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बिना नंबर और कथित बिना रॉयल्टी के दौड़ रहे ट्रैक्टर, हादसे के बाद पलटी रेत से भरी ट्रॉली





बारिश में बंद खदानों के बावजूद हलोन नदी से रेत निकासी का आरोप, 

रेवांचल टाइम्स बिछिया मंडला जिले में बारिश के मौसम के चलते रेत खदानों पर प्रतिबंध लगाए जाने के बावजूद कथित अवैध रेत परिवहन का खेल थमता नजर नहीं आ रहा है। प्रशासन की पाबंदियां कागजों तक सीमित हैं या फिर रेत माफियाओं के सामने जिम्मेदार तंत्र बेबस है—यह सवाल अब सड़क पर हुए एक हादसे के बाद और गंभीर हो गया है। बिछिया थाना क्षेत्र में रेत से भरे एक कथित बिना नंबर के ट्रैक्टर ने बाइक सवार को पीछे से टक्कर मार दी। हादसे में बाइक सवार  घायल हो गया, जबकि टक्कर के बाद ट्रैक्टर अनियंत्रित होकर ट्रॉली पलट गई।

सूत्रों से जानकारी के अनुसार बिछिया थाना अंतर्गत ग्राम पंचायत कोको डेम के समीप यह हादसा हुआ। बताया जा रहा है कि मोटरसाइकिल से जा रहे कृष्ण कुमार मांडवे उम्र लगभग 34 वर्ष, पिता धर्म सिंह, निवासी पटपरा घुटास को पीछे से तेज रफ्तार में आ रहे रेत से भरे ट्रैक्टर ने टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जोरदार बताई जा रही है कि बाइक सवार सड़क पर गिरकर घायल हो गया। वहीं चालक ट्रैक्टर पर नियंत्रण नहीं रख सका और रेत से भरी ट्रॉली पलट गई।

हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। घायल कृष्ण कुमार मांडवे को 108 एंबुलेंस की सहायता से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बिछिया पहुंचाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उसकी हालत को देखते हुए जिला अस्पताल रेफर किए जाने की जानकारी सामने आई है।

हादसे ने खोल दी अवैध रेत परिवहन की पोल

यह घटना महज सड़क हादसा है या अवैध रेत परिवहन के उस नेटवर्क की तस्वीर, जिस पर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं? हादसे के बाद यह सवाल इसलिए भी उठ रहा है क्योंकि स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि रेत से भरे ट्रैक्टर बिना नंबर और कथित बिना रॉयल्टी के क्षेत्र में दौड़ रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार, बारिश के चलते जिले में रेत उत्खनन पर पाबंदी होने के बावजूद हलोन नदी के बिछिया क्षेत्र से कथित तौर पर रेत निकालकर उसका परिवहन किया जा रहा है। आरोप है कि रात के अंधेरे से लेकर दिन के समय तक ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के जरिए रेत को इधर-उधर पहुंचाया जा रहा है। यदि यह जानकारी सही है तो सवाल सीधे तौर पर खनिज विभाग, राजस्व विभाग और पुलिस की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़ा होता है।

बिना नंबर के वाहन सड़क पर कैसे दौड़ रहे

हादसे में शामिल बताए जा रहे ट्रैक्टर के बिना नंबर होने की बात सामने आने के बाद परिवहन व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। आखिर बिना पंजीयन नंबर के कोई ट्रैक्टर सार्वजनिक सड़क पर कैसे संचालित हो रहा था यदि वाहन पर नंबर नहीं था तो क्या संबंधित विभाग की नजर ऐसे वाहनों पर नहीं है और यदि वाहन पंजीकृत है तो नंबर प्लेट क्यों नहीं लगाई गई

सड़क पर दौड़ते भारी वाहनों के लिए नियम-कायदे तय हैं। लेकिन यदि बिना नंबर, बिना वैध दस्तावेज और कथित बिना रॉयल्टी के रेत परिवहन करने वाले वाहन खुलेआम दौड़ रहे हैं तो यह केवल खनिज संपदा की चोरी का मामला नहीं, बल्कि आम लोगों की सुरक्षा से जुड़ा प्रश्न भी है।

