सांसद के गांव में कृषि सेवा केंद्र के निरीक्षण पर गंभीर आरोप: 10 हजार रुपये लेने की शिकायत, कार्रवाई क्यों रुकी?
निरीक्षण टीप में दर्ज हुईं कथित अनियमितताएं, दुकान सीज करने की बात के बाद भी कार्रवाई नहीं; संचालक और व्यापारियों के आरोपों ने बढ़ाए सवाल
दैनिक रेवांचल टाइम्स, मंडला। नारायणगंज विकासखंड के ग्राम खिन्हा रिपटा स्थित चौबे कृषि सेवा केंद्र में कृषि विभाग द्वारा किए गए निरीक्षण को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। दुकान संचालक का आरोप है कि निरीक्षण के दौरान कथित रूप से 10 हजार रुपये लिए गए, जबकि निरीक्षण टीप में दर्ज अनियमितताओं के बावजूद दुकान के खिलाफ तत्काल कार्रवाई नहीं की गई।
बताया जा रहा है कि कृषि विभाग के सहायक संचालक अरविंद वर्मा के नेतृत्व में एक टीम कृषि सेवा केंद्र के निरीक्षण के लिए पहुंची थी। निरीक्षण के दौरान विभागीय टीप अथवा डायरी में कई बिंदुओं पर कमियां और दस्तावेजों से संबंधित टिप्पणियां दर्ज की गईं। निरीक्षण टीप की एक प्रति दुकान संचालक को भी उपलब्ध कराई गई।
दुकान सीज करने की बात, फिर कार्रवाई नहीं—यहीं से उठे सवाल
दुकान संचालक का आरोप है कि निरीक्षण के दौरान टीम ने कथित अनियमितताओं का हवाला देते हुए दुकान सीज करने और विभागीय कार्रवाई की बात कही थी। आरोप यह भी है कि इसके बाद 10 हजार रुपये की राशि ली गई और टीम बिना दुकान सीज किए वापस लौट गई।
यदि यह दावा सही है, तो सबसे बड़ा सवाल यही है कि निरीक्षण टीप में दर्ज कमियों के आधार पर आगे की कार्रवाई क्यों नहीं हुई। वहीं यदि अनियमितताएं कार्रवाई योग्य नहीं थीं, तो निरीक्षण के दौरान दुकान सीज करने की बात क्यों कही गई—यह भी जांच का विषय है।
मामले में सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह बताया जा रहा है कि निरीक्षण की लिखित टीप दुकान संचालक के पास मौजूद है। ऐसे में जांच के दौरान यह दस्तावेज स्पष्ट कर सकता है कि वास्तव में कौन-कौन सी कमियां दर्ज की गई थीं और उन पर विभागीय स्तर पर क्या कार्रवाई प्रस्तावित थी।
व्यापारियों ने भी लगाए निरीक्षण के नाम पर वसूली के आरोप
जिले के कुछ खाद-बीज व्यापारियों द्वारा भी आरोप लगाया गया है कि कृषि विभाग के सहायक संचालक अरविंद वर्मा द्वारा निरीक्षण के नाम पर कथित रूप से अवैध वसूली की जाती है। हालांकि इन आरोपों की भी स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है और संबंधित अधिकारी का पक्ष सामने आना बाकी है।
◆ निरीक्षण टीप में वास्तव में कौन-कौन सी अनियमितताएं दर्ज की गईं?
◆ क्या दुकान सीज करने या लाइसेंस संबंधी कार्रवाई प्रस्तावित की गई थी?
◆ यदि कार्रवाई प्रस्तावित थी तो उसे रोका किस आधार पर गया?
◆ 10 हजार रुपये लेने के आरोप में क्या कोई साक्ष्य या लेन-देन का रिकॉर्ड उपलब्ध है?
◆ क्या जिले के अन्य व्यापारियों की भी इसी तरह की लिखित शिकायतें मौजूद हैं?
वरिष्ठ अधिकारियों से निष्पक्ष जांच की मांग
मामले में अब कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से निष्पक्ष जांच की मांग उठ रही है। जांच में निरीक्षण टीप, टीम में शामिल अधिकारियों-कर्मचारियों के बयान, दुकान संचालक के आरोप और संभावित लेन-देन से जुड़े तथ्यों की पड़ताल की जा सकती है।
जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि निरीक्षण के दौरान वास्तविक स्थिति क्या थी, कार्रवाई क्यों नहीं हुई और 10 हजार रुपये लेने के आरोप में कितनी सच्चाई है।
यदि निरीक्षण में अनियमितताएं दर्ज थीं तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई? और यदि कार्रवाई की जरूरत नहीं थी तो दुकान सीज करने की बात क्यों कही गई? विभागीय रिकॉर्ड और निष्पक्ष जांच ही इन सवालों का जवाब दे सकती है।
