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धर्म, कर्म और मर्म समझकर रखें व्रत

🕉️ धर्म, कर्म और मर्म समझकर रखें व्रत

उपवास केवल भूखा रहना नहीं, बल्कि आत्मसंयम और चरित्र निर्माण का मार्ग है

✍️ लेखक : प्रतिक संघवी, राजकोट (गुजरात)

दैनिक रेवांचल टाइम्स। मनुष्य ने घड़ी बनाई है, लेकिन समय नहीं बनाया। कैलेंडर मनुष्य ने बनाया है, लेकिन सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रमा की कलाएं और ऋतु परिवर्तन प्रकृति के नियमों से संचालित होते हैं। भारत की प्राचीन सभ्यता ने समय को केवल तारीखों और घड़ियों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि सूर्य, चंद्रमा, तिथि, नक्षत्र और ऋतुचक्र के माध्यम से समझने का प्रयास किया।

✨ "हर पुरानी चीज अंधविश्वास नहीं होती और हर नई चीज प्रगति नहीं होती"

📖 परंपरा को समझे बिना न करें खारिज

आधुनिकता के दौर में कई लोग बिना समझे भारतीय परंपराओं को पुराना या अवैज्ञानिक घोषित कर देते हैं। प्रशासनिक व्यवस्था के लिए रात 12 बजे तारीख बदलना आवश्यक हो सकता है, लेकिन धार्मिक कालगणना का आधार सदैव सूर्योदय, तिथि और विशेष मुहूर्त रहे हैं। इसलिए धार्मिक समय को केवल आधुनिक घड़ी के आधार पर समझना पर्याप्त नहीं माना जा सकता।

⏳ सुविधा नहीं, समझ जरूरी

आज समाज की सबसे बड़ी समस्या यह बनती जा रही है कि हम हर परंपरा को अपनी सुविधा के अनुसार बदलना चाहते हैं। समय नहीं है तो पूजा छोटी कर दो, नियम कठिन है तो नियम बदल दो और समझ में न आए तो उसे अंधविश्वास कह दो। जबकि विवेकपूर्ण अध्ययन के बिना किसी परंपरा को गलत ठहराना उचित नहीं है।

🌿 "भूखा रहना आसान है, लेकिन अपने क्रोध और लोभ पर नियंत्रण रखना कठिन है"

🙏 व्रत का वास्तविक अर्थ

उपवास केवल भोजन का त्याग नहीं है। 'उपवास' शब्द 'उप' और 'वास' से मिलकर बना है, जिसका अर्थ है ईश्वर के निकट रहना और इन्द्रियों पर नियंत्रण रखना। यदि पेट खाली हो लेकिन मन क्रोध, ईर्ष्या, लोभ और द्वेष से भरा हो, तो केवल भूखा रहना व्यक्ति को धार्मिक नहीं बना सकता।

⚖️ धर्म का सबसे बड़ा शत्रु पाखंड

धर्म का सबसे बड़ा विरोधी आधुनिकता नहीं, बल्कि पाखंड है। यदि कोई व्यक्ति पूजा-पाठ करे लेकिन अन्याय, भ्रष्टाचार, शोषण और नफरत फैलाने का कार्य करे, तो केवल धार्मिक पहचान उसे धार्मिक नहीं बना सकती। धर्म का वास्तविक स्वरूप व्यक्ति के चरित्र और कर्मों में दिखाई देता है।

🏛️ "धर्म का पहला मंदिर मनुष्य का चरित्र है"

🇮🇳 सच्चा धर्म क्या है?

धर्म केवल नारे लगाने का विषय नहीं है। सच्चा धर्म अपने देश, इतिहास, भाषाओं और सभ्यता को समझने, उनका सम्मान करने और उनसे सीखने में है। सच्चा धर्म अंधभक्ति नहीं, बल्कि ज्ञान आधारित आत्मसम्मान है।

🚀 आधुनिकता और संस्कृति का संतुलन

भारत को अपनी जड़ों से जुड़ना है, लेकिन पीछे नहीं जाना। विज्ञान, तकनीक, अंतरिक्ष और आधुनिक विकास के साथ आगे बढ़ते हुए अपनी सांस्कृतिक पहचान को भी सुरक्षित रखना होगा। हमें आधुनिक बनना है, लेकिन आत्मविहीन नहीं; वैज्ञानिक बनना है, लेकिन अपनी ज्ञान-परंपरा से अनजान नहीं।

🌺 सनातन धर्म की वास्तविक शक्ति

धर्म केवल मंदिर में नहीं है, केवल व्रत में नहीं है और केवल तिलक में भी नहीं है। धर्म हमारे विचारों, व्यवहार और कर्मों में होना चाहिए।

प्रकृति को समझना, परंपरा को जानना, विवेक से सोचना और ईमानदारी से अपना कर्तव्य निभाना— यही सनातन धर्म की वास्तविक शक्ति है।

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