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घुघरी का मुख्य चौराहा बना तालाब, सड़क हुई गायब! इक्कीसवीं सदी में हुए विकास की नई तस्वीर





*जनपद-तहसील कार्यालय जाने वाले मार्ग पर गड्ढों में भरा गंदा पानी*

*जिम्मेदारों की आंखों के सामने बदहाल व्यवस्था*

दैनिक रेवांचल टाइम्स | घुघरी।तहसील मुख्यालय घुघरी के मुख्य चौराहे की तस्वीरें इन दिनों विकास के दावों को आईना दिखाती नजर आ रही हैं। जिस प्रमुख मार्ग से प्रतिदिन जनपद पंचायत, तहसील कार्यालय सहित कई शासकीय कार्यालयों तक अधिकारी-कर्मचारी और आम नागरिक पहुंचते हैं, वही मार्ग बारिश के बाद सड़क कम और तालाब ज्यादा नजर आने लगा है। मुख्य मार्ग पर जगह-जगह बने गहरे गड्ढों में बारिश का पानी जमा हो गया है। पानी और कीचड़ से सड़क की वास्तविक स्थिति का अंदाजा लगाना भी मुश्किल हो गया है। हालात ऐसे हैं कि राहगीरों को यह तय करना पड़ रहा है कि सड़क पर गड्ढा कहां है और पानी कितना गहरा है।


*गड्ढों में पानी या पानी में गड्ढे?*

बारिश होते ही इस मार्ग की तस्वीर बदल जाती है। सड़क पर बने गड्ढे पानी से लबालब हो जाते हैं और वाहन चालकों के सामने सबसे बड़ी चुनौती होती है कि आखिर वाहन को किस रास्ते से निकाला जाए। दोपहिया वाहन चालक किसी तरह पानी और कीचड़ के बीच से निकलने को मजबूर हैं। वहीं पैदल राहगीरों और बाजार आने-जाने वाले नागरिकों को भी जलभराव से बचते हुए रास्ता तलाशना पड़ रहा है। पानी के भीतर छिपे गड्ढे कभी भी दुर्घटना का कारण बन सकते हैं।

*शासकीय कार्यालयों का रास्ता, फिर भी बदहाली से अनजान जिम्मेदार!*

विडंबना देखिए कि इसी मार्ग से प्रतिदिन जिम्मेदार राजस्व विभाग के साथ ही अन्य अधिकारी और कर्मचारी हर रोज ही गुजरते हैं। इसके बावजूद सड़क की यह बदहाली आखिर उनकी नजरों से कैसे बच रही है? जिस रास्ते से आम नागरिक अपनी समस्याएं लेकर जनपद पंचायत और तहसील कार्यालय पहुंचते हैं, उसी रास्ते पर नागरिकों को मूलभूत सुविधा के लिए जूझना पड़ रहा है। सवाल यह है कि क्या जिम्मेदारों को सड़क की यह हालत दिखाई नहीं देती या फिर दिखाई देने के बाद भी इसे नजरअंदाज किया जा रहा है?

*जलभराव वाले गड्ढे दे रहे हे बड़े हादसे को न्योता*

पानी भरे गड्ढों की गहराई का अंदाजा बाहर से लगाना मुश्किल है। ऐसे में वाहन चालक यदि अनजाने में किसी गहरे गड्ढे में उतर जाए तो दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। बाजार क्षेत्र होने के कारण यहां पैदल राहगीरों और वाहनों की आवाजाही लगातार बनी रहती है। खासकर दोपहिया वाहन चालकों के लिए यह मार्ग किसी चुनौती से कम नहीं है। सवाल उठता है कि क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे के बाद ही सड़क की सुध लेगा?

*बारिश आते ही खुल जाती है विकास की पोल*

एक ओर सड़कों और बुनियादी सुविधाओं के विकास के दावे किए जाते हैं, दूसरी ओर तहसील मुख्यालय के प्रमुख मार्ग की तस्वीरें जमीनी हकीकत सामने रख रही हैं। तस्वीरें बयां कर रही हैं उसके साथ ही हकीकत उससे भी ज़्यादा सवाल पैदा कर रहे हैं यदि तहसील मुख्यालय के मुख्य चौराहे की सड़क ही बारिश के पानी में अपना अस्तित्व खो दे, तो ग्रामीण और दूरदराज से आने वाले नागरिकों को बेहतर सड़क व्यवस्था का भरोसा कैसे दिया जा सकता है?

*स्थायी समाधान की जरूरत, खानापूर्ति की नहीं*

नागरिकों की मांग है कि संबंधित विभाग मौके का तत्काल निरीक्षण कर जल निकासी की उचित व्यवस्था कराए और सड़क के गड्ढों की स्थायी मरम्मत की जाए। केवल बारिश के दौरान मिट्टी या गिट्टी डालकर खानापूर्ति करने के बजाय समस्या का स्थायी समाधान किया जाना जरूरी है। क्योंकि यह केवल सड़क पर जमें पानी और उससे पैदा होने वाली बीमारियों को लेकर समस्या नहीं है, बल्कि आवागमन, सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था की कार्यप्रणाली से जुड़ा सवाल है।

*अब देखना यह है... सड़क सुधरेगी या तस्वीरें ही बोलती रहेंगी?*

घुघरी के मुख्य चौराहे की यह बदहाली जिम्मेदार विभागों के लिए किसी चेतावनी से कम नहीं है। अब देखना यह है कि तस्वीरें सामने आने के बाद जिम्मेदारों की नींद खुलती है या फिर बारिश का पानी सूखने के साथ समस्या को भी भुला दिया जाएगा। जनता का सवाल सीधा है—जब मुख्य चौराहे की सड़क ही तालाब बन जाए, तो विकास की असली तस्वीर आखिर कहां दिखाई देगी?

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