अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस पर देशभर के प्रेरकों की आवाज बुलंद, रोजगार और सेवा बहाली की उठाई मांग
वर्षों तक गांव-गांव जाकर निरक्षरों को पढ़ाया, अब सरकार से मांगा सम्मानजनक रोजगार; पंचायत, स्कूल और शासकीय योजनाओं में अनुभव के आधार पर अवसर देने की अपील
गांव-गांव, घर-घर जाकर जगाई थी शिक्षा की अलख
मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान और छत्तीसगढ़ सहित विभिन्न राज्यों में चलाए गए साक्षरता अभियानों में प्रेरकों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। प्रेरकों का कहना है कि उन्होंने गांव-गांव और घर-घर पहुंचकर निरक्षर नागरिकों को साक्षर बनाने के साथ सर्वेक्षण, जनजागरूकता और विभिन्न सामाजिक गतिविधियों में भी जिम्मेदारी निभाई।
ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा के प्रति जागरूकता पैदा करने से लेकर ऐसे लोगों को अक्षर ज्ञान देने तक, जो किसी कारण से औपचारिक शिक्षा से वंचित रह गए थे, प्रेरकों ने लंबे समय तक जमीनी स्तर पर काम किया।
प्रेरकों का कहना है कि उन्होंने वर्षों तक बेहद कम मानदेय पर पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ साक्षरता अभियान की जिम्मेदारी निभाई। सेवा समाप्त होने के बाद बड़ी संख्या में पूर्व प्रेरक बेरोजगारी का सामना कर रहे हैं।
बढ़ती उम्र बनी चिंता, नए रोजगार के अवसर हो रहे सीमित
पूर्व प्रेरकों ने अपनी स्थिति बताते हुए कहा कि सेवा समाप्त हुए लंबा समय बीत चुका है। इस दौरान उनकी उम्र भी बढ़ी है और अब उनके लिए नए रोजगार के अवसर हासिल करना कठिन होता जा रहा है। ऐसे में सरकार को उनके पुराने अनुभव और सेवा को ध्यान में रखते हुए रोजगार की व्यवस्था करनी चाहिए।
प्रेरकों ने प्रधानमंत्री, विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों, मंत्रियों और जनप्रतिनिधियों से अपील की है कि साक्षरता अभियान में दिए गए उनके वर्षों के योगदान को देखते हुए उन्हें पुनः रोजगार का अवसर उपलब्ध कराया जाए।
सरकार के सामने रखीं ये चार प्रमुख मांगें
पहली मांग: योग्यता एवं अनुभव के आधार पर पंचायत स्तर पर BLO सहित अन्य उपयुक्त कार्यों में पूर्व प्रेरकों को अवसर दिया जाए।
दूसरी मांग: शासकीय विद्यालयों एवं अन्य सरकारी विभागों में उपलब्ध उपयुक्त पदों पर प्राथमिकता के आधार पर रोजगार अथवा समायोजन किया जाए।
तीसरी मांग: पंचायतों एवं विभिन्न शासकीय योजनाओं में पूर्व प्रेरकों के अनुभव और जमीनी स्तर पर काम करने की क्षमता का उपयोग किया जाए।
चौथी मांग: आगामी पंचायत एवं अन्य संबंधित भर्तियों में पूर्व प्रेरकों के अनुभव को ध्यान में रखते हुए उचित प्राथमिकता और अवसर प्रदान किया जाए।
'जिसने निरक्षर भारत को साक्षर बनाया, उसके परिवार को बेरोजगारी में न छोड़ें'
प्रेरक साथियों का कहना है कि यह केवल रोजगार की मांग नहीं, बल्कि उनके वर्षों के अनुभव और योगदान को सम्मान देने का विषय भी है। सरकार यदि विभिन्न योजनाओं में उनके अनुभव का उपयोग करती है तो इससे प्रेरकों को रोजगार मिलने के साथ जमीनी स्तर पर सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में भी उनके अनुभव का लाभ लिया जा सकेगा।
देशभर के साक्षर भारत एवं प्रौढ़ शिक्षा से जुड़े प्रेरकों ने सरकार से आग्रह किया है कि उनकी आवाज सुनी जाए और वर्षों तक साक्षरता अभियान में सेवा देने वाले पूर्व प्रेरकों के सम्मानजनक रोजगार तथा सुरक्षित भविष्य के लिए सकारात्मक निर्णय लिया जाए।

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