नर्मदा कछार में अवैध शराब के अड्डों पर आबकारी का ताबड़तोड़ वार
1600 किलो महुआ लाहन नष्ट, 110 लीटर कच्ची शराब जब्त; आबकारी टीम को देखते ही आरोपी फरार
रेवांचल टाइम्स, मंडला। जिले में अवैध शराब के निर्माण और बिक्री के खिलाफ आबकारी विभाग ने एक बार फिर बड़ी कार्रवाई की है। मंडला वृत के अंतर्गत रामनगर में नर्मदा नदी के किनारे कछार क्षेत्र में कथित अवैध शराब निर्माण के ठिकानों पर आबकारी अमले ने दबिश देकर भारी मात्रा में महुआ लाहन और हाथ भट्टी से तैयार कच्ची शराब बरामद की।
160 डब्बों में मिला लाहन, मौके पर किया नष्ट
कार्रवाई के दौरान आबकारी टीम को करीब 160 डब्बे महुआ लाहन से भरे मिले। प्रत्येक डब्बे में लगभग 10 किलो महुआ लाहन भरा हुआ था। इस हिसाब से करीब 1600 किलो महुआ लाहन मौके पर बरामद हुआ।
विभागीय अमले ने लाहन को घटनास्थल पर ही नष्ट कर दिया, ताकि इससे दोबारा अवैध शराब तैयार न की जा सके। इसके साथ ही शराब निर्माण में इस्तेमाल किए जा रहे बर्तन और अन्य सामग्री को भी मौके पर नष्ट किया गया।
बड़ी मात्रा में महुआ लाहन मिलने से संकेत मिलता है कि यहां शराब निर्माण की तैयारी छोटे स्तर तक सीमित नहीं थी।
110 लीटर हाथ भट्टी कच्ची शराब जब्त
दबिश के दौरान आबकारी टीम ने 110 लीटर हाथ भट्टी से निर्मित कच्ची शराब भी जब्त की। विभाग ने संबंधित सामग्री को कब्जे में लेते हुए अवैध शराब निर्माण के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की।
टीम को देखते ही आरोपी फरार
कार्रवाई के दौरान आबकारी बल को देखकर अवैध शराब निर्माण में कथित रूप से शामिल लोग मौके से फरार हो गए। विभाग द्वारा फरार आरोपियों की तलाश की जा रही है।
मामले में अज्ञात आरोपियों के विरुद्ध कुल तीन प्रकरण पंजीबद्ध किए गए हैं।
असली चुनौती—अड्डे दोबारा न पनपें
विभागीय कार्रवाई के बाद अब सबसे बड़ी चुनौती ऐसे अवैध अड्डों को दोबारा पनपने से रोकने की है। केवल लाहन नष्ट करने और शराब जब्त करने से समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं होगा।
अवैध शराब निर्माण की पूरी श्रृंखला तक पहुंचना, इसमें शामिल लोगों की पहचान करना और कच्चे माल की आपूर्ति से लेकर बिक्री तक के नेटवर्क का पता लगाना भी आवश्यक होगा।
कार्रवाई में यह अमला रहा मौजूद
प्रभारी आरक्षक: विजय कमलेश
अन्य अमला: शकुंतला सैयाम, कन्हैया उइके एवं नेतराम काकोटिया सहित आबकारी टीम मौजूद रही।
भारी मात्रा में लाहन और कच्ची शराब मिलने के बाद आबकारी विभाग की यह कार्रवाई बड़ी मानी जा रही है। अब निगाह इस बात पर होगी कि फरार आरोपियों की पहचान और पूरे नेटवर्क तक पहुंचने में विभाग कितनी तेजी दिखाता है।
