_प्रदेश का ऐसा कोई नेता सगा नहीं जिसने अतिथि शिक्षकों को ठगा नहीं_
*दैनिक रेवाँचल टाईम्स - भोपाल।* एक तरफ प्रदेश में शिक्षक दिवस पर सम्मान समारोह हो रहे थे, दूसरी तरफ तेज बारिश और कीचड़ से भरे शाहजहांनी पार्क में हजारों अतिथि शिक्षक वादाखिलाफी के खिलाफ हल्लाबोल कर रहे थे। जहां पर मण्डला जिले से भी अतिथि शिक्षक पहुंचे।दिन भर आंदोलन चला पर सरकार बात करने नहीं आई तो मांगों का ज्ञापन अग्नि के हवाले कर 2 अक्टूबर 2026 से अनिश्चितकालीन हड़ताल का संकल्प लिया।
मण्डला से आंदोलन में पहुंचे जिला अध्यक्ष पी.डी. खैरवार, हेमराज मसराम, रूमीना खान ने बताया, कि यही ऐतिहासिक पार्क है जहां वर्षों पहले महीनों तक आंदोलन हुआ था। जिसके चलते कमलनाथ की सरकार गिरी थी।
*सम्मान एक का, घोर अपमान दूसरे का क्यों?*
शिक्षक दिवस पर पर भोपाल में सरकार ने राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान समारोह रखा जबकि अतिथि शिक्षक भी शिक्षकीय भूमिका में होते हैं पर उनका सम्मान तो दूर उनके आंदोलन में सरकार का कोई नुमाइंदा तक नहीं पहुंचा। जिससे प्रदेश भर से आए अतिथि शिक्षकों ने भारी अपमान का अनुभव किया और ज्ञापन प्रशासन के हाथों भी नहीं सौंपकर ज्ञापन को अग्नि के हवाले करके 2 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन सत्याग्रह करके अपनी बात सरकार के सामने रखने का संकल्प लिया है।
*18 साल से शोषण -* 2007 में शुरू हुई व्यवस्था 18 साल बाद भी अंशकालीन है।वह चाहे जब हटा दिया जाता है। जिससे उसके परिवार पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो जाता है। इतना शोषण अतिथि शिक्षकों का होता आ रहा है।
*सिर्फ जुमले -* तत्कालीन शिवराज सिंह चौहान ने 2 सितंबर 2023 को सरकारी खजाने से करोड़ों खर्च करके भोपाल महापंचायत में नियमित करने का वादा किया, जो झूठा साबित हो गया। कमलनाथ ने संकल्प पत्र पर लाकर सरकार बनाकर अपमान किया। डॉ. मोहन यादव ने विधायक रहते समर्थन पत्र दिया, आज मुख्यमंत्री बनकर भूल गए। अतिथि शिक्षकों के समर्थन में सैकड़ों सांसद-विधायकों के पत्र भी कचरे में पड़े हुए हैं।या यह कहना ग़लत नहीं होगा कि ऐसा नेता कोई सगा नहीं जिसने अतिथि शिक्षकों को ठगा नहीं।
सिंधिया न्याय दिलाने का वादा कर भाजपा में आए थे, हालात जस के तस हैं। एक साल पहले और अभी हाल ही में शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह का अवकाश का वादा भी झूठा निकला। 18 साल में सैकड़ों अतिथि शिक्षक आत्महत्या कर चुके, सरकार मौन है।
समिति के संस्थापक पी डी खैरवार ने कहा अब ज्ञापन बस नहीं, आर-पार की लड़ाई के लिए भी मजबूर हैं प्रदेश के अतिथि शिक्षक।
