मुगदारा पंचायत में CC सड़क निर्माण पर गंभीर सवाल, अधूरे काम को पूरा बताकर 11.47 लाख भुगतान का आरोप
ग्रामीण ने कलेक्टर और जिला पंचायत CEO को सौंपी लिखित शिकायत; दूसरी सड़क के नाम पर भी करीब 4 लाख रुपए की निकासी का आरोप, रिकॉर्ड और मौके की जांच की मांग
दैनिक रेवांचल टाइम्स | मंडला। जनपद पंचायत नैनपुर की ग्राम पंचायत मुगदारा में सीसी सड़क निर्माण कार्यों और उनके भुगतान को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। ग्रामीण दुर्गेश यादव ने जिला कलेक्टर एवं जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी के समक्ष लिखित शिकायत प्रस्तुत कर पंचायत के सरपंच एवं सचिव पर निर्माण कार्यों में कथित अनियमितता और शासकीय राशि के भुगतान को लेकर सवाल उठाए हैं।
शिकायतकर्ता ने मांग की है कि निर्माण कार्यों का मौके पर भौतिक सत्यापन कराने के साथ संबंधित सरकारी अभिलेखों की जांच की जाए और यदि शिकायत में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदारी तय कर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
अधूरा काम, पूरी राशि निकालने का आरोप
शिकायत में कहा गया है कि हिमाद्रि बाई के घर से भड़िया तक सीसी सड़क निर्माण के साथ पानी निकासी के लिए नाली निर्माण भी प्रस्तावित था। शिकायतकर्ता के अनुसार मौके पर न तो पूरी लंबाई में सड़क बनाई गई और न ही प्रस्तावित नाली का काम पूर्ण किया गया।
इसके बावजूद शिकायत में आरोप लगाया गया है कि निर्माण कार्य के लिए स्वीकृत करीब 11.47 लाख रुपए की राशि का भुगतान कर कार्य को पूर्ण दर्शा दिया गया।
यदि जांच में ये आरोप सही पाए जाते हैं तो मामला केवल अधूरे निर्माण तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि माप पुस्तिका, कार्य पूर्णता प्रमाण-पत्र, भौतिक सत्यापन और भुगतान की पूरी प्रक्रिया भी जांच के दायरे में आ सकती है।
दूसरी सड़क पर भी सवाल, करीब चार लाख रुपए की निकासी का आरोप
शिकायतकर्ता ने ग्राम पंचायत के एक अन्य निर्माण कार्य को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। शिकायत में अल्ली यादव के मकान के पास से माध्यमिक शाला तिराहा तक सड़क निर्माण कार्य स्वीकृत होने की बात कही गई है।
आरोप है कि मौके पर अपेक्षित निर्माण कार्य नहीं कराया गया, लेकिन वर्ष 2020 में अधूरे निर्माण के नाम पर करीब चार लाख रुपए का आहरण किया गया। इस आरोप की भी फिलहाल स्वतंत्र या आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।
कागज और जमीन का मिलान हुआ तो सामने आएगी वास्तविक स्थिति
शिकायतकर्ता का कहना है कि दोनों निर्माण कार्यों से संबंधित प्रशासकीय स्वीकृति, तकनीकी स्वीकृति, कार्यादेश, माप पुस्तिका (MB), बिल-वाउचर, भुगतान विवरण, सामग्री खरीदी के दस्तावेज, जियो-टैग फोटो और कार्य पूर्णता प्रमाण-पत्र की जांच कराई जानी चाहिए।
इसके साथ ही मौके पर तकनीकी अधिकारियों की टीम भेजकर सड़क की लंबाई, चौड़ाई, मोटाई और नाली निर्माण का भौतिक सत्यापन कराया जाए। अभिलेखों और मौके की स्थिति का मिलान होने पर ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि शिकायत में लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है।
माप पुस्तिका और कार्य पूर्णता प्रमाण-पत्र भी जांच के केंद्र में
पंचायत स्तर के निर्माण कार्यों में भुगतान से पहले कार्य की मात्रा और गुणवत्ता के तकनीकी सत्यापन की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ऐसे में यदि मौके की वास्तविक स्थिति और सरकारी रिकॉर्ड में अंतर पाया जाता है तो यह देखना जरूरी होगा कि माप पुस्तिका में माप किस आधार पर दर्ज किए गए और कार्य पूर्णता संबंधी दस्तावेज किस प्रक्रिया के तहत तैयार किए गए।
शिकायत में उठाए गए आरोपों की सत्यता जानने के लिए भुगतान रिकॉर्ड और निर्माण से जुड़े दस्तावेजों के साथ मौके की वास्तविक स्थिति का मिलान महत्वपूर्ण होगा।
पंचायतों में विकास कार्यों की निगरानी पर भी सवाल
मुगदारा पंचायत से जुड़ी शिकायत ने ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायतों के माध्यम से कराए जाने वाले निर्माण कार्यों की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए हैं। सड़क, नाली, भवन और दूसरे विकास कार्यों के लिए शासन की राशि खर्च होती है। ऐसे में स्वीकृत कार्य और मौके पर हुए वास्तविक निर्माण के बीच अंतर की शिकायत सामने आने पर समयबद्ध जांच आवश्यक हो जाती है।
यह भी महत्वपूर्ण है कि निर्माण की गुणवत्ता और भुगतान प्रक्रिया की निगरानी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका क्या रही। यदि किसी कार्य की वास्तविक भौतिक स्थिति और अभिलेखों में दर्ज स्थिति अलग पाई जाती है तो जवाबदेही किस स्तर पर तय होगी, यह जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकता है।
अब प्रशासन की जांच और कार्रवाई पर नजर
फिलहाल शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। इसलिए सरपंच, सचिव अथवा अन्य संबंधित व्यक्तियों की जिम्मेदारी का निष्कर्ष जांच से पहले निकालना उचित नहीं होगा।
अब निगाह जिला प्रशासन पर है कि शिकायत के आधार पर मौके का भौतिक सत्यापन और पंचायत के वित्तीय एवं तकनीकी अभिलेखों की जांच कब कराई जाती है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि जांच में तथ्य सामने आने के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
