सड़क नई, व्यवस्था पुरानी! नाली निर्माण का मलबा सड़क पर, घुघरी में सिमट गया आवागमन का रास्ता
एमपीआरडीसी की ‘कछुआ चाल’ पर उठे सवाल; मिट्टी-पत्थरों से सड़क की उपयोगी चौड़ाई कम, बैरिकेडिंग और चेतावनी संकेत नहीं दिखने से रात में हादसे की आशंका
नाली की खुदाई से निकली मिट्टी, पत्थर और मलबा सड़क पर पड़े रहने से वाहन चालकों और राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
दैनिक रेवांचल टाइम्स, मंडला-घुघरी। तहसील मुख्यालय घुघरी में विकास के नाम पर चल रहा नाली निर्माण अब स्थानीय लोगों के लिए सुविधा से ज्यादा परेशानी का कारण बनता नजर आ रहा है। नव निर्मित सड़क के किनारे नाली बनाने के लिए खुदाई तो कर दी गई, लेकिन खुदाई से निकली मिट्टी, पत्थर और मलबा सड़क पर ही पड़ा हुआ है।
नतीजा यह है कि जिस सड़क को बेहतर आवागमन के उद्देश्य से बनाया गया था, उसी सड़क की उपयोगी चौड़ाई कई स्थानों पर कम हो गई है। कहीं मिट्टी फैली हुई है तो कहीं पत्थर और निर्माण सामग्री सड़क का हिस्सा घेरे हुए हैं।
सड़क किनारे दुकानों और खड़े वाहनों के बीच पहले से सीमित जगह में निर्माण सामग्री जमा होने के कारण वाहन चालकों को बची हुई जगह से निकलना पड़ रहा है।
वाह! विकास की ऐसी रफ्तार कि सड़क से पहले मलबा पहुंच गया!
घुघरी में निर्माण कार्य की मौजूदा तस्वीर जिम्मेदारों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रही है। सड़क बनाई गई, उसके किनारे नाली निर्माण शुरू हुआ और अब उसी सड़क पर मलबा डालकर लोगों को रास्ता तलाशने के लिए छोड़ दिया गया।
निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षित यातायात बनाए रखने की जिम्मेदारी किसकी है? क्या सड़क पर मिट्टी-पत्थर छोड़ देना सामान्य निर्माण प्रक्रिया है, या फिर निगरानी में लापरवाही बरती जा रही है?
दिन में किसी तरह रास्ता, रात में हादसे का खतरा
दिन के उजाले में वाहन चालक मलबे और खुदाई वाले हिस्सों को देखकर किसी तरह निकल सकते हैं, लेकिन रात में यही स्थिति ज्यादा जोखिमपूर्ण हो सकती है।
स्थानीय स्तर पर पर्याप्त चेतावनी संकेत, रिफ्लेक्टिव बैरिकेडिंग और सुरक्षित वैकल्पिक आवागमन जैसी व्यवस्थाओं की जरूरत महसूस की जा रही है।
◆ सड़क से अतिरिक्त मलबा तत्काल हटाया जाए
◆ खुदाई वाले हिस्से में मजबूत बैरिकेडिंग लगाई जाए
◆ रात के लिए रिफ्लेक्टिव चेतावनी संकेत लगाए जाएं
◆ वाहन चालकों के लिए पर्याप्त सुरक्षित रास्ता छोड़ा जाए
◆ निर्माण सामग्री को मुख्य सड़क से अलग रखा जाए
‘कछुआ चाल’ से काम, जनता बेहाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि नाली निर्माण की गति धीमी है और खुदाई के बाद मलबा लंबे समय तक वहीं पड़ा रहता है। इससे राहगीरों के साथ सड़क किनारे व्यवसाय करने वाले दुकानदारों को भी परेशानी हो रही है।
विकास कार्यों का उद्देश्य जनता को बेहतर सुविधा उपलब्ध कराना होता है, लेकिन यदि निर्माण के दौरान सुरक्षा और आवागमन की व्यवस्था ही बिगड़ जाए तो कार्यप्रणाली पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
एमपीआरडीसी और ठेकेदार की निगरानी पर सवाल
सड़क पर पड़े मलबे को लेकर एमपीआरडीसी और संबंधित निर्माण एजेंसी की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। निर्माण कार्य के दौरान यातायात सुरक्षित और सुचारू बनाए रखने के इंतजामों की नियमित जांच की जरूरत है।
1. सड़क पर पड़ा मलबा तत्काल क्यों नहीं हटाया जा रहा?
2. खुदाई वाले हिस्सों में पर्याप्त बैरिकेडिंग क्यों नहीं है?
3. रात में वाहन चालकों को सतर्क करने के क्या इंतजाम हैं?
4. निर्माण कार्य की समयसीमा क्या है?
5. मौके पर कार्य की निगरानी किस अधिकारी की जिम्मेदारी है?
जिम्मेदारों की आंखों के सामने ‘मलबे का विकास’
सबसे बड़ा सवाल यह है कि मुख्य सड़क पर फैली निर्माण सामग्री और सिमटता रास्ता जिम्मेदार अधिकारियों की नजर में क्यों नहीं आ रहा। यदि नियमित निरीक्षण किया जा रहा है तो स्थिति में सुधार क्यों नहीं दिखाई दे रहा?
बैरिकेडिंग, चेतावनी संकेत और मलबा हटाने जैसे बुनियादी इंतजाम भी यदि समय पर नहीं होते हैं, तो निर्माण कार्य की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल और गंभीर हो जाते हैं।
हादसे का इंतजार या व्यवस्था में तत्काल सुधार?
स्थानीय लोगों ने संबंधित विभाग से सड़क पर पड़ा मलबा तत्काल हटाने, खुदाई वाले हिस्सों में मजबूत बैरिकेडिंग लगाने, रात में पर्याप्त चेतावनी संकेत लगाने और नाली निर्माण को शीघ्र पूरा कराने की मांग की है।
विकास कार्य जरूरी हैं, लेकिन विकास के नाम पर आम जनता की सुरक्षा और सुगम आवागमन से समझौता नहीं किया जा सकता। संबंधित विभाग और निर्माण एजेंसी यदि समय रहते व्यवस्था सुधारते हैं तो संभावित दुर्घटनाओं से बचा जा सकता है।
सड़क पर मलबा पड़ा है, रास्ता सिमट रहा है और खुदाई के हिस्से जोखिम बढ़ा रहे हैं। ऐसे में क्या जिम्मेदार किसी हादसे का इंतजार करेंगे, या हादसे से पहले ही मलबा हटाकर सुरक्षित यातायात की व्यवस्था सुनिश्चित करेंगे?
