काई में फिसलता गांव, फाइलों में चमकता विकास! औघटखपरी की सड़क ने खड़े किए पंचायत पर सवाल
सड़क पर लंबे समय से जमी काई से फिसल रहे ग्रामीण और स्कूली बच्चे; पांच साल के कार्यकाल, रखरखाव और विकास कार्यों के रिकॉर्ड की जांच की उठी मांग
गांव के बीचों-बीच स्थित सड़क से नियमित आवागमन होता है। ऐसे में ग्रामीण पूछ रहे हैं कि फिसलन की समस्या लंबे समय से बनी हुई है तो सड़क की सफाई और जरूरी रखरखाव अब तक क्यों नहीं कराया गया?
सड़क पर काई, पंचायत में खामोशी!
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की नियमित सफाई, काई हटाने और आवश्यक रखरखाव की ओर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया। बारिश के दौरान समस्या और बढ़ जाती है। फिसलन के कारण विशेष रूप से बच्चों और बुजुर्गों के लिए आवागमन जोखिम भरा होने की बात कही जा रही है।
यदि पंचायत स्तर पर सड़क एवं सार्वजनिक रास्तों के रखरखाव के लिए कोई राशि स्वीकृत या खर्च की गई है, तो उसके रिकॉर्ड और मौके पर हुए कार्य का मिलान कर स्थिति स्पष्ट की जा सकती है।
पांच साल का कार्यकाल, फिर भी सड़क बेहाल
सरपंच का कार्यकाल करीब पांच वर्ष पूरा होने की ओर है। ऐसे में ग्रामीण पंचायत के विकास कार्यों और उनकी प्राथमिकताओं को लेकर सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि गांव के प्रमुख आवागमन मार्ग की स्थिति भी विकास कार्यों के मूल्यांकन का हिस्सा होनी चाहिए।
- पिछले पांच वर्षों में सड़क और रखरखाव पर कितनी राशि स्वीकृत हुई?
- सफाई अथवा मरम्मत के नाम पर कोई भुगतान हुआ या नहीं?
- यदि भुगतान हुआ तो वह किस मद से किया गया?
- काम किस एजेंसी अथवा व्यक्ति से कराया गया?
- क्या भुगतान से पहले कार्य का भौतिक सत्यापन हुआ?
पंचायतों में पारदर्शिता का दावा, जमीन पर उठ रहे सवाल
ग्रामीण क्षेत्रों में विभिन्न सरकारी योजनाओं और पंचायत निधियों से विकास एवं रखरखाव के कार्य कराए जाते हैं। औघटखपरी में ग्रामीणों की मांग है कि पंचायत के रिकॉर्ड और मौके पर हुए काम का मिलान किया जाए।
यदि सड़क की सफाई या मरम्मत के नाम पर पंचायत के अभिलेखों में कोई भुगतान दर्ज है तो यह देखा जाना चाहिए कि वास्तव में कितना काम हुआ। हालांकि सड़क की मौजूदा खराब स्थिति अपने-आप किसी वित्तीय अनियमितता को साबित नहीं करती। इसका निष्कर्ष दस्तावेजों और भौतिक सत्यापन के बाद ही निकाला जा सकता है।
भ्रष्टाचार की आशंका जता रहे ग्रामीण, प्रमाणित जांच की जरूरत
कुछ ग्रामीण पंचायत में हुए विकास कार्यों और सरकारी राशि के उपयोग को लेकर अनियमितता एवं भ्रष्टाचार की आशंका जताते हुए जांच की मांग कर रहे हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
मस्टर रोल, बिल-वाउचर, पंचायत प्रस्ताव, स्वीकृति आदेश, भुगतान रिकॉर्ड, कार्य पूर्णता प्रमाण-पत्र, तकनीकी मूल्यांकन और मौके पर हुए वास्तविक कार्य का मिलान किया जाए तो ग्रामीणों द्वारा उठाए जा रहे सवालों की स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
गांव के बीच समस्या, फिर भी समाधान का इंतजार
ग्रामीणों के मुताबिक समस्या किसी दूरदराज के रास्ते की नहीं बल्कि गांव के बीच की सड़क की है। ऐसे में पंचायत और संबंधित अधिकारियों से अपेक्षा है कि सुरक्षा की दृष्टि से सड़क का निरीक्षण कर फिसलन दूर करने के लिए तत्काल जरूरी कदम उठाए जाएं।
प्रशासन से ग्रामीणों के सात सीधे सवाल
- सड़क से काई हटाकर सफाई अब तक क्यों नहीं कराई गई?
- पंचायत ने समस्या को लेकर अब तक क्या कार्रवाई की?
- पांच वर्षों में सड़क एवं रखरखाव पर कितनी राशि खर्च हुई?
- किन विकास कार्यों के नाम पर भुगतान किया गया?
- क्या भुगतान और मौके के काम का भौतिक सत्यापन हुआ?
- पंचायत के निर्माण एवं विकास कार्यों का सोशल ऑडिट कब हुआ?
- फिसलन से गंभीर हादसा होने से पहले रास्ता सुरक्षित कौन करेगा?
विकास की असली तस्वीर सड़क पर भी दिखाई देनी चाहिए
औघटखपरी की सड़क का मामला फिलहाल सार्वजनिक सुरक्षा और रखरखाव से जुड़ा है। वहीं ग्रामीणों द्वारा विकास कार्यों के खर्च को लेकर उठाए गए सवाल अलग से दस्तावेजी जांच की मांग करते हैं।
सरकारी राशि जनता की होती है, इसलिए पंचायत में होने वाले खर्च का रिकॉर्ड और उसके बदले जमीन पर हुए कार्य में पारदर्शिता आवश्यक है। प्रशासन यदि पंचायत के अभिलेखों और मौके की स्थिति का निष्पक्ष मिलान कराए तो आरोपों और वास्तविकता के बीच की तस्वीर स्पष्ट हो सकती है।
सड़क पर फिसलते ग्रामीण तत्काल समाधान चाहते हैं। इसके साथ ही यदि रखरखाव और विकास के नाम पर राशि खर्च हुई है तो उसका रिकॉर्ड और जमीन पर हुआ काम सार्वजनिक कर स्थिति स्पष्ट क्यों न की जाए?
