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वेतन के लिए तरसता कर्मचारी, ₹70 हजार ‘कमीशन’ मांगने के आरोप से गरमाया मामला

दैनिक रेवांचल टाइम्स | भुआ-बिछिया
नगर परिषद भुआ-बिछिया का मामला

वेतन के लिए तरसता कर्मचारी, ₹70 हजार ‘कमीशन’ मांगने के आरोप से गरमाया मामला

महीनों से वेतन अटका होने का दावा; रुका वेतन दिलाने के नाम पर पार्षद पर गंभीर आरोप, परिषद में कथित बिचौलियों की भूमिका पर भी उठे सवाल

दैनिक रेवांचल टाइम्स – भुआ-बिछिया। नगर परिषद भुआ-बिछिया में कर्मचारियों के वेतन भुगतान और कथित बिचौलियों की भूमिका को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि परिषद में कुछ कार्य सीधे होने के बजाय कथित मध्यस्थों और जनप्रतिनिधियों के माध्यम से कराए जाने की प्रवृत्ति बढ़ी है। इसी बीच एक कर्मचारी का वेतन महीनों से लंबित होने और उसे दिलाने के नाम पर एक पार्षद द्वारा कथित तौर पर 70 हजार रुपये मांगने का आरोप सामने आया है।



⚠️ आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं इस मामले में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हो सकी है। संबंधित पार्षद और नगर परिषद प्रशासन का पक्ष सामने आना बाकी है।

मेहनत की कमाई के लिए दफ्तरों के चक्कर

बताया जा रहा है कि नगर परिषद में कार्यरत एक लिपिक को लंबे समय से वेतन नहीं मिला है। कर्मचारी पक्ष का दावा है कि जिस वेतन से उसका परिवार चलता है, उसी रकम के लिए उसे महीनों से इंतजार करना पड़ रहा है।

सवाल सीधा है—
जब कर्मचारी अपना काम समय पर कर रहा है तो उसे अपने ही वेतन के लिए अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के चक्कर क्यों लगाने पड़ रहे हैं?

वेतन किसी कर्मचारी पर किया जाने वाला एहसान नहीं, बल्कि उसके काम के बदले मिलने वाला उसका अधिकार है। ऐसे में भुगतान में अनावश्यक देरी नगर परिषद की प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है।

वेतन दिलाने के नाम पर ₹70 हजार की मांग?

मामले को और गंभीर बनाता है एक पार्षद पर लगाया जा रहा कथित आरोप। कर्मचारी पक्ष से सामने आई जानकारी के अनुसार रुका हुआ वेतन दिलाने के नाम पर 70 हजार रुपये की मांग किए जाने की बात कही जा रही है।

आरोप है कि कर्मचारी से कहा गया कि रकम देने के बाद उसका रुका हुआ वेतन निकलवा दिया जाएगा। यदि यह आरोप जांच में सही पाया जाता है तो सवाल केवल 70 हजार रुपये का नहीं रहेगा, बल्कि यह भी होगा कि क्या किसी कर्मचारी को अपना वैधानिक वेतन पाने के लिए कथित कमीशन देना पड़ेगा?

गंभीर आरोप, निष्पक्ष जांच जरूरी

आरोप की सत्यता जांच का विषय है। इसलिए संबंधित कर्मचारी, पार्षद और परिषद प्रशासन के बयान दर्ज कर वास्तविक स्थिति सामने लाई जानी चाहिए।

मुख्य नगर पालिका अधिकारी की भूमिका पर भी सवाल

पूरे मामले में मुख्य नगर पालिका अधिकारी की भूमिका और नगर परिषद की वेतन भुगतान प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। कर्मचारी का भुगतान किस स्तर पर अटका है, कितने कर्मचारियों का वेतन लंबित है और देरी का वास्तविक कारण क्या है, इसकी स्थिति परिषद प्रशासन को स्पष्ट करनी चाहिए।

परिषद से उठते प्रमुख सवाल
◆ कर्मचारी का वेतन किस कारण रोका गया?
◆ भुगतान किस स्तर पर लंबित है?
◆ कितने कर्मचारी वेतन की प्रतीक्षा कर रहे हैं?
◆ यदि कोई तकनीकी या वित्तीय अड़चन है तो उसकी जानकारी क्यों नहीं दी गई?

परिषद में कथित ‘बिचौलियों’ की भूमिका पर भी उठे सवाल

नगर परिषद कार्यालय में कुछ लोगों की कथित मध्यस्थ भूमिका को लेकर भी आरोप सामने आए हैं। दावा किया जा रहा है कि हितग्राही मूलक कार्यों से लेकर कर्मचारी संबंधी मामलों तक में कुछ अनधिकृत लोगों का हस्तक्षेप दिखाई देता है।

हालांकि इन आरोपों की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए प्रशासनिक जांच से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि परिषद के कामकाज में किसी बाहरी अथवा अनधिकृत व्यक्ति का हस्तक्षेप है या नहीं।

गरीब कर्मचारी की जेब पर किसकी नजर? एक तरफ कर्मचारी महीनों से वेतन नहीं मिलने का दावा कर रहा है और परिवार चलाना मुश्किल बता रहा है, वहीं दूसरी तरफ उसी वेतन से कथित कमीशन मांगने का आरोप सामने आना मामले को और गंभीर बनाता है।
क्या वेतन भुगतान भी अब किसी की कृपा या कथित कमीशन पर निर्भर होगा?

जिला प्रशासन से निष्पक्ष जांच की अपेक्षा

मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन और नगरीय प्रशासन विभाग से अपेक्षा है कि वेतन भुगतान की प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच कराई जाए। यदि किसी कर्मचारी का वेतन बिना उचित कारण रोका गया है तो जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।

वहीं यदि किसी जनप्रतिनिधि द्वारा वेतन दिलाने के नाम पर राशि मांगने का आरोप जांच में सही पाया जाता है, तो संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

CMO राजेश मार्को से संपर्क की कोशिश, कॉल रिसीव नहीं

नगर परिषद भुआ-बिछिया में कथित बिचौलियों की भूमिका और लंबित वेतन के मामले में आधिकारिक पक्ष जानने के लिए दैनिक रेवांचल टाइम्स की टीम ने मुख्य नगर पालिका अधिकारी राजेश मार्को से दूरभाष पर संपर्क करने का प्रयास किया। फोन की घंटी बजती रही, लेकिन कॉल रिसीव नहीं होने के कारण उनका पक्ष प्राप्त नहीं हो सका।

संबंधित पार्षद और नगर परिषद प्रशासन का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

अब सवाल सीधा है...

कर्मचारी को उसकी मेहनत का लंबित पैसा मिलेगा या वेतन के रास्ते में कथित कमीशन के आरोप और प्रशासनिक सवाल बने रहेंगे? जवाब अब जांच और नगर परिषद की आधिकारिक स्थिति से ही सामने आएगा।

नोट: खबर में उल्लेखित कमीशन और बिचौलियों से संबंधित बातें आरोप एवं दावों पर आधारित हैं। इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित पक्षों का जवाब मिलने पर उसे भी प्रकाशित किया जाएगा।
दैनिक रेवांचल टाइम्स

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