राष्ट्रीय करमाडार पूजन एवं करमा महोत्सव सम्पन्न
गोंडी धर्म, संस्कृति, भाषा और परंपराओं के संरक्षण का गूंजा संदेश
मण्डला। भादों उजियारी पक्ष एकादशी के अवसर पर गोंडवाना गुरुदेव दुर्गे भगत सिदार गुरुदादा एवं गुरुमाता दाई दुर्गे दुलेश्वरी की प्रेरणा और मार्गदर्शन में मण्डला के पुलिस मैदान में राष्ट्रीय करमाडार पूजन एवं करमा महोत्सव का दो दिवसीय आयोजन किया गया। कार्यक्रम में गोंडी धर्म, संस्कृति, भाषा, रीति-रिवाज और पारंपरिक पहचान के संरक्षण पर विशेष जोर दिया गया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में मध्यप्रदेश शासन की लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री संपतिया उइके शामिल हुईं। आयोजकों के अनुसार उन्होंने अपना संबोधन गोंडी भाषा में दिया और समाज से अपनी मूल भाषा, संस्कृति एवं परंपराओं को संरक्षित रखने का आह्वान किया।
“भाषा नदी की धारा की तरह है, जिसमें प्रेम का बहाव होता है और वह लोगों को आपस में जोड़े रखती है।”
प्रकृति के प्रति आस्था का संदेश
गोंडी धर्म संस्कृति संरक्षण समिति के प्रदेश संयोजक दिलीप सैयाम ने आयोजन के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गोंड आदिवासी समाज प्रकृति की शक्तियों—भूमि, आकाश, हवा, जल और अग्नि—के प्रति आस्था रखता है। उन्होंने आयोजन को सामाजिक सद्भावना, सांस्कृतिक जागरूकता और पारंपरिक पहचान के संरक्षण के लिए समर्पित बताया।
संरक्षण का संदेश
परंपराओं पर जोर
एकजुटता का संदेश
संस्कृति और पहचान को बचाए रखने का संकल्प
कार्यक्रम में बिछिया विधायक नारायण सिंह पट्टा, निवास विधायक चैन सिंह वरकड़े, जिला पंचायत अध्यक्ष संजय कुशराम, जनपद अध्यक्ष मंडला संतोष सोनू भलावी सहित अन्य अतिथियों ने भी विचार रखे। वक्ताओं ने आदिवासी समाज की भाषा, सांस्कृतिक अस्मिता, पारंपरिक पहचान और गौरवशाली इतिहास को भावी पीढ़ियों के लिए संरक्षित रखने की आवश्यकता बताई।
आयोजन में यह संदेश भी दिया गया कि संस्कृति और पहचान के संरक्षण के प्रयास किसी अन्य धर्म, भाषा, संस्कृति, जाति अथवा समुदाय के विरोध में नहीं, बल्कि अपनी पारंपरिक विरासत को सहेजने के उद्देश्य से हैं।
बड़ी संख्या में समाजजन रहे उपस्थित
कार्यक्रम का संचालन जिला पंचायत कृषि स्थायी समिति के सभापति भूपेंद्र वरकड़े ने किया। आयोजन में शैलेश मिश्रा, केएस नेताम, दिलीप सैयाम, मनोज मंडावी, प्रकाश नेताम, धर्मेश उइके, नीरज अग्रवाल, अशोक सरोते, झुन्नी सोयाम, लोक सिंह मरकाम, सुग्रीव मरावी और दिलीप भगदीया सहित गोंडी धर्म संस्कृति संरक्षण समिति से जुड़े पदाधिकारी एवं समाजजन उपस्थित रहे।
राष्ट्रीय करमाडार पूजन एवं करमा महोत्सव में पारंपरिक पहचान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने पर रहा जोर
नोट: कार्यक्रम में दिए गए विचार एवं संकल्प संबंधित वक्ताओं और आयोजकों के कथन पर आधारित हैं।
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