कब तक लटका रहेगा मिड डे मील का भुगतान?
शिक्षा सत्र शुरू हुए महीनों बीते, भुगतान के इंतजार में भोजन समूह—सरकार की बेरुखी से बढ़ रहा आक्रोश
मंडला जिले में स्कूली बच्चों के लिए संचालित मध्याह्न भोजन योजना इन दिनों भुगतान की लेटलतीफी से जूझती नजर आ रही है। शिक्षा सत्र की शुरुआत से ही भोजन समूहों को भुगतान नहीं मिलने की शिकायतें सामने आ रही हैं।
सवाल यह है कि बच्चों के भोजन का पैसा आखिर कब जारी होगा और समूह कब तक अपनी जेब से व्यवस्था संभालते रहेंगे?
बताया जा रहा है कि भुगतान लंबित होने के कारण मध्याह्न भोजन संचालित करने वाले समूह आर्थिक परेशानी का सामना कर रहे हैं। खाद्य सामग्री, रसोई व्यवस्था और अन्य आवश्यक खर्चों को लेकर समूहों पर लगातार दबाव बढ़ रहा है।
अपनी जेब से व्यवस्था संभाल रहे समूह
योजना को धरातल पर चलाने की जिम्मेदारी भोजन समूहों के कंधों पर है। बच्चों के लिए प्रतिदिन भोजन तैयार करना, खाद्य सामग्री जुटाना और रसोई से जुड़े खर्च पूरे करना उनकी नियमित जिम्मेदारी है।
भुगतान समय पर नहीं मिलने से समूहों को उधारी या स्वयं के संसाधनों से व्यवस्था जारी रखने की स्थिति बन रही है, जिससे उनकी आर्थिक परेशानी बढ़ती जा रही है।
भोजन व्यवस्था पर भी पड़ सकता है असर
मध्याह्न भोजन योजना का उद्देश्य स्कूल आने वाले बच्चों को नियमित और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना है। लेकिन जब योजना से जुड़े समूहों को समय पर भुगतान नहीं मिलेगा तो व्यवस्था को लगातार सुचारू बनाए रखना उनके लिए चुनौती बनना स्वाभाविक है।
भुगतान में लगातार देरी हुई तो इसका सीधा असर स्कूलों में संचालित भोजन व्यवस्था पर पड़ने की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता।
समूहों में बढ़ रहा आक्रोश
भुगतान अटकने से भोजन समूहों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। समूह संचालकों का कहना है कि शासन की योजना को जमीन पर संचालित करने की जिम्मेदारी उन्हें दी गई है, लेकिन समय पर भुगतान नहीं होने से आर्थिक संकट झेलना पड़ रहा है।
समूहों की मांग है कि लंबित भुगतान तत्काल जारी किया जाए, ताकि बच्चों के भोजन की व्यवस्था किसी भी तरह से प्रभावित न हो।
सवाल सीधा है...
जब बच्चों के भोजन की योजना सरकार की प्राथमिकता है, तो इस योजना को संचालित करने वाले समूहों का भुगतान प्राथमिकता क्यों नहीं?
भुगतान तत्काल जारी करने की जरूरत
शासन को इस मामले में तत्काल संज्ञान लेकर लंबित भुगतान जारी करना चाहिए, ताकि भोजन समूहों पर आर्थिक दबाव कम हो और बच्चों की भोजन व्यवस्था निर्बाध रूप से चलती रहे।
योजना की सफलता केवल बजट आवंटन से नहीं, बल्कि समय पर भुगतान और धरातल पर उसके सुचारू संचालन से तय होगी।
