सत्र के बीच युक्तियुक्तकरण पर बवाल: बेरपानी और रतनपुर चौकी के पालक पहुंचे कलेक्टर-सहायक आयुक्त के पास
बेरपानी में शिक्षकों की कमी और रतनपुर चौकी में प्राचार्य को हटाने पर उठे सवाल; पालकों ने 15 सितंबर को सौंपा ज्ञापन, पढ़ाई प्रभावित होने की जताई चिंता
दैनिक रेवांचल टाइम्स | मंडला। शिक्षा सत्र के बीच लागू की जा रही युक्तियुक्तकरण एवं अटैचमेंट समाप्ति की प्रक्रिया को लेकर जिले के कुछ क्षेत्रों में पालकों और ग्रामीणों की नाराजगी सामने आई है। ग्राम बेरपानी और नारायणगंज क्षेत्र के रतनपुर चौकी से पहुंचे पालकों एवं क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों ने 15 सितंबर को कलेक्टर और सहायक आयुक्त, जनजातीय कार्य विभाग मंडला के समक्ष अपनी समस्याएं रखकर ज्ञापन सौंपा।
पालकों का कहना है कि सत्र के बीच शिक्षकीय व्यवस्था में बदलाव होने से बच्चों की पढ़ाई और अधूरे पाठ्यक्रम पर असर पड़ सकता है। ग्रामीणों के मुताबिक सहायक आयुक्त ने उनकी समस्या सुनकर समाधान के प्रयास का आश्वासन दिया है।
बेरपानी: शिक्षकों की कमी के बीच नई व्यवस्था से बढ़ी चिंता
पालकों के अनुसार बरगी बांध विस्थापितों का ग्राम बेरपानी जंगल क्षेत्र में बसा करीब एक हजार आबादी वाला आदिवासी बहुल गांव है। यहां संचालित शासकीय एकीकृत माध्यमिक शाला बेरपानी, डाइस कोड 23421403702 में 111 विद्यार्थी दर्ज बताए गए हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि स्कूल में पहले से शिक्षकों की कमी है और किसी तरह अटैचमेंट तथा अतिथि शिक्षकों के माध्यम से पढ़ाई संचालित हो रही थी। पालकों के अनुसार गणित विषय के लिए लंबे समय तक शिक्षक नहीं था। बाद में शिक्षक अवध बिहारी के आने से बच्चों की गणित में रुचि बढ़ी।
पालकों का दावा है कि अब संबंधित शिक्षक को मूल शाला में भेजे जाने की प्रक्रिया से स्कूल की शिक्षकीय व्यवस्था फिर प्रभावित हो सकती है। उनका कहना है कि यदि उपलब्ध शिक्षक कम हो जाते हैं तो बच्चों का पाठ्यक्रम पूरा कराना मुश्किल हो सकता है।
रतनपुर चौकी: प्राचार्य को हटाने के फैसले पर पालकों की आपत्ति
दूसरा मामला एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय रतनपुर चौकी, नारायणगंज से जुड़ा है। पालकों के अनुसार विद्यालय में करीब 400 आवासीय विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। उन्होंने सत्र के बीच प्राचार्य मनोज कुमार को हटाए जाने पर आपत्ति जताई है।
पालकों का कहना है कि सत्र के बीच प्राचार्य बदलने से विद्यार्थियों की पढ़ाई के साथ आवासीय विद्यालय की भोजन, अनुशासन और अन्य व्यवस्थाओं पर असर पड़ सकता है।
पालकों ने प्राचार्य के खिलाफ लगाए गए आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए उनकी बहाली की मांग की है। साथ ही आरोपों की जांच पीटीए के समक्ष निष्पक्ष रूप से कराने की मांग रखी गई है।
पालक महासंघ ने भी उठाए सवाल
पालक महासंघ मंडला ने भी सत्र के बीच व्यवस्था में किए जा रहे बदलावों पर आपत्ति जताई है। महासंघ का कहना है कि किसी भी प्रशासनिक निर्णय में सबसे पहले विद्यार्थियों की पढ़ाई और शैक्षणिक हित को ध्यान में रखा जाना चाहिए।
महासंघ ने मांग की है कि ऐसी व्यवस्था से बच्चों की पढ़ाई, अतिथि शिक्षकों के रोजगार और प्रभावित शिक्षकों की मानसिक स्थिति पर प्रतिकूल असर न पड़े। इसके लिए वर्तमान शिक्षा सत्र के दौरान जारी ऐसे आदेशों को ग्रीष्मकालीन अवकाश तक शिथिल करने पर विचार किया जाए।
बड़ा सवाल—नीति जरूरी, लेकिन बच्चों की पढ़ाई का क्या?
युक्तियुक्तकरण का उद्देश्य शिक्षकों की उपलब्धता और पदस्थापना में संतुलन स्थापित करना हो सकता है, लेकिन दूरस्थ स्कूलों में पहले से शिक्षकों की कमी होने की स्थिति में इसके क्रियान्वयन को लेकर पालकों की चिंताएं सामने आ रही हैं।
ऐसे में प्रशासन के सामने चुनौती यह है कि विभागीय नीति के पालन के साथ उन स्कूलों की पढ़ाई भी प्रभावित न हो, जहां सीमित शिक्षकीय व्यवस्था के सहारे शैक्षणिक सत्र चल रहा है।
