Breaking

revanchal times new

करोड़ों का सांदीपनी विद्यालय भवन, पहली बारिश में खुली निर्माण की पोल!

दैनिक रेवांचल टाइम्स | डिंडोरी

करोड़ों का सांदीपनी विद्यालय भवन, पहली बारिश में खुली निर्माण की पोल!

दीवारों में दरारें, छत से सीपेज ने खड़े किए गुणवत्ता पर सवाल; कलेक्टर ने दिए जांच के निर्देश, खामी मिली तो जिम्मेदारों पर होगी कार्रवाई

दैनिक रेवांचल टाइम्स | डिंडोरी। करोड़ों रुपये की लागत से तैयार किए गए सांदीपनी विद्यालय भवन की निर्माण गुणवत्ता पहली ही बारिश के बाद सवालों के घेरे में आ गई है। पुलिस हाउसिंग बोर्ड द्वारा निर्मित बताए जा रहे भवन में बारिश के बाद कई स्थानों पर सीपेज दिखाई देने और दीवारों में दरारें नजर आने का मामला सामने आया है।


विद्यार्थियों को सुरक्षित और बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से तैयार भवन में शुरुआती दौर में ही ऐसी स्थिति सामने आने के बाद निर्माण की गुणवत्ता, तकनीकी निगरानी और उपयोग की गई सामग्री को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

पहली बारिश और भवन में सीपेज-दरारों की शिकायत करोड़ों की लागत से बने विद्यालय भवन में शुरुआती बारिश के बाद ही सीपेज और दरारें दिखाई देने से निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि वास्तविक तकनीकी खामी कितनी गंभीर है, इसका निर्धारण विशेषज्ञ जांच के बाद ही हो सकेगा।

पहली बारिश में दीवारों पर दिखा सीपेज

सांदीपनी विद्यालय भवन की सामने आई स्थिति में बारिश के बाद दीवारों और छत के कुछ हिस्सों में सीपेज दिखाई देने की बात कही जा रही है। इसके साथ ही कई स्थानों पर दरारें नजर आने से भवन की निर्माण गुणवत्ता को लेकर चिंता बढ़ी है।



ऐसे में सवाल उठ रहा है कि निर्माण के दौरान जलरोधक व्यवस्था और निर्धारित तकनीकी मानकों का कितना पालन किया गया? निर्माण सामग्री की गुणवत्ता का परीक्षण किस स्तर पर हुआ और निर्माण के अलग-अलग चरणों में संबंधित अधिकारियों द्वारा किस तरह का निरीक्षण किया गया?

निर्माण पर उठ रहे चार बड़े सवाल ◆ क्या भवन में पर्याप्त वॉटरप्रूफिंग की गई थी? ◆ निर्माण सामग्री की गुणवत्ता का परीक्षण हुआ था? ◆ निर्माण के दौरान तकनीकी निरीक्षण कितनी बार किया गया? ◆ दरारें केवल सतही हैं या इनके पीछे कोई तकनीकी खामी है?

बच्चों की सुरक्षा से जुड़ा मामला, नजरअंदाज नहीं की जा सकती शिकायत

विद्यालय भवन महज एक सरकारी निर्माण परियोजना नहीं है। यहां बड़ी संख्या में विद्यार्थी पढ़ाई करते हैं और शिक्षक-कर्मचारी प्रतिदिन मौजूद रहते हैं। ऐसे में दीवारों में दरार या छत से सीपेज जैसी शिकायतों की तकनीकी जांच जरूरी हो जाती है।

यदि निर्माण के शुरुआती समय में ही किसी प्रकार की खामी सामने आती है तो उसका समय रहते परीक्षण और आवश्यक सुधार कराया जाना जरूरी है, ताकि विद्यार्थियों और कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर किसी तरह की आशंका न रहे।

कलेक्टर ने लिया संज्ञान, जांच के निर्देश

मामला सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने भी इसे गंभीरता से लिया है। डिंडोरी कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया ने मामले की जांच कराने की बात कही है।

कलेक्टर के अनुसार जांच में यदि निर्माण कार्य में लापरवाही अथवा किसी प्रकार की खामी सामने आती है तो जिम्मेदारों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन के इस रुख के बाद अब निगाहें जांच और उसकी रिपोर्ट पर टिक गई हैं।

अब जांच बताएगी असली तस्वीर
भवन में दिखाई दे रही दरारों और सीपेज के पीछे वास्तविक तकनीकी कारण क्या हैं, निर्माण मानकों का पालन हुआ या नहीं और किसी स्तर पर लापरवाही हुई या नहीं—इन सवालों का जवाब तकनीकी जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।

करोड़ों का निर्माण, जवाबदेही किसकी?

सरकारी निर्माण में जनता का पैसा खर्च होता है। ऐसे में करोड़ों की लागत से तैयार किसी भवन में शुरुआती समय में ही सीपेज और दरारों जैसी शिकायतें सामने आएं तो निर्माण एजेंसी के साथ गुणवत्ता नियंत्रण और निगरानी से जुड़े अधिकारियों की भूमिका की जांच भी महत्वपूर्ण हो जाती है।

यह भी देखना होगा कि निर्माण में इस्तेमाल सामग्री की गुणवत्ता संबंधी परीक्षण रिपोर्ट क्या कहती है, निर्धारित तकनीकी मानकों का पालन हुआ या नहीं और निर्माण पूर्ण होने से पहले किस स्तर पर गुणवत्ता सत्यापन किया गया था।

मरम्मत ही पर्याप्त या जिम्मेदारी भी होगी तय? यदि जांच में निर्माण संबंधी खामी प्रमाणित होती है तो बड़ा सवाल यह भी रहेगा कि मामला केवल मरम्मत तक सीमित रहेगा या लापरवाही के लिए जिम्मेदार एजेंसी और अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जाएगी।

पहली बारिश ने दी चेतावनी, रिपोर्ट पर टिकी निगाहें

भवन की मौजूदा स्थिति ने कई सवाल जरूर खड़े किए हैं, लेकिन निर्माण में वास्तविक तकनीकी खामी है या सीपेज और दिखाई दे रही दरारों के पीछे कोई अन्य कारण है, इसका अंतिम निष्कर्ष विशेषज्ञ जांच के बाद ही निकाला जाना उचित होगा।

करोड़ों का भवन... पहली बारिश... सीपेज और दरारें! अब जांच से तय होगा—निर्माण में तकनीकी खामी है या नहीं और यदि लापरवाही हुई तो जिम्मेदारी किसकी?

अब देखना यह है कि प्रशासन की जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं। जनता के पैसे से तैयार विद्यालय भवन की गुणवत्ता पर उठे सवालों का स्पष्ट जवाब जांच रिपोर्ट से मिलने की उम्मीद है।

नोट: भवन में सीपेज और दरारों के आधार पर निर्माण में तकनीकी लापरवाही का अंतिम निष्कर्ष अभी नहीं निकाला गया है। वास्तविक स्थिति और जिम्मेदारी अधिकृत तकनीकी जांच एवं प्रशासनिक रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होगी।

Post a Comment

Previous Post Next Post