्था लागू की गई थी।
किन कर्मचारियों को मिलेगा फैसले का लाभ?
फैसले का सीधा प्रभाव उन संबंधित सरकारी कर्मचारियों पर पड़ेगा, जिन्हें 25 नवंबर 2019 के बाद नियुक्त किया गया था और प्रोबेशन अवधि में 70%, 80% और 90% के आधार पर भुगतान किया गया।
हाईकोर्ट ने ऐसे संबंधित कर्मचारियों को प्रोबेशन अवधि में किए गए कार्य का पूरा वेतन दिए जाने के निर्देश दिए हैं।
फैसले के बाद प्रभावित कर्मचारियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण सवाल प्रोबेशन अवधि में मिले कम वेतन और पूर्ण वेतन के बीच अंतर राशि के भुगतान का है। आदेश का क्रियान्वयन किस प्रक्रिया से होगा, यह शासन स्तर पर होने वाली आगामी कार्रवाई से और स्पष्ट होगा।
प्रोबेशन अवधि में 70%, 80% और 90% वेतन की व्यवस्था निरस्त होने का फैसला मध्यप्रदेश के संबंधित सरकारी कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण है। अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि आदेश के पालन और प्रभावित कर्मचारियों को देय राशि के भुगतान के लिए शासन क्या प्रक्रिया अपनाता है।