रेत माफियाओं के हौसले बुलंद

स्थानीय लोगों के बीच चर्चा है कि बिछिया क्षेत्र में रेत का अवैध कारोबार कोई नया मामला नहीं है। नदी से रेत निकालने और उसे ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से परिवहन करने का कथित सिलसिला लंबे समय से चल रहा है। प्रशासन द्वारा कार्रवाई और प्रतिबंध की बातें सामने आती हैं, लेकिन कुछ समय बाद वही वाहन फिर सड़कों पर दिखाई देने लगते हैं।

यदि बारिश के मौसम में खदानें बंद हैं, तो फिर रेत से लदी ट्रैक्टर ट्रॉलियां आखिर कहां से आ रही हैं यदि रेत वैध है तो उसकी रॉयल्टी और परिवहन संबंधी दस्तावेज क्या हैं और यदि रेत अवैध रूप से निकाली जा रही है तो नदी क्षेत्र में निगरानी कौन कर रहा है

हादसा चेतावनी है, कार्रवाई कब

बिछिया क्षेत्र में हुआ यह हादसा प्रशासन के लिए एक चेतावनी माना जा सकता है। आज एक बाइक सवार घायल हुआ है, कल कोई बड़ा हादसा हो जाए तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा तेज रफ्तार में दौड़ते रेत से भरे ट्रैक्टर न केवल सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाने के आरोपों से घिरे हैं, बल्कि सड़क पर चलने वाले लोगों के लिए भी खतरा बन सकते हैं।

सूत्रों से जानकारी अनुसार वाहन मालिक के रूप में राजा ठाकुर, निवासी बिछिया का नाम बताया जा रहा है। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि संबंधित जांच के बाद ही हो सकेगी। ऐसे में आवश्यक है कि पुलिस और संबंधित विभाग हादसे में शामिल वाहन के दस्तावेज, रेत की वैधता, रॉयल्टी, वाहन पंजीयन और चालक के संबंध में पूरी जांच करें।

सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि क्षेत्र में अवैध रेत परिवहन हो रहा है तो जिम्मेदार विभागों को इसकी जानकारी क्यों नहीं है नदी क्षेत्रों में निगरानी के लिए प्रशासनिक अमला और पुलिस व्यवस्था मौजूद है। इसके बावजूद यदि कथित तौर पर रेत से भरे वाहन लगातार आवाजाही कर रहे हैं तो कहीं न कहीं निगरानी व्यवस्था में  चूक की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

अब जरूरत केवल हादसे की जांच तक सीमित रहने की नहीं, बल्कि पूरे कथित अवैध रेत परिवहन नेटवर्क की पड़ताल करने की है। नदी से रेत कहां से निकाली जा रही है, किसके इशारे पर निकाली जा रही है, किन वाहनों से परिवहन हो रहा है, रेत कहां पहुंचाई जा रही है और इस पूरे कारोबार में किन लोगों की भूमिका है—इन तमाम सवालों के जवाब सामने आना जरूरी है।

सवाल सीधा है—जब बारिश के चलते रेत खदानें बंद हैं तो सड़क पर रेत से भरे ट्रैक्टरों की दौड़ क्यों जारी है यदि परिवहन वैध है तो रॉयल्टी और दस्तावेज सामने क्यों नहीं आते और यदि परिवहन अवैध है तो कार्रवाई के नाम पर अब तक क्या किया गया

अब देखना यह है कि इस हादसे के बाद प्रशासन महज पंचनामा और जांच तक सीमित रहता है या फिर हलोन नदी क्षेत्र में चल रहे कथित अवैध रेत कारोबार की जड़ तक पहुंचकर कार्रवाई करता है। वरना सवाल यही रहेगा—रेत माफियाओं पर प्रशासन का शिकंजा है या फिर सब कुछ यूं ही चलता रहेगा।

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